हैदराबाद : 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म दिन देश भर में भव्य रूप से मनाया गया। बीजेपी गठित राज्य सरकारों ने इस जन्म दिन को सरकारी खजाने से मनाया है। जबकि अन्य राज्यों में बीजेपी के नेताओं ने पार्टी के धन से यह जश्न मनाया है।
सोशल मीडिया में यह बात कही जा रही है कि मोदी के जन्म दिन पर देश भर में खूब दीये जलाये गये हैं। इसके लिए बड़ी मात्रा में तेल का इस्तेमाल किया गया। यह बात समझ में नहीं आ रही है कि खर्चा कम करने की बात करने वाले प्रधानमंत्री मोदी इस खर्च पर चुप्पी साधे क्यों बैठे हैं। स्कूलों में पढ़ाई छोड़कर छात्रों को पूरा दिन जन्म दिन उत्सव में डूब गये। सोशल मीडिया में यह भी कहा जा रहा है कि किसी के मौत के बाद ही दीये जलाने की प्रथा है। अब यह नई परंपरा देश में आरंभ हो गई है।
मोदी के जन्म दिन को लेकर तेलुगु में एक और रोचक जानकारी सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। वह यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिन की सही तिथि क्या है। स्कूल के प्रमाणपत्र में मोदी का जन्म दिन 29 अगस्त 1949 है। इसी क्रम में बीए प्रवेश पत्र में 1 अक्तूबर 1958 है। साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय में 17 सितंबर 1950 है। एक व्यक्ति के तीन जन्म दिन और तीन साल है।
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गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से प्रधानमंत्री मोदी के बीए प्रमाणपत्र को लेकर देश में बहस जारी है। इस बीए सर्टिफिकेट पर नरेंद्र मोदी खुलासा करें। हालांकि, अब तक ऐसा नहीं हुआ। इतना ही नहीं, कोई छात्र किसी स्कूल या कॉलेज में पढ़ता है तो उसके अनेक दोस्त बनते हैं और रहते हैं। लेकिन अब तक मोदी के ऐसे किसी भी कॉलेज के दोस्त ने यह नहीं कहा कि वे मेरे क्लास मेट रह चुके हैं। अनेक नेताओं ने भी मोदी से बीए प्रमाणपत्र दिखाने की चुनौती दी है। जवाब है- खामोश। नरेंद्र मोदी के जन्म दिन और पढ़ाई के प्रमाणपत्रों को लेकर कहा जा रहा है कि दाल में कुछ काला जरूर है।

One thought on “1 अक्तूबर, 17 सितंबर या 29 अगस्त? मोदी के जन्मदिन की तारीख पर फिर छिड़ी बहस, दीयों से सजा जश्न या सवालों से घिरा सच”