हैदराबाद : आचार्या सूर्य धनंजय ने कहा कि समीक्षा हो या आलोचना, उसमें पारदर्शिता होनी चाहिए। समकालीन कवियों की कविताओं का विश्लेषण करते हुए उनके साहित्यिक सफर से परिचित कराने के उद्देश्य से लेखिका शैलजामित्र द्वारा लिखित आलोचनात्मक निबंध ‘आम्लान’ का वीरनारी चाकली आइलम्मा महिला विश्वविद्यालय की कुलपति एवं प्रख्यात लेखिका आचार्या सूर्य धनंजय ने लोकार्पण किया।
इस अवसर पर डॉ. सूर्या धनंजय ने कहा कि इतने सारे समकालीन कवियों की कविताओं का अध्ययन करके उन पर विश्लेषणात्मक निबंध लिखना रुचिकर होने के साथ-साथ आनंददायक भी है। उन्होंने इस दिशा में शैलजामित्र द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि 1990 से साहित्य सृजन कर रहे कवियों, लेखकों और लेखिकाओं को पाठकों से परिचित कराना आवश्यक है।

इस अवसर पर उन्होंने प्रख्यात कवि सी. नारायण रेड्डी (सिनारे) के कथन को याद किया, ‘बुक कल्चर’ यानी पुस्तक संस्कृति के स्थान पर आज ‘लुक कल्चर’ यानी केवल देखने की संस्कृति आ गई है। ऐसे समय में इस तरह के ग्रंथों की बहुत आवश्यकता है। इस पुस्तक में कुल 33 तेलुगु कवियों की कविताओं पर शैलजामित्र द्वारा लिखे गए आलोचनात्मक निबंध शामिल हैं।
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उन्होंने कहा कि इस संग्रह की विशेषता यह भी है कि इसमें प्रवासी आंध्रवासी कवियों के साथ-साथ इस पीढ़ी के कवियों को भी स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कविता का विश्लेषण पढ़ने पर यह स्पष्ट होता है कि लेखिका ने संबंधित कवियों की रचनाओं को कितनी गहराई और विस्तार से पढ़ा है। उन्होंने बताया कि वह लगभग 35 वर्षों से शैलजामित्र की साहित्यिक रचनाओं को देखती और समझती आ रही हैं। उन्होंने इतने वर्षों से किए जा रहे उनके साहित्यिक प्रयासों की प्रशंसा की।
इस अवसर पर शैलजामित्र ने आचार्या सूर्या धनंजय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में एक लेखिका के रूप में उन्हें इतना सम्मानजनक स्थान प्रदान करना और इस ग्रंथ का लोकार्पण विश्वविद्यालय परिसर में होना उनके तथा संबंधित कवियों के लिए अत्यंत गर्व की बात है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार गड्डम मल्लेशम, ओएसडी डॉ. जी. विजयलक्ष्मी, सूर्या धनंजय की निजी सचिव स्वाति आकांक्षा रेड्डी, लेखिका के पति सत्यामित्र सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। सभी ने शैलजामित्र को शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय की कुलपति आचार्य सूर्या धनंजय ने शैलजामित्र और सत्यामित्र दंपति को भव्य रूप से सम्मानित किया।
