हैदराबाद: तेलंगाना में सर्दियों में ही पेयजल का खतरा मंडरा रहा है। भूगर्भ जल से लेकर तालाबों तक.. छोटे जलाशयों से लेकर बड़ी परियोजनाओं तक सब सूख रहे हैं। पहले से ही कई जगहों पर हफ्ते में एक बार पानी आ रहा है। इससे गर्मियों तक और कितनी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा, यह डर सबको परेशान कर रहा है। गांव से लेकर शहर तक इस बार पेयजल की दिक्कतों से बचना मुश्किल दिख रहा है। असल में गर्मियों में (मार्च से जून अंत तक) राज्य की जरूरतों के लिए करीब 70 टीएमसी तक पानी इस्तेमाल करते हैं।
दो तूफान भी राहत नहीं पहुंचा पाए
इसमें अकेले हैदराबाद शहर को ही 21 टीएमसी पेयजल पहुंचाया जाता है। अभी सभी मेजर प्रोजेक्टों में मिलाकर 137 टीएमसी (लाइव स्टोरेज) पानी ही इस्तेमाल करने लायक है। मीडियम प्रोजेक्टों में और 17 टीएमसी तक इस्तेमाल कर सकते हैं। एल निनो के असर से पहले ही गर्मी तेज हो रही है। इससे गर्मियों के साथ और चार महीने तक पेयजल की जरूरतों के लिए उसी पानी को इस्तेमाल करने की जरूरत आ पड़ी है। वाष्पीकरण नुकसान किस स्तर पर होगा, समझ नहीं आ रहा। हाल में बंगाल की खाड़ी में बने दो तूफान अरनब और मुरसु राज्य को जरा भी राहत नहीं पहुंचा पाए। मुरसु तूफान से कुछ हद तक संयुक्त खम्मम जिले को राहत मिली। उसी समय दो हफ्तों तक बारिश से पड़ोसी आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु राज्य पानी के संकट से उबर गए।
तालाब सूख रहे हैं
गांवों को भी इस बार पेयजल की चिंता सता रही है। राज्यभर में 21,500 तालाब हैं। इनमें 65 प्रतिशत तालाब सूख गए हैं। 13,264 तालाबों में पानी का नामोनिशान नहीं है। इनमें 6,123 तालाबों में बूंद भर पानी भी नहीं है। इससे हालत कैसी है, समझ सकते हैं। और 7,141 तालाबों में सिर्फ चौथाई ही पानी है। इस बार राज्य के कुल तालाबों में सिर्फ 538 तालाब ही पूरी तरह भरे हैं। बाकी तालाब आधे-अधूरे भरे है और ये भी इस समय सूखने की कगार पर हैं। इस पृष्ठभूमि में यह चिंता का विषय है कि आने वाली गर्मी में गांवों की हालात कैसे रहेंगे। विश्व मौसम संगठन के साथ-साथ हमारे मौसम केंद्रों ने पहले ही चेतावनी जारी की है कि इस बार गर्मी तेज होगी। इससे प्रोजेक्टों के साथ-साथ तालाबों में भी वाष्पीकरण नुकसान ज्यादा होने की संभावना है। अभी सभी मुख्य प्रोजेक्टों को मिलाकर वाष्पीकरण नुकसान रोजाना औसतन 2 हजार क्यूसेक तक होगा। एक्सपर्ट अनुमान लगा रहे हैं कि गर्मी की तीव्रता के हिसाब से ये मात्रा बढ़ सकती है।
Also Read-
जिलों में ये हैं हालत
इस बार गांवों को भी पेयजल की दिक्कतें झेलनी पड़ सकती हैं। संयुक्त वरंगल जिले को हर साल गर्मियों में 3.5 टीएमसी तक पानी सप्लाई करते हैं। इसमें एक टीएमसी अकेले वारंगल शहर की जरूरतों के लिए ही काफी है। वरंगल टाउन के साथ-साथ पूरे जिले के मुख्य स्रोत श्रीरामसागर प्रोजेक्ट की काकतीय कैनाल और देवादुला प्रोजेक्ट ही हैं। उन दोनों से ही वरंगल में मौजूद भद्रकाली, रामप्पा और वड्डेपल्ली जैसे तालाबों को भरते हैं। लेकिन इस साल श्रीरामसागर प्रोजेक्ट में बाढ़ आई ही नहीं। उस प्रोजेक्ट में 36.86 टीएमसी पानी है, डेड स्टोरेज 14.77 टीएमसी घटाकर बचा सिर्फ 24 टीएमसी ही है। संयुक्त वरंगल के साथ-साथ संयुक्त करीमनगर (जगित्याल, पेद्दापल्ली), संयुक्त आदिलाबाद, संयुक्त निजामाबाद जिलों को भी श्रीरामसागर ही आधार है। करीमनगर को लोअर मानेरु और मिड मानेरु के साथ-साथ एल्लमपल्ली से पानी सप्लाई करते हैं। हर साल 5 टीएमसी पानी चाहिए। करीमनगर शहर को ही एक टीएमसी जरूरत है।
एल निनो कहर ढाया तो हालत गंभीर होगी
इधर सूखा जिला संयुक्त महबूबनगर जिले की हालत और जटिल होती जा रही है। अभी उस जिले को हर साल गर्मियों में 3.5 टीएमसी पानी की जरूरत है और महबूबनगर सिटी को आधा टीएमसी पानी चाहिए। संयुक्त नलगोंडा जिले की जरूरतें 5 टीएमसी हैं और नलगोंडा सिटी की जरूरतें करीब आधा टीएमसी तक हैं। संयुक्त निजामाबाद जिले को 3 टीएमसी तक जरूरत होगी। इसमें आधा टीएमसी निजामाबाद सिटी की जरूरतें पूरी करेगा। इस संयुक्त जिले को श्रीरामसागर के साथ-साथ निजामसागर प्रोजेक्ट ही आधार हैं। अभी निजामसागर प्रोजेक्ट में भी पानी नहीं है। 9.31 टीएमसी पानी है, डेड स्टोरेज 5.91 टीएमसी घटाकर.. बचा सिर्फ 3.4 टीएमसी ही है। कहा जा रहा है कि कुल मिलाकर सभी जिलों को हर साल 70 टीएमसी तक जरूरतें हैं। इस साल और बढ़ सकती हैं। अनुमान है कि एल निनो के असर से गर्मी ने कहर ढाया तो हालत गंभीर होगी और पानी का इस्तेमाल बढ़ेगा।
नागार्जुनसागर ही आधार
राजधानी की पेयजल जरूरतों के लिए नागार्जुनसागर ही आधार है। उस प्रोजेक्ट से संयुक्त नलगोंडा, खम्मम और हैदराबाद की पेयजल जरूरतों के हिसाब से रोजाना 2 हजार क्यूसेक पानी छोड़ रहे हैं। इसमें सिर्फ हैदराबाद की जरूरतों के लिए ही 1200 क्यूसेक लगना गौर करने लायक है। गर्मियों में पूरे शहर को हर साल 21 टीएमसी तक पानी पेयजल जरूरतों के लिए छोड़ते हैं। सिंगूर से पानी आना था.. लेकिन अब वहां से पानी लेने की स्थिति नहीं है। मरम्मत कर रहे हैं, इसलिए उसे खाली कर दिया है। इससे अभी उस प्रोजेक्ट में सिर्फ 2.55 टीएमसी पानी ही है। इसमें भी डेड स्टोरेज से ऊपर इस्तेमाल करने लायक पानी सिर्फ 1.8 टीएमसी ही है। मौजूदा हालात में शहर के घरों में पानी की सप्लाई घटा दी गई है। हफ्ते में सिर्फ एक बार ही सप्लाई कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में हैदराबाद की पेयजल जरूरतों का पूरा बोझ नागार्जुनसागर पर ही पड़ने वाला है। अभी उस प्रोजेक्ट में सिर्फ 49 टीएमसी ही इस्तेमाल करने लायक है।
