मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट हो गई तैयार, 12 जून को होगा दूध का दूध और पानी का पानी

हैदराबाद: ज्ञातव्य है कि मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज कर दिया था। मीनाक्षी का नामांकन खारिज होने पर कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। नामांकन खारिज करने के रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को चुनौती देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। याचिका में कहा गया कि मीनाक्षी पर तेलंगाना में कोई आपराधिक मामला ही नहीं है, सिर्फ कोर्ट नोटिस ही है। इस बीच कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट राजी हो गया। 11 जून को इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तुरंत अंतरिम आदेश नहीं दे सकते और सुनवाई को 12 जून तक के लिए टाल दिया।

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेता केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, अभिषेक मनु सिंघवी समेत अन्य नेताओं ने बुधवार को चुनाव आयोग से मिलकर शिकायत की। इसके बाद कांग्रेस लीगल सेल के चेयरमैन अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला कानूनी तौर पर सही नहीं है। आरओ का आदेश 2+2=4 कहने के बजाय 2+2=7 कहने जैसा है। सिंघवी ने कहा कि जनप्रतिनिधि कानून की धारा 33ए के अनुसार उम्मीदवारों को सिर्फ दो साल से ज्यादा सजा होने की संभावना वाले मामले और कोर्ट द्वारा आधिकारिक तौर पर आरोप तय किए गए मामलों का ब्योरा ही देना होता है। उन्होंने बताया कि तेलंगाना में मीनाक्षी नटराजन को सिर्फ कोर्ट नोटिस ही मिला है, केस पर कोर्ट ने अभी ‘कॉग्निजेंस’ भी नहीं लिया है। उन्होंने सवाल किया, “जब कॉग्निजेंस ही नहीं है तो कानून की नजर में आपराधिक मामला ही नहीं बनता। ऐसे में वह कौन सा केस छिपा रही हैं?”

सिंघवी ने आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को व्यापक अधिकार हैं। जब रिटर्निंग ऑफिसर गलत तरीके से नामांकन खारिज कर दे तो चुनाव आयोग को दखल देकर सुधार करने का अधिकार है। उन्होंने याद दिलाया कि हरियाणा और गुजरात राज्यों में पहले ऐसे मौकों पर ईसी ने दखल दिया है। मीनाक्षी नटराजन ने आरोप लगाया कि उनके नामांकन को खारिज करने के पीछे राजनीतिक साजिश है। तेलंगाना में एक कोर्ट के मामले को कारण बताकर उनका नामांकन खारिज करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा में जरूरी संख्या बल न होने के बावजूद बीजेपी ने तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार को मैदान में उतारा है।

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मीनाक्षी ने आगे कहा कि पहले क्रॉस वोटिंग, पार्टी में दल-बदल के जरिए सीट हथियाने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस विधायकों के एकजुट रहने से नई रणनीति अपनाई। उन्होंने साफ किया कि उन पर सिर्फ एक लीगल नोटिस है, वह क्रिमिनल केस नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में ईसी ने काम किया है। दूसरी ओर से मीनाक्षी के नामांकन खारिज होने का मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों को अपने ऊपर लंबित आपराधिक मामलों को हलफनामे में बताना चाहिए।

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