इस समय पूरे देश और दुनिया की नजरें जंतर-मंतर पर है। कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी)के नेतृत्व में आरंभ हुआ आंदोलन पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी के आंदोलन को नजर अंदाज करते देख अभियन्ता, नवाचारी और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक आमरण अनशन पर बैठ गये।

हालांकि, सरकार की ओर से अनशन समाप्त करने या करवाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। शनिवार को वांगचुक का अनशन भंग किया गया। इस समय वांगचुक अस्पताल में भर्ती है। यह देख सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके वांगचुक के स्थान पर अनशन पर बैठ गये। 20 जुलाई को चलो संसद है। इससे ठीक पहले सरकार ने नये पुलिस ‘बॉस’ को नियुक्त किया। बॉस ने आते ही जंतर-मंतर के पास धारा 144 को लागू किया। आंदोलनकारियों को चले जाने का आदेश दिया। साथ ही 60 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किये।

रविवार को रात 10 बजे तक पूरा जंतर-मंतर आंदोलनकारियों से खचाखच भर गया। इतना ही नहीं, आंदोलनकारियों ने पुलिस अंदर न आ पाये इसीलिए सभी गेट बंद कर दिये। ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों से जंतर मंतर गूंज रहा था। वांगचुक अनशन को देखकर देश के अनेक राज्यों से नेता, समाजसेवी, बुद्धिजीवी और कलाकार इस आंदोलन को समर्थन दिया।
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सोचने के बात यह है कि जंतर-मंतर से दो-तीन किलोमीटर की दूरी पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और प्रमुख नेता है। हालांकि, किसी ने भी अनशन को समाप्त करने के लिए पहल नहीं की। कॉक्रोच जनता पार्टी के नेतृत्व में 20 जुलाई को चलो संसद कार्यक्रम है। इस आंदोलन को लेकर सर्वत्र चिंता व्याप्त है। क्योंकि टियर गैस (आंसू गैस) और वॉटर कैनन के साथ जगह-जगह पर सशस्त्र बल तैनात है। सबकी नजरें संसद सत्र में क्या होगा और किस विषय पर चर्चा होगी इस पर कम और चलो संसद आंदोलन में क्या होगा इस पर ज्यादा है।

देश की प्रमुख मीडिया इस आंदोलन को कम प्रमुखता दे रही हैं, यदि दे रहे हैं तो वह भी आंदोलन की आलोचना करते कर रहे हैं। हालांकि, विदेशी मीडिया में जंतर-मंतर की खबरों को प्रमुखता से प्रसारित और प्रकाशित किये जा रहे हैं। इसे देखकर देश की जनता प्रमुख मीडिया की कड़ी आलोचना कर रहे हैं।
