पुस्तक समीक्षा : ‘तेरहवां महीना’ अनूठी कहानियों की दास्तान

2025 के विश्व पुस्तक मेले में भावना प्रकाशन के स्टाल पर दिखी यह कहानी संग्रह ‘तेरहवां महीना’। कुछ तो अपने शीर्षक के कारण अनूठी जान पड़ी और जब इसे पढ़ना शुरू किया तो जैसे एक साँस में पढ़ती चली गई। बीस कहानियों का यह संग्रह कब ख़त्म हुआ पता ही नहीं लगा। इससे इसकी रोचकता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। किताब को पलट कर देखने पर लेखक सुधांशु गुप्त के फ़ोन नंबर पर नज़र पड़ी तो पहले व्हाट्सएप किया फिर फ़ोन मिलाया। यह भी मेरे साथ पहली ही बार हुआ किताब ख़त्म होते ही सृजनकर्ता से बातचीत की इच्छा जागृत हो आई।

बात करते हैं किताब की, तो सबसे पहले वह कहानी जिस पर किताब का शीर्षक है, ’तेरहवां महीना’ का जिक्र करूं तो एक महिला मित्र के पूछने पर लेखक बारह महिने से इतर प्रेम का महीना ढूँढने की कोशिश करते हैं तो एक बारिश वाली शाम याद आती है जब उन्हें किसी के साथ पैदल चलना सुखद लगा था वही था उनके लिए प्रेम का तेरहवां महीना।

इसी तरह सभी कहानियाँ बेहद दिलचस्प हैं। कुछ वर्चुअल दुनिया के रिश्तों की बनने और बिखरने की हैं तो कुछ कोरोना का समय याद दिलाती हैं । 2020-2021 का कालखंड कोरोना की विभीषिका के चपेट में रहा है और इस संग्रह का प्रकाशन उसी दौरान हुआ है तो तत्कालीन समाज की छवि का पुस्तक में नज़र आना स्वाभाविक ही है। छींक और मुखौटा पढ़ते ही सब आँखों में घूम जाता है। बिना चेहरे वाला आदमी एकदम अनोखा प्रयोग लगता है। कहानी गाँठ ,मशीन, चीख, स्पेस आदि अनेक ऐसी कहानियाँ हैं जो मानव मन की अनसुने जज़्बात को दर्शाती हैं जिन्हें आज के दौर में समझने की बड़ी आवश्यकता है ।

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कहानी ‘तीसरा शहर और एक आवाज़’ बहुत ही खूबसूरत है साथ ही ‘खो रही है माँ’ में माँ जिससे कभी घर गुलज़ार हुआ करता था उसका सिमटना दिखता है तो मन को छू जाता है आख़िर में ख़ाली दीवारें बहुत कुछ कहना चाहतीं हैं और कहने में पूरी तरह से सक्षम भी है। आप एक सिद्धहस्त लेखक हैं जो मानक पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं आपकी लेखनी के लिए मैं क्या ही कहूं मगर जो सहज भाव मन में आए जिस वजह से आपसे तुरंत ही बात करने की इच्छा जागृत हुई वह आपकी कहन शैली है जो कहानीपन इन कहानियों में है वह कम ही देखने के लिए मिलती है।

और अंत में यह भी कहना चाहूँगी कि यह एक बेहतरीन कहानी संग्रह है जो न केवल पठनीय है बल्कि संग्रहणीय भी है। यह ज़मीनी हकीकत के साथ फ़लक को छूने की ताक़त रखती है और पाठकों को कई अनछुए पहलुओं से अवगत कराने में समर्थ है। लेखक सुधांशु गुप्त इसके लिए बहुत-बहुत बधाई के पात्र हैं। आपको हार्दिक बधाई एवं साधुवाद!!

पुस्तक : तेरहवां महीना (कहानी संग्रह)
लेखक : सुधांशु गुप्त
प्रकाशन : भावना प्रकाशन
मूलय : 225 रुपये

समीक्षक : आर्या झा (93988 36296)

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