हैदराबाद: नए वोटर रजिस्ट्रेशन को लेकर चुनाव आयोग (EC) ने बड़ा फैसला लिया है। पहली बार वोट डालने के लिए फॉर्म-6 के साथ आवेदन करने वाले लोगों को माता-पिता का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) विवरण भी देना अनिवार्य कर दिया गया है। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि यह नियम सिर्फ SIR प्रक्रिया में शामिल वोटरों पर ही नहीं, बल्कि नए सिरे से वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने वाले सभी लोगों पर लागू होगा।
पिछले साल बिहार में शुरू किए गए SIR कार्यक्रम में इस प्रक्रिया को लागू किया गया था। अब ऑनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन से पहले माता-पिता का विवरण देना जरूरी कर दिया गया है। हालांकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि प्रशासनिक आदेश के जरिए ही इस नियम को लागू किया गया है।
इस बीच चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया को लेकर हो रही आलोचनाओं को भी खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि SIR का उद्देश्य नकली वोटर, मृत लोग, दूसरे इलाकों में चले गए लोग और विदेशों में बस गए लोगों जैसे अयोग्य नामों को सूची से हटाकर केवल योग्य भारतीय नागरिकों के नाम ही वोटर लिस्ट में रखना है।
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पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक वोटरों को निशाना बनाकर नाम हटाए जाने के आरोपों को भी EC ने खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि अगर किसी को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो उसे आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया जाएगा। स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और बिना किसी पक्षपात के चल रही है।
