तमिलनाडु की राजनीति पर एक विश्लेषण, ऐसा भी हो सकता है…

तमिलनाडु की राजनीति में सस्पेंस जारी है। यह सस्पेंस एक फिल्म की कहानी तरह आगे बढ़ रही है। इसके चलते पूरे देश-दुनिया की नजरें तमिलनाडु की राजनीति पर टिकी है।

गौरतलब है कि चुनाव के नतीजे आने के बाद टीवीके अध्यक्ष विजय राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से तीन बार मिल चुके हैं। हालांकि, राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए विजय को आमंत्रित नहीं किया। संविधान के मुताबिक चुनाव के नतीजे आने के बाद सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए राज्यपाल को आमंत्रित करना चाहिए। अब तक ऐसा ही होता आया है। किंतु तमिलनाडु में ऐसा नहीं हुआ।

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यहां पर टीवीके अध्यक्ष विजय के हाथ से एक छोटी सी गलती हुई है। विजय ने पत्र के साथ उम्मीदवारों की सूची भी राज्यपाल को दी। इस सूची में टीवीके के 107 और कांग्रेस के 5 उम्मीदवारों के नाम है। वैसे तो विजय को सरकार बनाने के लिए दावा करने का पत्र मात्र राज्यपाल को देना चाहिए था।

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तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 संख्या बल चाहिए। उन्होंने 112 संख्या बल की सूची राज्यपाल को सौंपी। यह सूची बीजेपी सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपाल के लिए हथियार बन गया। वैसे तो राज्यपाल को संख्या बल से कोई लेना-देना नहीं है। संख्या बल का खुलासा विधानसभा के विशेष सत्र में होता है।

राज्यपाल को विधानसभा सत्र के संख्या बल की सूची मिलने के बाद भविष्य का फैसला लेना होता है। विजय की एक छोटी सी गलती और बीजेपी की ओर से नियुक्त राज्यपाल होने के कारण तमिलनाडु की राजनीति में यह ड्रामा चल रहा है।

इसी बीच तमिनाडु की राजनीति में तेजी से समीकरण की प्रक्रिया जारी है। बीजेपी से चुना गया एक मात्र विधायक मुख्यमंत्री बनने का दावा संख्या बल के साथ पेश करने के संकेत मिल रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो किसी को आश्चर्य चकित होने की आवश्यकता नहीं है।

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