गुजरात से उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों का पलायन! पढ़ें असली वजह

हैदराबाद : गुजरात के टेक्सटाइल और डायमंड इंडस्ट्री के प्रसिद्ध केंद्र सूरत शहर में फिलहाल गंभीर माहौल बना हुआ है। उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों के लाखों प्रवासी मजदूर अपने गांवों को लौट रहे हैं। यह विषय देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। रेलवे स्टेशनों पर भीड़ देखकर कुछ इसे “सामूहिक पलायन” बता रहे हैं तो कुछ इसे त्योहार सीजन की भीड़ कहकर टाल रहे हैं। असल में सूरत में क्या हो रहा है? मजदूरों के चले जाने के पीछे असली कारण क्या हैं, आइए जानते हैं..

गांव चलो आंदोलन

इस पूरी घटनाक्रम के केंद्र में ‘गांव चलो आंदोलन’ है। इसका अर्थ है अपने गांव वापस जाओ। सूरत के टेक्सटाइल और एम्ब्रॉयडरी यूनिट में काम कर रहे मजदूर बहुत समय से झेल रहे समस्याओं को लेकर आंदोलन बना है। वे आरोप लगा रहे हैं कि मजदूरों से रोज 12 घंटे से ज्यादा काम करवाना, वीकेंड छुट्टी न देना, सवाल पूछने पर सैलरी काटना और नौकरियों से निकालना कर रहे हैं।

श्रम शोषण का विरोध

मजदूर श्रम शोषण का विरोध करते हुए, कानूनी मजदूर हकों की मांग कर रहे हैं। श्रम कानून के अनुसार उन्हें रोज 8 घंटे काम, रविवार सवेतन छुट्टी, PF और ESI सुविधाएं लागू करनी चाहिए। इस मांग के समर्थन में मजदूर संगठनों ने आंदोलन तेज किया। मजदूर प्रतिनिधि अजय दूबे ने आह्वान किया कि मांगें पूरी न होने पर कम से कम 2 महीने अपने गांव वापस चले जाना चाहिए। इसके चलते अब वहां रेलवे स्टेशन खचाखच भरे हैं।

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त्योहार यात्रा है या जबरन पलायन?

सोशल मीडिया में प्रचार हो रहा है कि लगभग 10 लाख मजदूर सूरत छोड़कर जा रहे हैं। लेकिन उद्योग वर्ग और ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार इस दावे में पूरी सच्चाई नहीं है। हर साल दीवाली और छठ पूजा त्योहारों के समय यूपी और बिहार के मजदूर अपने परिवारों से मिलने अपने गांव जाना सामान्य परंपरा है।

मजदूर विवाद

स्थानीय उद्योग विशेषज्ञ और मालिक बता रहे हैं कि इस साल मजदूर विवाद और आंदोलनों की पृष्ठभूमि में कुछ मजदूर पहले ही निकल गए हैं। फिर भी स्टेशनों पर दिख रही भीड़ सिर्फ त्योहार यात्रा ही है। मजदूर अपने हकों के लिए लड़ते हुए त्योहारों पर जाना दोनों समानांतर रूप से हो रहा है।

भविष्य की चुनौतियां – उद्योग पर असर

सूरत टेक्सटाइल उद्योग पूरी तरह प्रवासी मजदूरों पर ही निर्भर है। मजदूरों के पहले चले जाने से उत्पादन पर कुछ असर पड़ने की संभावना है। लेकिन त्योहार खत्म होने के बाद मजदूर वापस आएंगे या नहीं तथा अपनी मांगें पूरी होने तक क्या ये पीछे नहीं हटेंगे? यह फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मत

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का अंत होना है तो मालिक, मजदूर संगठन और श्रम विभाग समन्वय से समस्याओं को सुलझाना होगा। त्योहार के बाद मजदूर वापस फैक्ट्रियों में काम पर लगे तो स्थिति सामान्य हो जाएगी, नहीं तो सूरत उद्योग के लिए यह लंबे समय तक के लिए सिरदर्द बन जाएगा।

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