हैदराबाद : महानगर में सामने आए अवैध महिला अंड संग्रह मामले ने बड़ा हड़कंप मचा दिया है। गरीब महिलाओं और युवतियों को निशाना बनाकर चल रहे इस धंधे के पीछे और कुछ लोगों की मिलीभगत होने का पुलिस को शक है। मामले की जांच को तेज करने वाली मल्काजगिरी पुलिस कमिश्नर बी. सुमति ने साफ किया कि नियमों के खिलाफ काम करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मामले में तीन अस्पतालों की भूमिका होने की पहचान की गई है और 22 फर्टिलिटी सेंटरों के एआरटी केंद्रों से संबंधों पर जांच कर रहे हैं।
सीपी सुमति ने बताया कि इस मामले में आरोपियों के पास से हार्मोन इंजेक्शन पुलिस ने जब्त किए। हालांकि उन्हें पीड़ित महिलाओं को सच में दिया गया या नहीं, ये बात अभी पक्की नहीं हुई है। जब्त किए गए इंजेक्शनों को फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) को भेजा है, वो रिपोर्ट आने के बाद ही इस विषय पर साफ होगा। सीपी सुमति ने आगे कहा कि असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) केंद्रों से फर्टिलिटी सेंटरों को अंड दान प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी और कागजात पहुंचने चाहिए।
सीपी ने यह भी बताया कि इस महिला अंड संग्रह मामले में तीन फर्टिलिटी केंद्रों में तलाशी ली है। कुल 22 फर्टिलिटी सेंटरों के एआरटी केंद्रों से संबंधों को देख रहे हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि महिलाओं की शादी नहीं हुई फिर भी शादीशुदा होने का और पति नहीं होने पर भी होने का गलत विवरण दिखाकर अंड इकट्ठा किए हैं।
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सीपी सुमति ने बताया कि इस अवैध अंड मामले में पीड़ितों के रूप में पहचानी गई करीब 30 महिलाओं की गांधी अस्पताल में मेडिकल जांच कराई गई है। अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग के साथ खून की जांच भी की गई है। जांच में पहचाना गया है कि उनमें से कुछ को अंड संग्रह के बाद स्वास्थ्य समस्याएं आईं हैं। इस पृष्ठभूमि में पीड़ितों को मिली मेडिकल चिकित्सा, अंड संग्रह हुए तरीके और इस्तेमाल की गई दवाओं के विवरण पर पुलिस ने ध्यान दिया।
सीपी सुमति ने यह भी बताया कि पहले वेश्यावृत्ति से जुड़ी गतिविधियों पर आई जानकारी से जांच शुरू की गई। उसके बाद महिलाओं के अवैध अंड संग्रह का मामला सामने आया। इस धंधे में महिलाओं को लाने वाले एजेंट, बिचौलिए, मेडिकल प्रक्रिया में मदद करने वालों की भूमिकाओं को अलग-अलग देख रहे हैं। सीपी सुमति ने साफ कहा कि इस मामले में संबंध है कहकर हर किसी को आरोपी नहीं बनाएंगे। जिनकी भूमिका के बारे में सबूत मिलेंगे, उन्हीं पर कार्रवाई करेंगे।
डॉक्टर बता रहे हैं कि अंड का उत्पादन बढ़ाने के लिए आमतौर पर कुछ दिनों तक महिलाओं और युवतियों को हार्मोन इंजेक्शन देते हैं। ये प्रक्रिया डॉक्टरों की निगरानी में नहीं हुई तो ओवेरियन हाइपर स्टिमुलेशन सिंड्रोम (ओएचएसएस) जैसी समस्याएं आने का खतरा है। अंडाशय में सूजन आना, पेट में तरल जमा होना, खून जमना और गुर्दों के काम पर असर पड़ना जैसी समस्याएं आ सकती हैं। साथ ही सफाई नहीं बरतने वाले उपकरणों से ये प्रक्रिया करने पर इंफेक्शन और अंदरूनी रक्तस्राव जैसे खतरे हैं। सही मेडिकल सुविधाएं और आपातकालीन चिकित्सा उपलब्ध नहीं होना स्थिति को और खतरनाक बना सकता है। यह भी बता रहे है कि बार-बार अंड इकट्ठा करने से भविष्य में संतानोत्पत्ति पर क्या असर पड़ेगा।
देश में अंड संग्रह, दान, भंडारण, उपयोग को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) कानून-2021 लाया है। इस कानून के अनुसार अंड दाता को अपने जीवनकाल में सिर्फ एक बार ही अंड दान करना चाहिए। एक दाता से अधिकतम 7 अंडे ही इकट्ठा करने चाहिए। एक दाता के अंड सिर्फ एक ही जोड़े को देने चाहिए। इस प्रक्रिया में दाता की लिखित सहमति और 12 महीने का बीमा सुरक्षा जरूरी है।
इतना ही नहीं अंड संग्रह और भंडारण जैसी प्रक्रियाएं कानूनी रूप से दर्ज एआरटी बैंक और केंद्रों के जरिए ही होनी चाहिए। अनुमति के बिना अंड इकट्ठा करना, नियमों का उल्लंघन करना और महिलाओं को धोखे से इस प्रक्रिया में लाना कानूनी कार्रवाई की ओर ले जाएगा। अभी हैदराबाद में सामने आए मामले में ये नियम किस हद तक तोड़े गए। इस एंगल से पुलिस जांच कर रही है। एफएसएल रिपोर्ट, मेडिकल जांच के नतीजे, जब्त किए गए कागजात के आधार पर और विवरण सामने आने की संभावना है।
