दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल त्योहार फीफा (International Federation of Association Football) वर्ल्ड कप-2026 अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। न्यूजर्सी में 19 जुलाई को होने वाले हाई-वोल्टेज फाइनल मैच में अर्जेंटीना और स्पेन की टीमें खिताब के लिए भिड़ेंगी। इस महासमर में जीतने वाली टीम जिस प्रतिष्ठित फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी को चूमेगी। आइए अब मशहूर फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी के बारे में कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं, जिनके बारे में बहुत से लोग नहीं जानते।
प्योर गोल्ड से बनी हुई है ट्रॉफी:
यह आइकॉनिक वर्ल्ड कप ट्रॉफी देखने में जितनी खूबसूरत है, उठाने में उतनी ही भारी है। इस ट्रॉफी का कुल वजन 6.142 किलोग्राम (लगभग 13.5 पाउंड) है। इसमें सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे वजन में से 5.092 किलोग्राम सिर्फ प्योर गोल्ड (खरा सोना) है।
टूर्नामेंट के बाद बदल जाती है बॉटम डिस्क:
हर बार वर्ल्ड कप खत्म होने के बाद नई चैंपियन बनने वाले देश का नाम ट्रॉफी के नीचे लगी एक खास डिस्क पर लिखा जाता है। इसके बाद इस बॉटम डिस्क को हटा कर ज्यूरिख स्थित फीफा म्यूजियम के कलेक्शन में सुरक्षित रख दिया जाता है। फिर से नया इतिहास लिखने के लिए ट्रॉफी के नीचे एक नई डिस्क लगा दी जाती है।
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यह ओरिजिनल ट्रॉफी नहीं है:
वर्तमान में हम जो यह गोल्डन ट्रॉफी देख रहे हैं वह सिर्फ 1974 से इस्तेमाल में है। इससे पहले विजेताओं को जूल्स रिमे ट्रॉफी (Jules Rimet Trophy) दी जाती थी। लेकिन 1970 में ब्राजील की टीम ने तीसरी बार वर्ल्ड कप जीत लिया, इसलिए उस समय के नियमों के अनुसार ब्राजील को वह ओरिजिनल ट्रॉफी हमेशा के लिए अपने पास रखने का मौका मिला। उसके बाद ही यह नई सुनहरी ट्रॉफी डिजाइन की गई।
छूने पर टूटते हैं नियम, नो टच रूल्स:
इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी को कोई भी ऐसे ही नहीं छू सकता। इस पर फीफा के बहुत सख्त नियम लागू हैं। सिर्फ तीन वर्ग के लोग ही इस ट्रॉफी को सीधे हाथों से छू सकते हैं: फीफा प्रेसिडेंट, वर्ल्ड कप विजेता (खिलाड़ी, कोच), विभिन्न देशों के प्रमुख (प्रेसिडेंट या राजा)। इनके अलावा अगर कोई और इस ट्रॉफी को पकड़ना चाहता है तो उसे हाथों में ग्लव्स पहनना जरूरी है।
विजेता रियल ट्रॉफी को अपने पास नहीं रख सकते:
फाइनल मैच खत्म होने के बाद मैदान में कप जीतने की खुशी में खिलाड़ी जिस ओरिजिनल सॉलिड गोल्ड ट्रॉफी को चूमते हैं, वह हमेशा स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख फीफा म्यूजियम में ही सुरक्षित रहती है। जीतने वाले देश इस ओरिजिनल कप को अपने देश नहीं ले जा सकते। इसके बदले विजेता टीम को असली ट्रॉफी जैसी दिखने वाली नकली ट्रॉफी (Replica) हमेशा के लिए दी जाती है।
