संगीत साधना म्यूजिक इंस्टीट्यूट का दीक्षांत समारोह, विद्यार्थियों ने दी शास्त्रीय रागों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ

हैदराबाद : संगीत साधना म्यूजिक इंस्टीट्यूट द्वारा एक भव्य दीक्षांत समारोह एवं संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं विद्वान डॉ. ऋषभदेव शर्मा थे, जबकि डॉ. पूर्णिमा शर्मा विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। संस्थान के प्रमुख संयोजक डॉ. गौरांग चंद्र मोहान्तो की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन संस्थान की संचालिका गुरु माँ श्रीमती शुभ्रा मोहान्तो के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा तथा युवा पीढ़ी में संगीत शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रकृति के कण-कण में संगीत व्याप्त है—वर्षा, नदी, आकाश और पेड़-पौधों की लय में भी संगीत की अनुभूति की जा सकती है। उन्होंने नाद से सृष्टि, शब्द, भाषा और संगीत के उद्भव की सांस्कृतिक व्याख्या करते हुए विद्यार्थियों को निरंतर साधना करने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. ऋषभदेव शर्मा के कर-कमलों से वर्ष 2025 के दौरान संगीत के विभिन्न पाठ्यक्रमों में उत्तीर्ण विद्यार्थियों – प्रारंभिक (प्रथम वर्ष – Vocal) में ईशानी महापात्रा, जानकी वल्लभ तथा जया श्री एस; प्रवेशिका प्रथम (द्वितीय वर्ष) में संगमित्रा बिस्वास, श्रद्धा सुमन रथ, दिशिता डे, आरुषि मंडल, शारन्या राउल, सीमा झा तथा पाहुल कौर भुल्लार; प्रवेशिका पूर्ण (तृतीय वर्ष) में अधित्री तिवारी; मध्यमा प्रथम (चतुर्थ वर्ष) में वैदेही चौधरी तथा अन्या लाल; मध्यमा पूर्ण में ई. दर्शनी बाबू, ऋचा कुमारी, सिया यादव तथा सस्मिता नायक; विशारद प्रथम में श्वेता जोशी, मानसा शशांक जोशी तथा शशांक जोशी; विशारद पूर्ण (स्नातक) में अंकिता तिवारी को प्रमाणपत्र एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।

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संगीतमय कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विभिन्न शास्त्रीय रागों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। राग खमाज की प्रस्तुति शरण्या, संगमित्रा, आरुषि, आयांश एवं इशानी ने दी, जबकि राग मल्हार की प्रस्तुति सस्मिता नायक ने दी। गुरु भजन की प्रस्तुति ऋचा चौधरी तथा भजन की प्रस्तुति श्रद्धा सुमन रथ ने दी। इसी क्रम में कल्पना डांग ने राग यमन, दर्शनी बाबू ने राग जौनपुरी तथा अंकिता तिवारी ने राग दरबारी और राग मालकौंस पर आधारित भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुगम संगीत में डॉ. काज़िम अहमद, सस्मिता और डॉ. बी. बालाजी ने हिंदी फिल्मी गीत प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर श्रीमती शुभ्रा मोहान्तो ने बताया कि संगीत साधना म्यूजिक इंस्टीट्यूट पिछले दो दशकों से अखिल भारतीय गंधर्व महाविद्यालय मंडल, मिरज (मुंबई) से संबद्ध होकर संगीत शिक्षा प्रदान कर रहा है। वर्ष 2025 से संस्थान को विशारद (डिग्री) पाठ्यक्रम की मान्यता भी प्राप्त हुई है। अब तक लगभग 2000 छात्र-छात्राएँ इस संस्थान से संगीत की परीक्षाएँ उत्तीर्ण कर चुके हैं, जिनमें से कई देश-विदेश में संगीत के क्षेत्र में कार्यरत हैं।

इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात गुरु माँ श्रीमती शुभ्रा मोहान्तो के साथ संगीत साधना के गायक कलाकारों द्वारा वंदे मातरम् तथा “ॐ जय जगदीश हरे” की सामूहिक प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का संचालन मिधानि के प्रबंधक (हिंदी अनुभाग एवं निगम संचार) डॉ. बी. बालाजी ने किया तथा अंत में श्रीमती कल्पना डांग द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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