भारत की जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने इतिहास रच दिया। ग्लास्गो में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में अस्मिता ने गोल्ड मेडल जीता। इसके साथ ही वह जूडो में भारत की तरफ से पहला स्वर्ण जीतने वाली खिलाड़ी बन गईं।
ग्लास्गो/हैदराबाद: शुक्रवार (31 जुलाई) को हुए 48 किग्रा वर्ग के फाइनल मुकाबले में अस्मिता ने कनाडा की खिलाड़ी हेइदी क्वाच को 2-1 से हराया। निर्धारित समय तक मैच 1-1 से बराबर था। इसके बाद गोल्डन स्कोर पीरियड में अस्मिता ने लेग टैंगल के साथ निर्णायक युको हासिल कर शानदार जीत अपने नाम की।
गौरतलब है कि अस्मिता डे का जन्म 22 मार्च 2003 को दक्षिण त्रिपुरा के जिला मुख्यालय बेलोनिया में हुआ था। साइकिल रिपेयर शॉप के मालिक की बेटी से लेकर भारत की पहली कॉमनवेल्थ गेम्स जूडो चैंपियन बनने तक उनकी कहानी बेहद प्रेरणादायक है। 23 साल की खिलाड़ी की दृढ़ता, अनुशासन और खेल में निरंतर आगे बढ़ने की वजह से उन्हें गोल्ड मिल सका। सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाली अस्मिता ऐसे माहौल में पली-बढ़ीं जहां बचपन में प्रतिस्पर्धी खेलों का ज्यादा संपर्क नहीं था और आज वह भारत को गर्व करने लायक स्तर तक पहुंच गई हैं।
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हर्ष सिंह को भी स्वर्ण:
आज कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 30 मिनट के भीतर ही दो स्वर्ण पदक जीते। अस्मिता डे के गोल्ड के तुरंत बाद हर्ष सिंह ने भी गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को हराकर स्वर्ण जीता। मैच में सही समय का इंतजार करने वाले हर्ष ने अंत में 1 मिनट से भी कम समय बचे होने पर अहम अंक हासिल किए। हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीता। अस्मिता डे और हर्ष सिंह के गोल्ड मेडल के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के पदकों की संख्या 18 हो गई है – 4 स्वर्ण, 9 रजत और 5 कांस्य।
