“इतिहास को भूलना संस्कृति को मिटाने से कम नहीं” : हैदराबाद मुक्ति दिवस पर पंडित गंगाराम स्मारक मंच के अध्यक्ष भक्तराम का संदेश

नोट- स्वतंत्रता सेनानी पंडित गंगाराम स्मारक मंच के नेतृत्व में 17 सितंबर को हैदराबाद मुक्ति दिवस पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन आर्य कन्या विद्यालय हाई स्कूल (सुलतान बाजार) में किया गया। इस कार्यक्रम में प्रमुख साहित्यकार डॉ. नयन कुमार आचार्य आर्य (परली, महाराष्ट्र) मुख्य अतिथि, विशेष अतिथि वैद्यनाथ, डॉ. मैत्रेयी शास्त्री और अन्य ने भाग लिया और संबोधित किया। पंडित गंगाराम स्मारक मंच के अध्यक्ष भक्त राम का संदेश पाठकों की जानकारी के लिए दे रहे है। भविष्य में भी अन्य वक्ताओं के संदेश प्रकाशित किए जाएंगे।

मंच पर उपस्थित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परली से पधारे सम्माननीय डॉ नयन कुमार जी आचार्य, संपादक, वैदिक गर्जना मासिक पत्रिका तथा साप्ताहिक लातूर समाचार, स्वतंत्रता सेनानी पंडित विश्वनाथ जी के सुपुत्र और इस कार्यक्रम के विशेष अतिथि श्री वैद्यनाथ जी तथा पंडित विश्वनाथ जी की नवासी डॉ मैत्रेयी शास्त्री जी और इस मंच के पदाधिकारी गण, सदस्य गण, शुभचिंतक और इस कार्यक्रम को सफल बनाने यहां उपस्थित सभी सज्जनों को मेरी ओर से सादर नमस्ते।

आज हम स्वतंत्रता सेनानी स्वामी सच्चिदानंद जी सरस्वती एवं उनके छोटे भाई स्वतंत्रता सेनानी पंडित विश्वनाथ जी और तेलुगु में “विराट” पत्रिका के संस्थापक वेंकटेश्वर शास्त्री जी को नमन करते हुए इस हैदराबाद मुक्ति दिवस पर (unsung heroes) गुमनाम नायकों की याद में उन्हें स्मरण करते हुए इस कार्यक्रम को मनाने का संकल्प लिया।

मेरा मानना है क इतिहास को भूलना संस्कृति को मिटाने से कम नहीं है। आज हम जिनके विषय में बात कर रहे हैं, वे हैं हैदराबाद निज़ाम के क्रूर शासन के मध्य, आज के पुराने शहर हैदराबाद में 6 आर्य समाजों को स्थापना की थी। आर्य समाज सेवियों को कैसे – कैसे विषम परिस्थितियों को झेलना पड़ा होगा? इसकी कल्पना मात्र से हमारी रूह कांप उठती है। ओ३म् का ध्यज फहराना भी तब कठिन था। उस काल में उन्होंने छ: आर्य समाजों की स्थापना कर हिंदु समुदाय को संगठित करने का जो महान कार्य किया, वह हैदराबाद मुक्ति के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया।

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यहां पर आपको बताना चाहता हूं कि मेरे पूज्य पिताजी क्रांतिवीर पंडित गंगाराम वानप्रस्थी जी द्वारा स्थापित आर्यन डिफेंस लीग (आर्य रक्षा समिति) के पंडित विश्वनाथ जी भी एक सक्रिय सदस्य थे। आर्य रक्षा समिति ने 1938 में 22 अलग-अलग जत्थों से आर्य सत्याग्रह को आरंभ किया और हैदराबाद स्टेट में मुख्य – मुख्य स्थानों से जत्थे निकालकर बड़ी संख्या में गिरफ्तारी दी और हिंदु समुदाय में जागृति लाई।

आर्यन डिफेंस ली के नेतृत्व में क्रांतिकारी कई योजनाएं बनाई गई और निजाम के शासन को कभी भी विश्राम करने नहीं दिया। आर्यन डिफेन्स लीग ने ही पहले निज़ाम शासन के विरुद्ध सीरियल बम विस्फोट किये। हिंदु समुदाय को शस्त्र विद्या का प्रशिक्षण दिया। इनके नेतृत्व में ही आर्य समाजों और मंदिरों में दी जाती रही। शस्त्र प्रशिक्षण के कारण ही रजाकारों की दमनकारी नीतियों से हिंदु समुदाय की रक्षा की जा सकी।

आर्य समाज की स्थापना केवल यज्ञ के लिए नहीं होती थी। वहां पर आर्य वीर दल का गठन भी हुआ। साथ ही युवाओं में आत्मरक्षा हेतु प्रशिक्षण दिया गया। कल्पना करिए उन्होंने कितनों को रक्षार्थ समर्थ बनाया होगा और अनहोनी से बचाया। आज हम स्वतंत्र हैं। बड़े गर्व की बात है कि यहां उपस्थित लगभग सभी परिवारों में आर्य सत्याग्रहों से संबंध रहा है और हैदराबाद मुक्ति में उनका योगदान अमूल्य है।

इस अवसर पर यह सब देखकर अनेक गुमनाम नायकों के परिवार के सदस्यों को हमारे संग रहकर बड़ी प्रसन्नता हो रही है। इस हैदराबाद मुक्ति दिवस पर उन सभी हुतात्माओं, क्रांतिकारियों और उनके सभी साथियों को स्वतंत्रता सेनानी पंडित गंगाराम स्मारक मंच नमन करता है। जय हिंद। धन्यवाद।

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