हैदराबाद : केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र द्वारा आंध्र प्रदेश राज्य के महात्मा ज्योतिबा फुले आंध्र प्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण अवासीय शैक्षणिक संस्थान समिति (गुरुकुल विद्यालय) हिंदी अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए 499वें नवीकरण पाठ्यक्रम’ का आयोजन 27 जुलाई से 8 अगस्त तक किया गया। जिसका उद्घाटन समारोह 27 जुलाई को किया गया। इसका समापन समारोह 8 अगस्त को संपन्न हुआ।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सेंट एंस डिग्री कॉलेज फॉर वीमेन, मल्लापुर, हैदराबाद की हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर श्रीमती संतोष एवं बाह्य अतिथि के रूप दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, खैरताबाद के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. संतोष कांबले उपस्थित रहे। इस अवसर पर पाठ्यक्रम संयोजक केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भास्कर कृष्णाजी ठुबे, डॉ. दीपेश व्यास उपस्थित थे। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रतिभागियों द्वारा संस्थान गीत एवं स्वागत गीत प्रस्तुत करके कार्यक्रम की शुरूआत की गई। इस कार्यक्रम में कुल 27 (23 महिलाएँ, 04 पुरुष) प्रतिभागियों ने कक्षा में उपस्थित होकर प्रशिक्षण प्राप्त कर परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 27 प्रतिभागी अध्यापकों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा मनोविज्ञान, हिंदी पाठ नियोजन, हिंदी भाषा शिक्षण पाठयोजना (गतिविधि आधारित शिक्षण एवं रचनात्मक उपागम आधारित शिक्षण), हिंदी में रोजगार की संभावनाएँ, सृजनात्मक लेखन, हिंदी साहित्य का इतिहास, हिंदी भाषा का उद्भव एवं विकास, भारतीय बहुधार्मिकता और समन्वय, व्यक्ति समाज एंव राष्ट्र निर्माण में साहित्य की भूमिका, भारतीय जीवन पद्धति,भारतीय संस्कृति और दर्शन, हिंदी व्याकरण- रस, भाषाविज्ञान तथा उसके विविध पक्ष, ध्वनि, उच्चारण, भाषा परिमार्जन, भाषा कौशल, हिंदी व्याकरण तथा उसके विविध पक्ष, छंद एवं अलंकार, शब्द, शक्तियाँ, संधि, समास एवं हिंदी शिक्षण में प्रौद्योगिकी का प्रयोग (विशेषकर एआई) आदि विषयों पर जानकारियाँ आंतरिक एवं आमंत्रित बाह्य अतिथि अध्यापकों द्वारा दी गई। तथा अतिथि व्याख्याताओं द्वारा NCF-2023 के अनुसार बदलती कक्षा का वातावरण एवं हिंदी तेलुगु ध्वनि विषयों पर विशेष व्याख्यान दिया गया।
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समापन समारोह की मुख्य अतिथि श्रीमती संतोष ने कहा कि आज का यह अवसर केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन का समारोह नहीं है, बल्कि ज्ञान, साधना, समर्पण, संस्कार और शिक्षक-धर्म के उत्सव का पावन क्षण है। आज हम उन शिक्षकों का अभिनंदन करने के लिए एकत्रित हुए हैं, जिन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार का माध्यम नहीं माना, बल्कि उसे समाज परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का सबसे सशक्त साधन बनाया है। उन्होंने आगे कहा कि आप केवल हिंदी भाषा नहीं पढ़ा रहें है बल्कि हिंदी भाषा के माध्यम से संस्कारों का निर्माण और मानवता की संवेदनाओं को हृदयों से जोड़ने का सफल प्रयास कर रहे हैं। आप उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक संवाद की सशक्त कड़ी बन रहे हैं। आप विद्यार्थियों के मन में भारतीयता, राष्ट्रीय, एकता और भाषाई सद्भाव का संस्कार विकसित कर रहे हैं। वास्तव में आप केवल शिक्षक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के संवाहक और राष्ट्रीय, एकात्मता के दूत हैं।

आज का विद्यार्थी केवल पाठ्यपुस्तकों से नहीं सीखता। वह इंटरनेट से सीखता है, डिजिटल मंचों से सीखता है, वीडियो देखकर सीखता है, अनुभवों से सीखता है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे आधुनिक साधनों से भी सीखता है। इसलिए आज शिक्षक का दायित्व केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सही दिशा देना, उनमें विवेक विकसित करना और उन्हें जीवन-मूल्यों से जोड़ना है। आंध्र प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए आप केवल भाषा-शिक्षक नहीं हैं। आप भारतीय भाषाओं के बीच संवाद के सेतु हैं। आप विविधता में एकता के जीवंत प्रतीक हैं। आपके माध्यम से विद्यार्थी यह सीखते हैं कि अपनी मातृभाषा से प्रेम करते हुए भी दूसरी भारतीय भाषाओं का सम्मान करना भारतीय संस्कृति का मूल संस्कार है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भी यही संदेश दिया है कि शिक्षक का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिज्ञासा, चिंतन, रचनात्मकता, आज का युग तीव्र परिवर्तन का युग है।
केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा द्वारा आयोजित ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल ज्ञान-वृद्धि तक सीमित नहीं रहते। ये शिक्षक के भीतर आत्मविश्वास, नवाचार, संवादशीलता और सतत् सीखने की संस्कृति का विकास करते हैं। आज भारत ‘अमृतकाल’ की यात्रा पर अग्रसर है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का जो राष्ट्रीय संकल्प लिया गया है, उसकी सफलता केवल सरकारों, नीतियों या संसाधनों पर निर्भर नहीं हैय उसकी सबसे सशक्त आधारशिला हमारे शिक्षक हैं। इसलिए कहा जाता है कि यदि किसी राष्ट्र का भविष्य देखना हो, तो उसके विद्यालयों और उसके शिक्षकों को देखिए। इस अवसर पर अतिथि डॉ. संतोष कांबले ने अटलजी के प्रेरणादायक अपील को शिक्षकों से अपनाने का आवह्वान किया। कोविड ने हमें बहुत कुछ सिखाया। इस विभीषिका ने हमें मोबाइल से ऑनलाइन शिक्षण का नया दरवाजा खोला जो बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ। शिक्षक स्वयं का कौशल विकास करता है साथ ही अपने विद्यार्थियों को भी कौशल सिखाता है।

पाठ्यक्रम संयोजक एवं क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भास्कर कृष्णाजी ठुबे ने कहा कि इस कार्यक्रम में उपस्थित हिंदी अध्यापको को इस बारह दिन केहिंदी प्रशिक्षण के दौरान जो कुछ नई हिंदी अध्यापन विधि, प्रविधि,तकनिक,गतिविधि आधारित शिक्षा, रचनात्मक आधारित शिक्षा, खेल आधारित शिक्षा का अध्ययन-अध्यापन में प्रयोग करने के बारे में जानकारी मिली है उसे अपने विद्यार्थियों में अवश्य प्रचार-प्रसार करेंगे। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर अतिथि प्रवक्ता डॉ. दीपेश व्यास ने कहा कि आपने प्रशिक्षण में जो भी सीखा वह अपने विद्यार्थियों को भी लाभांवित करेंगे एवं आपके जीवन में नई ऊर्जा का संचार होगा साथ ही आपके विद्यार्थियों का कौशल विकास भी होगा। एक शिक्षक आजीवन सीखता एवं सिखाता रहता है। आप सभी हिंदी अध्यापक जो कुछ इस प्रशिक्षण के दौरान अध्यापकों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त की है उसे अपने विद्यार्थियों को अवश्य सिखाने का प्रयास करें और सिखाएँ।
इस कार्यक्रम का संचालन एल शारदा एवं धन्यवाद ज्ञापन बी. महेन्द्रनाध द्वारा किया गया। इस पाठ्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने हस्तलिखित पत्रिका ‘आँध्रवाणी’ की रचना की। समापन समारोह के दौरान अतिथियों द्वारा हस्तलिखित पत्रिका का लोकार्पण किया गया। प्रतिभागियों को अतिथियों के द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए। पर-परीक्षण के आधार पर उत्कृष्ट अंक प्राप्त छात्रों को विशेष पुरस्कार दिए गए। जी. अमृतावाणी को प्रथम पुरस्कार, एम. सुनील गाँधी को द्वितीय पुरस्कार, मासिपोगु चिन्ना महादेवुडु को तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। एल. शारदा को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया।
इस पाठ्यक्रम के समापन समारोह में प्रतिभागियों द्वारा अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। पाठ्यक्रम से संबंधित प्रतिक्रिया प्रतिभागी बी. रजनी, वाई. श्रीदेवी तथा प्रतिवेदन एवं मासिपोगु चिन्ना महादेवुडु द्वारा दी गईं। गणेश स्तुति/सरस्वती वंदना मुनीषा बी. एवं शिर्लाम प्रवीणा तथा संस्थान गीत नीलिमा, शिर्डि बेगम, सुगुना, राजकुमारी द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों मंगम्मा समूह द्वारा देश भक्ति गीत तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र शैक्षिक एवं प्रशासनिक सदस्यों एवं विषय-विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अंत में राष्ट्रगान से कार्यक्रम का समापन हुआ।
