अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर में 3.7 डिग्री तक बढ़ने की संभावना
अगले साल फरवरी तक जारी रहने की आशंका
भारत में दिसंबर तक कम बारिश ही
दुनियाभर में सूखा और गर्मी का गंभीर खतरा
1950 के बाद यह सबसे तीव्र एल नीनो
वॉशिंगटन : संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) ने चेतावनी दी है कि दुनिया को ‘सुपर डूपर एल नीनो’ डरा रहा है। इसके असर से गर्मी धीरे-धीरे बढ़ते हुए धरती लाल हो रही है। 1950 के बाद दर्ज सबसे तीव्र एल नीनो में से यह एक है। पहले से ही धरती रिकॉर्ड स्तर पर गर्म हो रही है, उसमें एल नीनो इफेक्ट जुड़ रहा है।
समंदर की गहराई में छिपी गर्मी भी ऊपर
WMO का अनुमान है कि अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर महीनों में एल नीनो सेंटर (केंद्र) यानी सेंट्रल, ईस्ट ट्रॉपिकल पैसिफिक में महासागर की सतह के तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री बढ़ेंगे। साथ ही समंदर की गहराई में छिपी गर्मी भी ऊपर आ रही है और सतह पर मौजूद गर्मी भी वातावरण में रिलीज हो रही है। इससे सर्दियों में भी गर्मी का असर जारी रहेगा।
तापमान पहले से ही ज्यादा
प्रमुख मौसम वैज्ञानिक जीक हॉसफादर ने बताया कि मध्य, पूर्वी पैसिफिक के नीनो 3.4 इलाके में तापमान पहले से ही सामान्य से 3.4 डिग्री ज्यादा दर्ज हो रहा है। ऐसा ही रहा तो नवंबर 2015-जनवरी 2016 के बीच दर्ज 2.6 डिग्री का रिकॉर्ड टूट जाएगा। यानी पिछले रिकॉर्ड तापमान से यह 1.1 डिग्री ज्यादा। यह एल नीनो दिसंबर में पीक पर पहुंच सकता है। WMO का अनुमान है कि फरवरी 2027 तक जारी रह सकता है। ऐसा हुआ तो पहले से गर्म धरती पर इसका असर और बढ़ने की आशंका है।

4.51 लाख मौतों का खतरा?
यह नैचुरली बनने वाले एल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन (ENSO) साइकिल का गर्म चरण है। आम तौर पर दो से सात साल में एक बार आने वाला यह घटनाक्रम दुनियाभर में तापमान और वर्षा को प्रभावित करता है। WMO ने कहा कि मानवीय गतिविधियों और प्रदूषण से हुए क्लाइमेट चेंज के असर को एल नीनो और बढ़ा रहा है। शिकागो यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के अनुमान के मुताबिक इस सुपर एल नीनो से जून 2026 से फरवरी 2027 तक दुनियाभर में 4.51 लाख तक अतिरिक्त मौतें होने का खतरा है। हालांकि यह एल नीनो के प्रभाव की स्थितियों पर रिसर्च के आधार पर लगाया गया अनुमान ही है।
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समंदर में छिपी गर्मी बाहर
इस बार गर्मी का खतरा सिर्फ समंदर की सतह तक सीमित नहीं है। पैसिफिक समंदर की गहराइयों में सामान्य से 10 डिग्री से ज्यादा अतिरिक्त गर्मी जमा होने का मेट्रोलॉजिकल मॉनिटरिंग बता रही है। समंदर की गहराई की यह गर्मी ऊपर आ रही है। सतह पर पहले से मौजूद गर्मी भी वातावरण में रिलीज हो रही है। ये दोनों असर मिलकर दुनिया के तापमान को और बढ़ा सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में प्रमुख मेट्रोलॉजिकल एक्सपर्ट लियोन सिमन्स ने इसे ‘सुपर डूपर एल नीनो’ बताया। मौसम वैज्ञानिक रयान माव ने भी वर्ल्ड टेम्परेचर मैप को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए बताया कि अमेरिका को छोड़कर धरती के ज्यादातर इलाके लाल रंग में दिख रहे हैं।
सर्दियों में भी गर्मी का असर
उत्तरी गोलार्ध में सर्दियां शुरू होने के बावजूद इस एल नीनो इफेक्ट के कम होने की संभावना नहीं दिख रही। WMO ने बताया कि दुनिया के कई इलाकों में सामान्य से ज्यादा तापमान दर्ज होने की संभावना है। पहले से ही अगस्त 2026 में दुनिया का औसत तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है। इस पृष्ठभूमि में एल नीनो का और मजबूत होना चिंता बढ़ा रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इसके असर से दुनिया के कुछ इलाकों में गंभीर सूखा, कहीं भारी बारिश और बाढ़ आ सकती है। ऐसा अनुमान है कि भारतीय उपमहाद्वीप में अक्टूबर-दिसंबर के बीच सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है।
