हैदराबाद (सरिता सुराणा की रिपोर्ट) : सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, हैदराबाद, भारत द्वारा 81 वीं मासिक गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह गोष्ठी दो सत्रों में आयोजित की गई थी। संस्थापिका सरिता सुराणा ने सभी सदस्यों का शब्द पुष्पों से हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया और संस्था द्वारा संचालित साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों की जानकारी दी। शुभ्रा मोहन्तो की सरस्वती वन्दना प्रस्तुति से गोष्ठी का शुभारम्भ हुआ।
प्रथम सत्र में प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई के रचना-संसार पर अपनी बात रखते हुए सरिता सुराणा ने कहा- “वे व्यंग्य के पुरोधा साहित्यकार थे। अपने जीवन में अनेक संघर्षों का सामना करते हुए भी उन्होंने कलम का हाथ थामे रखा और सामाजिक विसंगतियों, राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी आवाज उठाई। वे बहुत ही दयालु और परोपकारी प्रकृति के व्यक्ति थे। भोलाराम का जीव, इंस्पेक्टर मातादीन, ठिठुरता हुआ गणतंत्र, प्रेमचन्द के फटे जूते, डॉक्टरेट की कथा, निठल्ले की डायरी आदि उनकी प्रमुख व्यंग्य रचनाएं हैं। विकलांग श्रद्धा का दौर व्यंग्य संग्रह हेतु उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था।”

उपस्थित सदस्यों में गजानन पाण्डेय और आर्या झा ने परिचर्चा में भाग लिया। सभी ने परिचर्चा को सार्थक और सारगर्भित बताया और कहा कि परसाई जी जैसा व्यंग्यकार बिरला ही पैदा होता है।
द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें उपस्थित रचनाकारों ने सावन, भगवान शिव और देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं का सस्वर पाठ करते हुए कवि सम्मेलन जैसा समां बांध दिया। हर्षलता दुधोड़िया ने स्वरचित सावन गीत प्रस्तुत किया तो रिमझिम झा ने शिव स्तुति से भक्ति भाव की धारा प्रवाहित की। शुभ्रा मोहन्तो ने हारमोनियम के साथ मल्हार राग में सावन गीत – डाली-डाली चंपा चहके, बदरिया घिर आई कारी-कारी रे प्रस्तुत करके सबको भावविभोर कर दिया।
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श्रीया धपोला, नवल किशोर अग्रवाल, सुधा अग्रवाल, अमिता श्रीवास्तव, गजानन पाण्डेय, बिनोद गिरि अनोखा, अजय कुमार सिन्हा, चन्द्रप्रकाश दायमा और आर्या झा ने विविध विधाओं और विविध रसों से परिपूर्ण रचनाएं प्रस्तुत की। अंत में अध्यक्षीय टिप्पणी देते हुए सरिता सुराणा ने सभी सदस्यों की रचनाओं की सराहना की और अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। साथ ही साथ गयाप्रसाद शुक्ल सनेही जी की रचना – स्वदेश का पाठ किया। आर्या झा ने काव्य गोष्ठी का कुशलतापूर्वक संचालन किया और श्रीया धपोला ने सभी का आभार ज्ञापित किया। गोष्ठी में सुहास भटनागर की उपस्थिति रही।
