हैदराबाद के नालसर यूनिवर्सिटी में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस उज्जल भुइयां की टिप्पणियां अब देशभर में चर्चा का विषय बन गई हैं। SIR का नाम लिए बिना हो रही वोट हटाने की प्रक्रिया पर भुइयां ने सनसनीखेज टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि करोड़ों नागरिकों को वोट के अधिकार से दूर करने वाली कोई भी प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से एकतरफा है, वह संविधान की मूल व्यवस्था को ही नुकसान पहुंचाती है। उसी समय नालसर के छात्रों को ‘साहसी’ बताकर उनकी प्रशंसा करने से गरमागरम बहस छिड़ गई है।
नालसर यूनिवर्सिटी में 4 अक्टूबर को हुए 19वें जस्टिस बीआर सावनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन कार्यक्रम में जस्टिस भुइयां ने अहम टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि संविधान के आर्टिकल 326 एवं आर्टिकल 14 के खिलाफ करोड़ों लोगों को वोट के अधिकार से दूर करने वाली प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान वोट का अधिकार रखने वाले नागरिक और वोट का अधिकार न रखने वाले नागरिक ऐसे दो वर्ग नहीं बनाता।
वोट का अधिकार संविधान के मूल स्वरूप का अहम हिस्सा है, बताते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी सत्ता आर्टिकल 326 को नुकसान नहीं पहुंचा सकती। टिप्पणी की कि ऐसी प्रक्रिया का कोई भी कोर्ट समर्थन नहीं करेगा। “लाखों लोगों को वोट के अधिकार से दूर करने वाली प्रक्रिया को किसी भी दलील से सही नहीं ठहराया जा सकता” कहते हुए ‘व्हाटअबाउटरी’ का भी जिक्र किया।
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फिलहाल देशभर में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर राजनीतिक और कानूनी रूप से चर्चा हो रही है, उसी समय भुइयां का यह कहना अहम हो गया है। हालांकि अपने भाषण में उन्होंने SIR नाम का सीधे जिक्र नहीं किया। वोट के अधिकार को बड़े पैमाने पर हटाने वाली कोई भी प्रक्रिया संविधान के लिहाज से समस्याग्रस्त होगी।
इसी कार्यक्रम में नालसर छात्रों की भी जस्टिस भुइयां ने प्रशंसा की। उन्होंने छात्रों को, “ब्रिलियंट, बोल्ड, ब्रेव” कहकर सराहना की। हालांकि हाल में नालसर छात्रों के विरोध से जुड़े विवाद का उन्होंने अपने भाषण में जिक्र नहीं किया। अपने भाषण के आखिर में मशहूर न्यायविद नानी पालकीवाला के कथन का हवाला देते हुए जस्टिस भुइयां ने याद दिलाया कहा कि आजादी को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाना है तो हर पीढ़ी को उसकी रक्षा के लिए, उसके लिए लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए।
भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने पहले बेरोजगार युवाओं को लेकर कॉकरोच कहा था। इस टिप्पणी को लेकरर बड़ा आंदोलन ही शुरू हो गया और अब भी जारी है। हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि उन्होंने नकली वकीलों को लेकर ऐसा कहा था। फिर भी उनके प्रति असंतोष जारी रहा। इसी क्रम में नालसर में उस बीच चीफ जस्टिस सूर्यकांत के मुख्य अतिथि के तौर पर एक कार्यक्रम होना था। लेकिन उनके हाथों से डिग्रियां लेना हमें पसंद नहीं है, ऐसा कहते हुए छात्रों ने कॉलेज मैनेजमेंट को पत्र लिखना, इस पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया का सीरियस होना और तुरंत उन लॉ स्टूडेंट्स पर कार्रवाई का आदेश देना, सीजेआई का दखल देकर बार काउंसिल के रवैये को गलत ठहराना, कुल मिलाकर वह कार्यक्रम रद्द होना चर्चा का विषय बन गया।
खास बात यह है कि तेलंगाना हाईकोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रहते हुए जस्टिस भुइयां नालसर यूनिवर्सिटी के एक्स-ऑफिशियो चांसलर के तौर पर भी काम कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद भी न्याय शिक्षा क्षेत्र से जुड़ाव बनाए रखे हुए हैं। भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के साथ जस्टिस भुइयां ने साथ काम करने का अनुभव है। 2023 में तेलंगाना हाईकोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रहे जस्टिस भुइयां को सुप्रीम कोर्ट के लिए सिफारिश करने वाले कॉलेजियम में तत्कालीन सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के साथ जस्टिस सूर्यकांत भी सदस्य थे। यानी सूर्यकांत उन्हें सुप्रीम कोर्ट जज के तौर पर नियुक्त करने से जुड़ी कॉलेजियम प्रक्रिया में हिस्सेदार रहे हैं। साथ ही भुइयां और सूर्यकांत पहले एक ही बेंच में साथ काम करने के मौके भी हैं। 2024 में केजरीवाल बेल केस की सुनवाई करने वाली बेंच में ये दोनों थे।
2 अगस्त 1964 को असम के गुवाहाटी में जन्मे जस्टिस उज्जल भुइयां सीनियर वकील व असम के पूर्व एडवोकेट जनरल सुचेंद्रनाथ भुइयां के बेटे हैं। किरोड़ीमल कॉलेज में डिग्री, गुवाहाटी सरकारी लॉ कॉलेज में एलएलबी व गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में एलएलएम पूरा किया। 1991 में वकील के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराके गुवाहाटी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की। 2011 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त हुए और 2013 में स्थायी न्यायाधीश के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट, तेलंगाना हाईकोर्ट में काम किया। जून 2022 में तेलंगाना हाईकोर्ट के प्रधान न्यायाधीश के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। 14 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नति हुई।
