पुस्क समीक्षा : जीवंत किरदार को बखूबी बयां करती है “सम्पा- विश्वास, धैर्य और संकल्प की अनूठी दास्तान”

लेखक द्वय मीनाक्षी चौधरी एवं संजीव पालीवाल द्वारा लिखित

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पुस्तक समीक्षा : कश्मीर जैसा मैंने देखा (यात्रा वृतांत)

'देखा जाय तो देश के सारे राज्यों को कश्मीर सा बनना चाहिए थ

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पुस्तक समीक्षा : साथी सरहद पार के…. ‘कुछ राब्ता है तुमसे’

कहते हैं खुदा ने इस जहाँ में सभी के लिएकिसी न किसी को है बन

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पुस्तक समीक्षा : एक प्रामाणिक कृति है डॉ सुरभि दत्त की ‘रामायण में जनप्रिय शासन’

जिस राज्य का शासन 'जनप्रिय' हो, उस राज्य के पनपने एवं उन्नत

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पुस्तक चर्चा: प्रोफेसर ऋषभदेव शर्मा की रचनाधर्मिता को प्रमाणित करती हैं, ‘इक्यावन कविताएँ’

प्रोफेसर ऋषभदेव शर्मा (1957) के प्रतिनिधि कविता संग्रह 'इक्

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पुस्तक समीक्षा : संवेदनाओं की गहराई से आप्लावित आत्मीय संस्मरण है “… और एस पी साहब ने फीता काट दिया”

मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन, ग्वालियर इकाई के अध्

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पुस्तक समीक्षा : लेखक माता प्रसाद शुक्ल के जीवंत संस्मरण है ‘जौरा के मंगोड़े’

माता प्रसाद शुक्ल के द्वारा लिखित ‘जौरा के मंगोड़े’ नामक

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पुस्तक समीक्षा : सामाजिक सत्यों को रूप देता है डॉ रमा द्विवेदी की कहानी संग्रह ‘खंडित यक्षिणी’

डॉ रमा द्विवेदी जी से अब तक मेरी मुलाकात नहीं हुई है। हाल

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लंबी पुस्तक समीक्षा: सामाजिक द्वंद्वों में व्याप्त खंडित मूल्यों की संवेदनात्मक व्याख्या है- ‘खंडित यक्षिणी’

मूल्यों के टूटन और विघटन से उत्पन्न सामाजिक द्वंद्व की स

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पुस्तक समीक्षा : ‘कौन-सी कविता होती है पूरी’… में वर्णित विभिन्न विमर्श

शोध सार- कविता साहित्य की वह विधा है जिसके द्वारा मन की भा

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