‘होलाष्टक’ पर विशेष लेख : प्रचलित हैं शुभ और अशुभ को लेकर ये कहानियां

होलाष्टक 7 मार्च से प्रारंभ हो रहा है और 13 मार्च तक जारी रहेगा। माना जाता है कि इन दिनों में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। होलाष्टक फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारंभ होता है और फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन के साथ खत्म होता है।

यह कहानी प्रचलित है कि राजा हिरण कश्यप ने अपने बेटे प्रहलाद को बहुत कष्ट दिए। वह बहुत अहंकारी था और वह चाहता था सब उसको भगवान माने। हालांकि खुद उसका बेटा भक्त प्रहलाद अपने बाप को भगवान नहीं मानता था। उसके नाम की माला नहीं जपता था। वह हरि हरि के नाम की माला जपता था। क्योंकि वह बचपन में नारद मुनि के साथ रहा था। उसे भगवान की पूजा करने की सीख यहीं से मिली थी।

यह देख हिरण कश्यप ने बेटे को अनेक प्रकार की यातनाएं दी। यहां तक की और होलिका दहन के दिन अपनी बहन होलिका जिसे अग्नि में न जलने का वरदान मिला हुआ था, उसको भी जलाने का प्रयास किया। हालांकि भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु की कृपा से बाल-बाल बच गए और होलिका भस्म हो गया। इस तरह प्रहलाद का बाल भी बांका नहीं हुआ। तभी से होलाष्टक मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई। होलाष्टक खत्म होने के बाद रंगो वाली होली खेली जाती है और प्रहलाद के जीवित बचने की खुशियां मनाई जाती हैं। इस तरह यह बुराई पर अच्छाई की जीत के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। यह भी मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को अन्न, धन या वस्त्र का दान करना चाहिए।

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होलाष्टक को लेकर एक और पौराणिक कथा भी प्रचलित है। होलाष्टक के दिन ही भगवान शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था। कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने की कोशिश की थी। इसके चलते महादेव क्रोधित हो गए और तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म कर दिया। हालांकि, कामदेव ने गलत इरादे से भगवान शिव की तपस्या भंग नहीं की थी। कामदेव की मृत्यु की जानकारी मिलने पर पूरा देवलोक शोक में डूब गया।

इसके बाद कामदेव की पत्नी देवी रति ने भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की कि अपने मृत पति को वापस लौटाने की मनोकामना की। इसके बाद भगवान शिव ने कामदेव को पुनर्जीवित कर दिया। इन्हीं कारणों से भी इन दिनों को अशुभ माना जाता है। कोई भी किसी प्रकार का शुभ कार्य नहीं करते है। जैसे मकान की खरीदारी, मुंडन, गृह प्रवेश, विवाह आदि कार्य से दूर रहा जाता है। इसके बाद ही सभी शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं।

के पी अग्रवाल, हैदराबाद

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