‘तलब’ पुस्तक समीक्षा : कदम-कदम पर टूटने – बिखरने का सफ़र, मनोदशा को समझाने में सहायक
“मुझको खा गई साफ़-गोई मेरीमैं इतना अच्छा था कि बुरा हो गया” ये पंक्तियाँ हैं नवयुगीन प्रतिष्ठित लेखिका सुषमा गुप्ता जी द्वारा सृजित एवं हिन्द युग्म से प्रकाशित उपन्यास ‘तलब’ … Continue reading ‘तलब’ पुस्तक समीक्षा : कदम-कदम पर टूटने – बिखरने का सफ़र, मनोदशा को समझाने में सहायक
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