(याटकरला मल्लेश मुदिराज की रिपोर्ट)
हैदराबाद/बस्तर : 2013 में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की जीरम घाटी में हुए माओवादी हमले मामले में विशेष NIA कोर्ट ने बुधवार को 10 माओवादियों को मौत की सजा सुनाई। इनमें दो महिलाएं हैं। 5 सितंबर को आरोपियों को दोषी करार देने वाले स्पेशल जज अजय सिंह राजपूत ने बुधवार को सजा सुनाई। माओवादियों के हमले में 29 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से ज्यादा घायल हुए थे।

गौरतलब है कि 25 मई, 2013 को दर्भा थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर कांग्रेस की ‘परिवर्तन रैली’ के काफिले पर माओवादियों ने हमला किया था। तब के विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में हुए इस हमले में राज्य के कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की मौत हो गई थी। मृतकों में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, तब के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार और अन्य शामिल थे।

मौत की सजा पाने वाले दस माओवादियों में- प्रमिला मोडियम, चैतू लेकम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मांडवी, कोसा कवासी उर्फ कोसाराम, आयता मरकाम, मदकामी देवा, जोगा मदकामी, बंजामी सन्ना उर्फ चमरू और महादेव नाग शामिल हैं। सुनवाई में पहले 11 माओवादी थे, इनमें से एक की मौत हो गई थी। अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों से पूछताछ की। मामले में 28 अन्य आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं हुए। NIA ने कुल 39 आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल की थी।
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कोर्ट ने आईपीसी की धारा 120B, 302 के साथ-साथ UAPA, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी ठहराया। मौत की सजा पर अमल के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी है। दोषी 30 दिन में हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। फिलहाल सभी आरोपी सेंट्रल जेल में हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस फैसले को ‘अधूरा न्याय’ बताया और बड़ी साजिश पर पूरी जांच नहीं होने का आरोप लगाया।
