महाराष्ट्र के इस जिले के हिंदी अध्यापकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न, मुख्य अतिथि डॉ. गिरीश डी. पवार ने दिया अविस्मरणीय संदेश

हैदराबाद : केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र द्वारा महाराष्ट्र राज्य के जळगाव जिले के हिंदी अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए 500वें नवीकरण पाठ्यक्रम’ का आयोजन दिनांक 10 से 22 अगस्त तक किया गया। जिसका उद्घाटन समारोह 10 अगस्त को किया गया था। इसका समापन समारोह शनिवार को संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हैदराबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद के मानविकी संकाय के सहायक प्रोफेसर डॉ. गिरीश डी. पवार एवं विशिष्ट अतिथि के रूप हैदराबाद शहर के डीसीपी वैभव गायकवाड उपस्थित रहे। इस अवसर पर पाठ्यक्रम संयोजक केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भास्कर कृष्णाजी ठुबे, डॉ. दीपेश व्यास उपस्थित थे। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रतिभागियों द्वारा संस्थान गीत एवं स्वागत गीत प्रस्तुत करके कार्यक्रम की शुरूआत की गई। इस कार्यक्रम में कुल 36 (8 महिलाएँ एवं 28 पुरुष) प्रतिभागियों ने कक्षा में उपस्थित होकर प्रशिक्षण प्राप्त किया और परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 36 प्रतिभागी अध्यापकों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा मनोविज्ञान, हिंदी पाठनियोजन, हिंदी भाषा शिक्षण पाठयोजना (गद्य, पद्य, रचनात्मक उपागम आधारित शिक्षण), हिंदी में रोजगार की संभावनाएँ, सृजनात्मक लेखन, हिंदी साहित्य का इतिहास, हिंदी भाषा का उद्भव एवं विकास, भारतीय बहुधार्मिकता और समन्वय, व्यक्ति समाज एंव राष्ट्र निर्माण में साहित्य की भूमिका, भारतीय जीवन पद्धति, भारतीय संस्कृति और दर्शन, हिंदी व्याकरण- रस, भाषाविज्ञान तथा उसके विविध पक्ष, ध्वनि, उच्चारण, भाषा परिमार्जन, भाषा कौशल, हिंदी व्याकरण तथा उसके विविध पक्ष, छंद एवं अलंकार, शब्द, शक्तियाँ, संधि, समास एवं हिंदी शिक्षण में प्रौद्योगिकी का प्रयोग (विशेषकर एआई) आदि विषयों पर जानकारियाँ आंतरिक एवं आमंत्रित बाह्य अतिथि अध्यापकों द्वारा दी गई। तथा अतिथि व्याख्याताओं द्वारा NCF-2023 के अनुसार बदलती कक्षा का वातावरण एवं गतिविधि आधारित शिक्षण एवं ध्वनि विषयों पर विशेष व्याख्यान दिया गया।

समापन समारोह की मुख्य अतिथि डॉ. गिरीश डी. पवार ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाना है। हम बच्चों को उनके अधिकार और देश के प्रति उनकी क्या-क्या जिम्मेदारियाँ है। यह अगर नहीं सीखाएँगे तो एक पूरी पीढ़ी खराब हो जाएगी और इसका पूरा दोष हमी को जाएगा। इसलिए हमें छात्रों के अंदर उनके कौशल और प्रतिभा को खोजकर उन्हें देश का जिम्मेदार नागरिक बनाना है। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित आईपीएस अधिकारी वैभव गायकवाड ने कहा कि देश के आम नागरिक को संविधान अनुसार प्रदत्त अधिकारों का अनुचित लाभ नहीं उठाना चाहिए। सभी को कानून का पालन करना चाहिए तथा स्वच्छ समाज एवं स्वस्थ्य समाज की परिकल्पना को साकार करना चाहिए। हम देश के सच्चे राष्ट्र निर्माता है। यह दायित्व आप शिक्षकों के कंधे पर है।

पाठ्यक्रम संयोजक एवं क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भास्कर कृष्णाजी ठुबे ने कहा कि जळगाव जिले के माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के अध्यापकों के लिए आयोजित यह 500वाँ हिंदी नवीकरण कार्यक्रम केवल एक संख्यात्मक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह हिंदी सेवा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और भाषा-सेतु निर्माण के प्रति हमारी अनवरत प्रतिबद्धता का प्रतीक है। अध्यापक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने वाला माध्यम नहीं होता, वह विद्यार्थी के भीतर चिंतन और अभिव्यक्ति की नींव रखता है। महाराष्ट्र और हिंदी का संबंध अत्यंत ऐतिहासिक और प्रगाढ़ रहा है। संत ज्ञानेश्वर, संत नामदेव और संत तुकाराम से लेकर आधुनिक काल तक, महाराष्ट्र की भूमि ने हिंदी के प्रचार-प्रसार और सर्वसमावेशी रूप को हमेशा सशक्त बनाया है। जळगाव के विद्यालयों में जब आप हिंदी पढ़ाते हैं, तो आप केवल भाषा नहीं सिखाते, बल्कि भाषिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का सूत्र पिरोते हैं। समय के साथ शिक्षण पद्धतियों में बदलाव अनिवार्य है। इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आपको आधुनिक शिक्षण प्रविधियों, एआई के प्रयोग, भाषा-वैज्ञानिक दृष्टिकोण, और व्याकरण शिक्षण के नए आयामों से परिचित कराना था। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) में मातृभाषा और भारतीय भाषाओं में शिक्षण पर विशेष बल दिया गया है। बहुभाषिकता भारत की शक्ति है। एक मराठी भाषी परिवेश में हिंदी का अध्यापन करते समय जब आप विद्यार्थियों की सहज मराठी शब्दावली और हिंदी के अंतर-संबंधों का उपयोग करते हैं, तो अधिगम प्रक्रिया अत्यंत सहज और आनंददायी बन जाती है। संस्थान का सदैव यही प्रयास रहा है कि हम शिक्षकों को ऐसी प्रविधियाँ दें जिससे कक्षा-कक्ष शिक्षण जीवंत बने। आप जब यहाँ से अपने-अपने विद्यालयों में लौटेंगे, तो यह नवीकरण केवल आपके तक सीमित न रहे। इसे अपने सहयोगियों और विद्यार्थियों तक पहुँचाएँ।

यह भी पढ़ें-

अंत में उन्होंने प्रतिभागी अध्यापकों को संबोधित करते हुए निम्न बिंदुओं पर प्रकाश डाला-
अपनी कक्षाओं में बाल-केंद्रित और गतिविधि-आधारित शिक्षण को बढ़ावा दें।
विद्यार्थियों में हिंदी साहित्य के प्रति रुचि जागृत करें।
आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए भाषा शिक्षण को रोचक बनाएँ।

मैं इस 500वें समापन कार्यक्रम हेतु पधारे मुख्य अतिथि महोदय एवं विशिष्ट अतिथि महोदयों का आभार व्यक्त करता हूँ। समापन कार्यक्रम का सफल आयोजन हेतु संस्थान के सभी कार्मिक गण, सभी विषय-विशेषज्ञों और विशेष रूप से जळगाव से पधारे आप सभी अध्यापकों का हृदय से आभार व्यक्त किया हूँ।

इस अवसर अतिथि प्रवक्ता डॉ. दीपेश व्यास ने कहा कि आपने प्रशिक्षण में जो भी सीखा वह अपने विद्यार्थियों को भी लाभांवित करेंगे एवं आपके जीवन में नई ऊर्जा का संचार होगा साथ ही आपके विद्यार्थियों का कौशल विकास भी होगा। एक शिक्षक आजीवन सीखता एवं सिखाता रहता है। आप सभी हिंदी अध्यापक जो कुछ इस प्रशिक्षण के दौरान अध्यापकों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त की है उसे अपने विद्यार्थियों को अवश्य सिखाने का प्रयास करें और सिखाएँ। इस कार्यक्रम का संचालन प्रताप साळवे व किर्ती मराठे एवं धन्यवाद ज्ञापन सुनयना अहिरे द्वारा किया गया। इस पाठ्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने हस्तलिखित पत्रिका ‘बहिणाबाई चैधरी’ की रचना की। समापन समारोह के दौरान अतिथियों द्वारा हस्तलिखित पत्रिका का लोकार्पण किया गया। प्रतिभागियों को अतिथियों के द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए। पर-परीक्षण के आधार पर उत्कृष्ट अंक प्राप्त छात्रों को विशेष पुरस्कार दिए गए। चेतन किसन जाधव को प्रथम पुरस्कार, विकास पाटील को द्वितीय पुरस्कार, प्रशांत शर्मा को तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। पवित्रा रेपे को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया।

इस पाठ्यक्रम के समापन समारोह में प्रतिभागियों द्वारा अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। पाठ्यक्रम से संबंधित प्रतिक्रिया प्रतिभागी हरिष महाले, निशांत महाज, रंजना कोळी, अतुल पाटील तथा प्रतिवेदन वासुदेव महाजन द्वारा दी गईं। गणेश स्तुति सतिष कागणे द्वारा सरस्वती वंदना श्री सजग तिवारी द्वारा तथा संस्थान गीत प्रतिभागी किर्ती मराठे, माधुरी देशमुख, जाधव, सुनिता दोडगे, पवित्रा रेपे, प्रतिभा, डॉ. किरण चव्हाण एवं सुधीर सिरसाठा द्वारा समूह में प्रस्तुत किया गया। देश भक्ति गीत सतिष कागणे, किरण चव्हाण, सुधीर सिरसाठ, उठाळे, शाम पाटील एवं किर्ती मराठे स्वरचित कविता चंद्रमणी पानपाटील एवं चेतन द्वारा, एकल अभिनय डॉ. किरण चव्हाण द्वारा प्रस्तुत किया गया। अंत में सतिष कागणे, शाम पाटील, रंजना कोळी एवं पवित्रा रेपे द्वारा समूह नृत्य सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र शैक्षिक एवं प्रशासनिक सदस्यों एवं विषय-विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अंत में राष्ट्रगान से कार्यक्रम का समापन हुआ।

One thought on “महाराष्ट्र के इस जिले के हिंदी अध्यापकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न, मुख्य अतिथि डॉ. गिरीश डी. पवार ने दिया अविस्मरणीय संदेश

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

Recent Comments

Archives

Categories

Meta

'तेलंगाना समाचार' में आपके विज्ञापन के लिए संपर्क करें

X