हैदराबाद: देश भर में वोटर लिस्ट के खास गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर भारी हंगामा मचा हुआ है। इसी समय में ताजा अहम घटनाक्रम हुआ है। हैदराबाद सांसद और MIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। ओवैसी ने चुनाव आयोग के अधिकारों का उपयोग, वोटरों के पंजीकरण तरीके, ऑनलाइन आवेदनों में बदलाव, वोटरों के नाम जोड़ने और हटाने से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने अपनी याचिका में आपत्तियां उठाईं। गौरतलब है कि देश में SIR प्रक्रिया पर पहले से ही राजनीतिक, न्यायिक चर्चा और आंदोलन से तप रहा है।
असदुद्दीन ओवैसी की तरफ से वकील निजामुद्दीन पाशा ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व वाली बेंच के सामने याचिका रखी। पहले से SIR से जुड़ी अन्य याचिकाएं सुनवाई में आने वाली पृष्ठभूमि में ओवैसी की याचिका को भी उनके साथ जोड़कर गुरुवार को सुनवाई करने की याचिका में अपील की है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने याचिका की जांच करके संबंधित मामलों के साथ सुनवाई में लेने के विषय पर विचार करेंगे। दायर याचिका में मुख्य रूप से चुनाव आयोग अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों को किस तरह उपयोग कर रहा है, इन मुद्दों को असदुद्दीन ओवैसी ने उठाया। याचिका में सवाल उन्होंने उठाए है कि चुनाव आयोग के फैसले कानून के अनुसार सामूहिक रूप से लिए गए हैं क्या, वोटर पंजीकरण के लिए कानून में तय फॉर्म के स्थान पर सॉफ्टवेयर या कार्यकारी आदेशों के जरिए अतिरिक्त शर्तें लाई जा सकती हैं क्या। याचिका में बताया गया है कि सॉफ्टवेयर से बनाई पहचान, आपत्तियों के आधार पर वोटरों की योग्यता तय करना और वोटर लिस्ट से नाम हटाने जैसी कार्रवाइयों की कानूनी सीमाएं होनी चाहिए।

वोटर पंजीकरण अधिकारी (ERO) अपनी कानूनी जिम्मेदारियां स्वतंत्र रूप से निभानी चाहिए, इसकी जरूरत को भी इस याचिका में ओवैसी ने रखा है। नए वोटर के रूप में पंजीकरण चाहने वाले जो फॉर्म-6 जमा करते हैं, उसमें ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए अतिरिक्त घोषणा जोड़ने पर ओवैसी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कानून के प्रावधानों से बढ़कर पोर्टल बदलाव, कार्यकारी आदेशों के जरिए नई शर्तें नहीं लगानी चाहिए। ओवैसी ने दायर याचिका में अनुरोध किया कि चुनाव आयोग ECINET पोर्टल में फॉर्म-6 को कानूनी रूप से तय रूप में बहाल करना चाहिए। अतिरिक्त घोषणा का जवाब नहीं दिया, इस कारण वोटर पंजीकरण आवेदनों को खारिज नहीं करना चाहिए, लंबित नहीं रखना चाहिए। असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी याचिका में अपील की है कि इसी तरह सॉफ्टवेयर से बनी पहचानों के आधार पर ही वोटरों को अयोग्य नहीं मानना चाहिए, कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन करके हटाए गए नामों पर समीक्षा करनी चाहिए। वोटर लिस्ट प्रबंधन में उपयोग हो रहे ERONET, ECINET, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) एप्लिकेशन के कामकाज की जांच के लिए स्वतंत्र कमेटी बनानी चाहिए। उन्होंने अनुरोध किया है कि वोटरों के नाम जोड़ने, हटाने की वैधता के साथ उनके प्रभाव की जांच करके.. भविष्य में खामियां न हो, इसके लिए सुरक्षा उपाय सुझाने चाहिए।
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SIR प्रक्रिया से जुड़े चुनाव आयोग, केंद्र सरकार के आधार पर लिए गए रिकॉर्ड, आंतरिक फाइल नोटिंग, पत्राचार, न्यायिक सलाह को भी उजागर करना चाहिए, ऐसा असदुद्दीन ओवैसी ने इस याचिका में अपील की है। असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी याचिका में अनुरोध किया है कि याचिकाओं की अंतिम सुनवाई पूरी होने तक SIR प्रक्रिया को रोक देना चाहिए। अब SIR प्रक्रिया पर आपत्तियां जताते हुए अन्य विपक्षी नेता भी सुप्रीम कोर्ट गए। कांग्रेस के शीर्ष नेता व लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ 10 और इंडिया गठबंधन नेताओं ने इस विषय पर याचिका दायर की। इनमें कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, RJD नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत जैसे नेता हैं। चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को अपनी याचिकाओं में प्रतिवादी बताया है।
पता चला है कि अब उस याचिका में SIR प्रक्रिया को रद्द करने के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को भी विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा है। हालांकि इन सभी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करके फैसला लेना बाकी है। बिहार में की गई SIR प्रक्रिया की वैधता का समर्थन करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए फैसले को भी पुनः समीक्षा करने की मांग असदुद्दीन ओवैसी ने याचिका में की है। ओवैसी ने कहा कि एक वोटर के रूप में, जनप्रतिनिधि के रूप में, MIM अध्यक्ष के रूप में उन्हें इस विषय पर याचिका दायर करने का हक है। कुल मिलाकर SIR प्रक्रिया पर ओवैसी द्वारा दायर याचिका के साथ चुनाव सूचियों की संशोधन प्रणाली, वोटरों के अधिकार और चुनाव आयोग के अधिकारों के उपयोग जैसे मुद्दे फिर से सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में आने वाले हैं।

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