[नोट-सोशल मीडिया ने विश्व को एक छोटा-सा गांव बना दिया। समाचार के आदान-प्रदान करने का यह एक उत्तम साधन है। सरकार को हिलाने की इसमें ताकत है। सोशल मीडिया से अनेक लोगों का भला हुआ है। साथ ही झूठी अफवाह, द्वेष और कांड से अनेक लोग बर्बाद भी हुए है। इसीलिए इसका सही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।]
आज (30 जून) विश्व सोशल मीडिया दिवस है। सोशल मीडिया आज की बुनियादी जरूरत बन गया है। यह दुनिया भर में अरबों लोगों को जोड़कर उन्हें जानकारी दे रहा है। इसने दुनिया को एक छोटा-सा गांव (ग्लोबल विलेज) बना दिया है। अभी-अभी पैदा हुए अल्फा जेनरेशन के बच्चों से लेकर वयोवृद्ध साइलेंट जेनरेशन, बुजुर्ग बेबी बूमर्स तक सभी सोशल मीडिया की फोटो, वीडियो का आनंद ले रहे हैं। सम उम्र वाले, पुराने साथी, दोस्त, रिश्तेदार, भौतिक रूप से अनजान ऑनलाइन दोस्त, दूसरों से जुड़ना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का एक अहम हिस्सा बन रहा है। दुनिया भर में फैले सदस्य अपने विचार, खबरें साझा करने के लिए सोशल मीडिया एक मिलन स्थल बन गया है।
नागरिक समाज पर सोशल मीडिया के सकारात्मक, नकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 30 जून को विश्व सोशल मीडिया दिवस मनाते हैं। लोग एक-दूसरे से कैसे संवाद करते हैं, दोस्तों, परिवार के सदस्यों, पूरी दुनिया की आबादी के साथ क्या साझा करते हैं, इसे सोशल मीडिया ने फिर से परिभाषित किया है। साला 2010 में ‘मैशेबल’ द्वारा शुरू किया गया यह वार्षिक आयोजन, वैश्विक संचार, कम्युनिटी निर्माण, सांस्कृतिक बदलावों पर डिजिटल प्लेटफॉर्म के असर का जश्न मनाता है। दुनियाभर में करीब 5.79 अरब लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सक्रिय रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं। इन नेटवर्क पर हर रोज हर व्यक्ति औसतन 2 घंटे 27 मिनट बिताता है। Gen Z युवा औसत यूजर की तुलना में रोजाना 54 फीसदी ज्यादा समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर, यूजर-जेनरेटेड कंटेंट देखने में बिताते हैं। 8 अरब से ज्यादा की दुनिया की आबादी में, 5.79 अरब नेटिज़न्स ऑनलाइन कनेक्ट हो रहे हैं और सोशल मीडिया यूजर अब सुपर मेजॉरिटी बन चुके हैं।
पहली सोशल मीडिया साइट ‘सिक्स डिग्रीज’ सोशल मीडिया पार्टनर, ब्रांड के तौर पर मेटा, हूटसूट, स्प्राउट सोशल, टिकटॉक, लिंक्डइन, एक्स/ट्विटर, मैडहेबल आदि काफी लोकप्रिय हुए हैं। साल 1997 में शुरू हुई पहली सोशल मीडिया साइट के रूप में ‘सिक्स डिग्रीज’ को माना जाता है। साल 2004 में फेसबुक की सह-स्थापना करने वाले मार्क जुकरबर्ग को सोशल मीडिया दिवस का हीरो माना जाता है। पहला आधुनिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 2002 में फ्रेंडस्टर था। लिंक्डइन 2003 में, फेसबुक के शुरू होने वाले साल 2004 में ही माइस्पेस लॉन्च हुआ था। यूट्यूब ने 2005 में वीडियो के लिए अपनी वेबसाइट शुरू की, जबकि ट्विटर ने 2006 में इसे फॉलो किया। इंस्टाग्राम 2010 में शुरू हुआ।
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सोशल मीडिया खबरों, शॉपिंग, कारोबार के लिए इन्फ्लुएंसर्स को खोजने, आम मनोरंजन के लिए एक बड़ा जरिया बन गया है। मासिक फेसबुक यूजर्स 3 अरब, इंस्टाग्राम यूजर्स 2 अरब से ज्यादा, व्हाट्सएप यूजर्स 2 अरब, टिकटॉक यूजर्स 1.5 अरब, वीचैट यूजर्स 1.3 अरब हैं। चीन में ही एक अरब से ज्यादा सोशल मीडिया यूजर्स हैं, जबकि भारत में 870 मिलियन, अमेरिका में 313 मिलियन, यूरोप में 731 मिलियन यूजर्स हैं। ऑनलाइन कंटेंट शेयर करते समय असली स्रोत को पर्याप्त श्रेय देना चाहिए। सोशल मीडिया को एक सकारात्मक साधन के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। सोशल मीडिया को कनेक्शन, शिक्षा, कारोबारी मकसद के लिए इस्तेमाल करें तो यह एक वरदान है। साइबर बुलिंग, आपत्तिजनक कंटेंट देखना या गलत जानकारी फैलाने की ओर ले जाए तो यह एक अभिशाप बन जाता है।
सोशल मीडिया का असर पूरी तरह एक व्यक्ति के इस्तेमाल, खुद के अनुशासन और डिजिटल साक्षरता पर निर्भर करता है। दुनिया भर के ज्ञान, जानकारी को साझा करने, आर्थिक अवसर देने, अभिव्यक्ति की आजादी देकर यह एक वरदान बना है। नकारात्मक तरीकों से इस्तेमाल करें तो यह एक खतरा बन रहा है। फर्जी खबरें तेजी से फैलकर जनमत को गुमराह करती हैं और विभाजन पैदा करने वाले ‘एको चैंबर’ बनाती हैं। ‘लाइक्स’, एल्गोरिदमिक स्क्रॉलिंग का डोपामाइन लूप बेहद नशे की लत वाला है, यह न सिर्फ उत्पादकता बल्कि एकाग्रता भी घटाता है। पिछली सदी में जारी किसी भी अन्य तकनीक की तुलना में समाज पर सबसे बड़ा असर डालने वाली सोशल मीडिया है, यह हकीकत है।
विश्व सोशल मीडिया दिवस-2026 का थीम ‘डिजिटल दुनिया को एक करना’ विषय के साथ दुनिया भर में डिजिटल प्लेटफॉर्म लोगों, संस्कृतियों, वर्गों को कैसे जोड़ते हैं, यह बताने पर ध्यान देता है। यह दिन सोशल मीडिया विशेषज्ञों, क्रिएटर्स, आम यूजर्स को सोशल मीडिया का जश्न मनाने का मौका देता है, साथ ही प्लेटफॉर्म को और बेहतर, स्वस्थ, ईमानदारी से इस्तेमाल करने को बढ़ावा देता है। नया प्लेटफॉर्म आजमाना, ऑनलाइन चर्चाओं में हिस्सा लेना, छोटे कारोबार या स्वयंसेवी संस्था को बढ़ावा देना, अपने फीडबैक का ऑडिट करना जैसे कई तरीकों से सोशल मीडिया दिवस मनाया जाता है।

प्रोफेसर मधुसूदन रेड्डी बुर्रा (30 जून 2026 तेलुगु दैनिक वेलुगु से साभार)
