सावधान! एल नीनो की मार पर प्रोफेसर जयशंकर कृषि यूनिवर्सिटी ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट, पढ़कर दंग रह जाएंगे आप

हैदराबाद : प्रोफेसर जयशंकर कृषि विश्वविद्यालय ने अनुमान लगाया है कि एल नीनो के प्रभाव से खरीफ सीजन में 20 हजार करोड़ रुपये तक फसल नुकसान हुआ हो सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि तेलंगाना में मॉनसून में खेती का एरिया नॉर्मल एरिया के मुकाबले 25 से 30 परसेंट कम हो गया है और उपजाऊ इलाकों में भी कम बारिश की वजह से पैदावार में कमी आई है।

अहम चरणों में बारिश न होने से धान और कपास की फसलें ज्यादा प्रभावित हुईं। बीज बोने के बाद कई जगह फसलें सूख गईं। इससे किसान निवेश में डूब गए। इस बारे में सरकार को कई सिफारिशों के साथ रिपोर्ट सौंपी। रबी में भी यही स्थिति दोहराए जाने का खतरा है। कृषि विश्वविद्यालय वाइस चांसलर जानय्या ने सुझाव दिया कि इसलिए किसान धान के बजाय वैकल्पिक फसलें उगाएं।

रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना में आम तौर पर खरीफ में 1.45 करोड़ एकड़ में विभिन्न फसलें उगाई जाती हैं। इस बार कम बारिश के कारण खेती का एरिया काफी घटा। करीब 67 लाख एकड़ में उगने वाला धान इस बार 56 लाख एकड़ तक ही सीमित रहा। बारिश की कमी से कपास की फसल अहम चरणों में पर्याप्त नमी न मिलने से पौधे नहीं बढ़े। फलियों के विकास और पैदावार पर गंभीर असर पड़ रहा है। अन्य फसलों की स्थिति भी सोची गई उतनी अच्छी नहीं है। बारिश समय पर न होना, बारिश के बीच अंतर ज्यादा होना फसलों की वृद्धि पर नकारात्मक असर पड़ा है।

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रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इस साल 1 जून से 30 सितंबर तक राज्य में आम तौर पर 740.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज होनी चाहिए थी। हालांकि, 615.5 मिलीमीटर ही दर्ज हुई। 17 प्रतिशत कमी होने के साथ महीनेवार बारिश में भी उतार-चढ़ाव का फसलों पर असर पड़ा। फसलों के अहम चरणों में जमीन में नमी घट जाने से पैदावार घटने की स्थिति बनी है। कृषि विशेषज्ञ कह रहे हैं कि वास्तव में एल नीनो स्थिति बनने पर हर बार सूखा आएगा, ऐसा नहीं मान सकते।

पहले कुछ मौकों पर कम बारिश दर्ज हुई तो कुछ अन्य मौकों पर सामान्य और कुछ मौके पर अधिक बारिश हुई हैं। 2023 में एल नीनो स्थितियां होने पर भी देशभर में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई। लेकिन फिलहाल राज्य में कम बारिश का फसलों पर असर पड़ने से भारी नुकसान हुआ। कृषि विशेषज्ञ मानना हैं कि तालाबों, कुंडों और अन्य स्रोतों में पानी का भंडार और घटा तो आने वाले दिनों में सिंचाई की समस्या गंभीर होने का खतरा है।

इसका असर रबी की खेती पर भी पड़ने की संभावना दिख रही है। आम तौर पर रबी में एक करोड़ एकड़ तक फसलें उगाई जाती हैं। इस बार पानी की उपलब्धता के हिसाब से खेती का रकबा करीब 70 लाख एकड़ तक घट सकता है। सामान्य से 25 से 30 प्रतिशत तक फसल एरिया घटेगा। प्रोजेक्ट, तालाबों में पानी का भंडार और उपलब्ध भूजल के अनुसार खेती चलेगी। मुख्य रूप से धान की खेती का एरिया काफी घटने की संभावना है।

प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय और राज्य के कृषि वैज्ञानिकों ने सिफारिश की है कि तेलंगाना में एल नीनो के असर का सामना करने के लिए जल संरक्षण व फसल विविधीकरण रणनीतियों को सख्ती से लागू करना चाहिए। पानी ज्यादा इस्तेमाल करने वाले धान की खेती को रबी सीजन में रोकना चाहिए। इससे भूजल खत्म होने से तथा फसलें सूखकर नुकसान से बचा जा सकता है। कम समय में हाथ आने वाली, सूखा सहने वाली वैकल्पिक फसलें मूंग, उड़द, चना, अरहर जैसी दालें, सूरजमुखी, तिल, कुसुम, मूंगफली जैसी तिलहन, ज्वार, बाजरा, मक्का जैसे अनाज उगा सकते हैं।

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