हैदराबाद : केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र द्वारा महाराष्ट्र राज्य के नांदेड़ जिले के हिंदी अध्यापकों के प्रशिक्षण के हेतु 502वें नवीकरण पाठ्यक्रम’ का आयोजन 28 सितंबर से 10 अक्टूबर तक किया गया। इसका समापन समारोह शनिवार को संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हिंदी डेली न्यूज के संपादक संदेश भारद्वाज एवं मिलिंद प्रकाशन प्रमुख श्रुतिकांत भारती उपस्थित रहे। इस अवसर पर पाठ्यक्रम संयोजक केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भास्कर कृष्णाजी ठुबे और डॉ. दीपेश व्यास उपस्थित थे। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रतिभागियों द्वारा संस्थान गीत एवं स्वागत गीत प्रस्तुत करके कार्यक्रम की शुरूआत की गई। इस कार्यक्रम में कुल 29 (13 महिलाएँ एवं 16 पुरुष) प्रतिभागियों ने कक्षा में उपस्थित होकर प्रशिक्षण प्राप्त कर परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 29 प्रतिभागी अध्यापकों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा मनोविज्ञान, हिंदी पाठनियोजन, हिंदी भाषा शिक्षण पाठयोजना (गद्य, पद्य, रचनात्मक उपागम आधारित शिक्षण), हिंदी में रोजगार की संभावनाएँ, सृजनात्मक लेखन, हिंदी साहित्य का इतिहास, हिंदी भाषा का उद्भव एवं विकास, भारतीय बहुधार्मिकता और समन्वय, व्यक्ति समाज एंव राष्ट्र निर्माण में साहित्य की भूमिका, भारतीय जीवन पद्धति, भारतीय संस्कृति और दर्शन, हिंदी व्याकरण- रस, भाषाविज्ञान तथा उसके विविध पक्ष, ध्वनि, उच्चारण, भाषा परिमार्जन, भाषा कौशल, हिंदी व्याकरण तथा उसके विविध पक्ष, छंद एवं अलंकार, शब्द, शक्तियाँ, संधि, समास एवं हिंदी शिक्षण में प्रौद्योगिकी का प्रयोग (विशेषकर एआई) आदि विषयों पर जानकारियाँ, आंतरिक एवं आमंत्रित बाह्य अतिथि अध्यापकों द्वारा दी गई। तथा अतिथि व्याख्याताओं द्वारा एनसीएफ-2023 के अनुसार बदलती कक्षा का वातावरण एवं गतिविधि आधारित शिक्षण एवं हिंदी भाषा कौशल विषयों पर विशेष व्याख्यान दिया गया।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि ने प्रतिभागियों को संबंधित करते हुए कहा कि आपने इस प्रशिक्षण से बहुत कुछ सीखा होगा जिसे आप अपने विद्यालय जाकर विद्यार्थियों को ज्ञान देंगे। हिंदी के प्रचार-प्रसार में आपकी भूमिका महत्वपूर्ण है। हिंदी हमारी राज भाषा है जिसके उत्थान के लिए हमें सतत प्रयास करते रहना चाहिए। हम हिंदी अध्यापक हैं तो हमारा यह कर्तव्य है कि नैतिकता एवं समाज सेवा के गुण भी हम विद्यार्थियों के अंदर पैदा करे जिससे वह समाज और देश की सेवा कर सके।

पाठ्यक्रम संयोजक एवं क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भास्कर कृष्णाजी ठुबे ने कहा कि एक अच्छा शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा नहीं करता, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान, जिज्ञासा, रचनात्मकता, संवेदनशीलता और जीवन-मूल्यों का विकास करता है। विशेष रूप से हिंदी अध्यापक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण है। हिंदी केवल एक विषय नहीं, बल्कि भारत की विविध भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। इसलिए शिक्षक को भी समय के साथ अपने ज्ञान और शिक्षण-कौशल का निरंतर नवीकरण करते रहना होगा। महाराष्ट्र राज्य में हिंदी के प्रचार-प्रसार में हिंदी अध्यापकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपके माध्यम से विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति रुचि विकसित होती है और वे हिंदी को एक जीवंत एवं उपयोगी भाषा के रूप में देखते हैं। इसलिए मैं आपसे अपेक्षा करता हूँ कि आप इस प्रशिक्षण के अनुभवों को अपने विद्यालय तक सीमित न रखें, बल्कि अपने सहकर्मियों के साथ भी साझा करें।
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इस अवसर अतिथि प्रवक्ता डॉ. दीपेश व्यास ने कहा कि एक शिक्षक आजीवन सीखता एवं सिखाता रहता है। आप सभी हिंदी अध्यापक जो कुछ इस प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षको द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त की है उसे अपने विद्यार्थियों को अवश्य सिखाने का प्रयास करें और सिखाएँ।
इस कार्यक्रम का संचालन माधुरी तामसेतवार एवं धन्यवाद ज्ञापन पुरुषोत्तम गणपतराव भोसले द्वारा किया गया। इस पाठ्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने हस्तलिखित पत्रिका ‘नांदेड की वैभव गाथा’ की रचना की। समापन समारोह के दौरान अतिथियों द्वारा हस्तलिखित पत्रिका का लोकार्पण किया गया। प्रतिभागियों को अतिथियों के द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए। पर-परीक्षण के आधार पर उत्कृष्ट अंक प्राप्त छात्रों को विशेष पुरस्कार दिए गए। शिवाजी कोंडीराम मेंडके को प्रथम पुरस्कार, दिपाली हरीदास जाधव को द्वितीय पुरस्कार, वर्षा बाबुराव येनगे को तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। पुरुषोत्तम गणपतराव भासेले को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया।
इस पाठ्यक्रम के समापन समारोह में प्रतिभागियों द्वारा अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। पाठ्यक्रम से संबंधित प्रतिक्रिया एवं प्रतिवेदन प्रतिभागी बालाीजी लिंगालोड, सौ. राजनंदा, वर्षा सेनगे, दिपाली जाधव एवं सुरेखा स्वर्णकार द्वारा प्रस्तुत की गई। गणेश स्तुति, संस्थान गीत एवं स्वागत गीत दिपाली जाधव एवं समूह द्वारा तथा सरस्वती वंदना संस्थान द्वारा प्रस्तुत किया गया। अतिथियों का स्वागत एवं परिचय माधुरी तामसेतवार द्वारा तथा देश भक्ति गीत जाधव आर. (एव.) दिपा गिरी, स्वरचित कविता शिंपाळे, व्ही वाय, तथा समूह अभिनय महिला समूह द्वारा ‘वृक्ष संवर्धन’ पर प्रस्तुत किया गया केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र शैक्षिक एवं प्रशासनिक सदस्यों एवं विषय-विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर सजग तिवारी एवं के. इंद्रा उपस्थित रहे। प्रशासनिक कार्य डॉ. संदीप कुमार द्वारा संपन्न किया गया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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