नई दिल्ली : विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारतीय महिला डबल्स जोड़ी ट्रीसा जॉली – पुलेला गायत्री गोपीचंद का शानदार प्रदर्शन रहा है। डिफेंडिंग चैंपियंस के हाथों कड़ी मेहनत से हारने के बाद इस जोड़ी ने भारत को ऐतिहासिक कांस्य पदक दिलाया।

नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में शनिवार को खेले गये महिला डबल्स सेमीफाइनल में दुनिया की नंबर वन और डिफेंडिंग चैंपियन चीन की जोड़ी लियू शेंगशु – तान निंग के हाथों 21-18, 13-21, 8-21 के अंतर से ट्रीसा-गायत्री को हार का सामना करना पड़ा। यह मैच 1 घंटा 11 मिनट तक चला। इस जीत के साथ विश्व चैंपियनशिप महिला डबल्स में 15 साल के इंतजार पर विराम लग गया। 2011 लंदन में ज्वाला गट्टा-अश्विनी पोनप्पा के कांस्य जीतने के बाद, इस टूर्नामेंट में भारत को पदक दिलाने वाली पहली महिला जोड़ी के रूप में ट्रीसा-गायत्री ने इतिहास रचा।
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मैच की शुरुआत से ही दोनों जोड़ियों में जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। एक समय 16-18 से पिछड़ने के बाद भारतीय जोड़ी ने दबाव से उबरते हुए शानदार वापसी की और लगातार अंक लेकर 21-18 से पहला गेम अपने नाम कर लिया। भारतीय जोड़ी ने रणनीतिक रूप से खेलते हुए इंटरवल तक 11-10 की मामूली बढ़त बना ली थी। हालांकि उसके बाद हुई 49-शॉट की लंबी रैली में चीन ने पॉइंट हासिल कर लिया, जिससे मैच का रुख बदल गया।

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लगातार 5 पॉइंट हासिल करने वाली चीन की जोड़ी ने 21-13 से दूसरा गेम जीत लिया। तीसरे निर्णायक गेम में चीन की खिलाड़ियों ने पूरी तरह से दबदबा बनाया। किसी भी समय भारतीय जोड़ी को मौका दिए बिना 21-8 से मैच अपने नाम कर लिया। चोटों से उबरकर, क्वार्टर फाइनल में चौथी सीड को हराकर सेमीफाइनल में पहुंची यह अनसीडेड भारतीय जोड़ी ने गोल्ड हाथ से निकलने के बावजूद फैंस का दिल जीतकर कांस्य के साथ टूर्नामेंट का समापन किया।
