डॉ. भोगीरेड्डी श्राव्या मानसा को नृत्य में पीएचडी प्रदान, पढ़ें उपलब्धियां, शोध का विषय और अन्य जानकर

हैदराबाद : प्रख्यात कुचिपुड़ी नृत्यांगना, कोरियोग्राफर एवं शोधकर्ता श्रीमती भोगीरेड्डी श्राव्या मानसा को केंद्रीय हैदराबाद विश्वविद्यालय द्वारा नृत्य विषय में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएच.डी) की उपाधि प्रदान की गई है। उनका शोध प्रबंध “तेलुगु सिनेमा में नृत्य: परिवर्तन और रूपांतरण” विषय रहा है।

तेलुगु सिनेमा में नृत्य के विभिन्न ऐतिहासिक चरणों में हुए विकास का व्यापक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इस शोध में यह बताया गया है कि किस प्रकार भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराएं जैसे कुचिपुड़ी और भरतनाट्यम ने फिल्मी कोरियोग्राफी को प्रभावित किया। साथ ही आधुनिक फ्यूजन और व्यावसायिक नृत्य रूपों में हुए परिवर्तन का भी विश्लेषण किया गया है।

इस शोध प्रबंध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सिनेमा एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में नृत्य को आम जनमानस तक पहुंचाने में किस प्रकार सहायक बना है, जिससे यह केवल मंच तक सीमित कला न रहकर व्यापक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का रूप ले सका। इसमें नृत्य प्रस्तुतियों में आए सौंदर्यशास्त्रीय परिवर्तन, कथन शैली, शारीरिक अभिव्यक्ति तथा तकनीकी विकास का भी विस्तृत अध्ययन किया गया है। यह शोध कार्य सरोजिनी नायडू स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड कम्युनिकेशन में प्रोफेसर एम. एस. शिवा राजू के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ तथा सफलतापूर्वक वाइवा-वोक (Viva Voce) परीक्षा के माध्यम से पूर्ण किया गया। यह शोध परफॉर्मिंग आर्ट्स, सिनेमा अध्ययन, सांस्कृतिक अध्ययन और मीडिया संचार के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करता है।

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डॉ. श्राव्या मानसा का यह शोध पारंपरिक नृत्य शिक्षा और आधुनिक दृश्य संस्कृति के बीच की दूरी को कम करते हुए विद्वानों, कलाकारों, फिल्म निर्माताओं और छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी दृष्टिकोण प्रदान करता है। साथ ही यह शास्त्रीय नृत्य की परंपरा को संरक्षित रखते हुए उसे समकालीन परिवेश के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है। यह उपलब्धि न केवल उनके शैक्षणिक जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य को वैश्विक शैक्षणिक एवं कलात्मक मंचों पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में उनके समर्पण का प्रमाण भी है।

व्यावसायिक कॅरियर एवं योगदान

डॉ. श्राव्या मानसा एक प्रतिष्ठित कुचिपुड़ी नृत्यांगना, कोरियोग्राफर, शिक्षिका और सांस्कृतिक दूत हैं, जिन्हें परफॉर्मिंग आर्ट्स के क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अब तक 1700 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियां दी हैं, जिनके माध्यम से उन्होंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य को देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुत किया है। उनकी प्रस्तुतियां तकनीकी दक्षता, भावनात्मक अभिव्यक्ति और नवोन्मेषी कथा प्रस्तुति के लिए विशेष रूप से जानी जाती हैं।

श्राव्या मानसा डांस एन्सेम्बल (SMDE) की संस्थापक हैं, जो भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्य समूहों में से एक है और एक साथ 50–150 नर्तकों के साथ भव्य प्रस्तुतियां देने में सक्षम है। इस समूह के माध्यम से उन्होंने अनेक बड़े पैमाने पर नृत्य प्रस्तुतियों का निर्देशन किया है, जिनमें नृत्य को कथानक, डिजिटल विजुअल्स और विषयगत प्रस्तुति के साथ जोड़ा गया है। इसके अतिरिक्त, वह सुमधुर आर्ट्स अकादमी का संचालन करती हैं, जिसकी स्थापना वर्ष 2005 में हुई। इस संस्था की अनेक शाखाएं हैदराबाद में हैं तथा भारत, यूएई और अमेरिका में ऑनलाइन माध्यम से भी प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने सैकड़ों विद्यार्थियों को प्रशिक्षित कर नृत्य शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

शैक्षणिक सफर:

बीटेक (सिविल इंजीनियरिंग) – 2009 से 2013
एमटेक (ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग) – 2013 से 2015
मास्टर्स इन परफॉर्मिंग आर्ट्स (नृत्य), हैदराबाद विश्वविद्यालय – 2016 से 2018
पीएचडी (नृत्य), हैदराबाद विश्वविद्यालय – 2026
उन्होंने 2013 से 2015 के दौरान हैदराबाद मेट्रो रेल में भी कार्य किया, जिसके बाद उन्होंने पूर्ण रूप से कला क्षेत्र को समर्पित कर दिया। डॉ. श्राव्या मनसा ने तेलुगु फिल्म उद्योग में डबिंग आर्टिस्ट और कोरियोग्राफर के रूप में भी योगदान दिया है। विशेषकर शास्त्रीय नृत्य अनुक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह एक TEDx वक्ता एवं प्रस्तुतकर्ता भी हैं, जो अपने अनुभवों के माध्यम से दर्शकों को प्रेरित करती हैं।

प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त:

तेलंगाना टैलेंट ऑफ द ईयर
प्राइड ऑफ तेलंगाना
नाट्य विद्याधारी पुरस्कार
कोणार्क नृत्य विभूषण
अन्य राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के सम्मान

मानसा ने दुबई, अबू धाबी सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शन कर भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व किया है। उनका कार्य नृत्य के माध्यम से कथा प्रस्तुति, महिला सशक्तिकरण, सांस्कृतिक शिक्षा और नवाचारपूर्ण कोरियोग्राफी पर केंद्रित है। डॉ. श्राव्या एक अद्वितीय व्यक्तित्व हैं, जो शैक्षणिक विद्वता और कलात्मक उत्कृष्टता का संगम प्रस्तुत करती हैं। उनकी यह यात्रा समर्पण, नवाचार और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उनकी पीएचडी उपलब्धि भारतीय शास्त्रीय नृत्य एवं शोध के क्षेत्र में उनकी प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करती है तथा नई पीढ़ी के नर्तकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

आपको बता दें कि डॉ. भोगीरेड्डी श्राव्या मानसा भोगीरेड्डी श्रीनिवास की बेटी हैं। श्रीनिवास ने डॉ. बी. आर. अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी में कार्य किया है। श्रीनिवास ने अब तक सौ से अधिक फिल्मों में भी अनेक भूमिका निभाई हैं।

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