हैदराबाद: बोल्लारम में मद्रास रेजिमेंट के शस्त्रागार से हथियार और गोला-बारूद चोरी के मामले में जांच में कई सनसनीखेज बातें सामने आ रही हैं। इस केस में मुख्य आरोपी पूर्व हवलदार उप्पुतोला मल्लेश को पुलिस ने 10 दिन तक कस्टडी में लेकर पूछताछ की। पुलिस बता रही है कि हालांकि चोरी से पहले बनाई गई योजना, आर्मी के कुछ लोगों का सहयोग और हथियारों को ले जाने का तरीका जैसे पहलू सामने आए हैं। मल्लेश 2009 में भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। पता चला है ड्यूटी के दौरान हथियार व गोला-बारूद पर ट्रेनिंग लेने वाला वह विभिन्न कैंटोनमेंट में शस्त्रागार से जुड़ी जिम्मेदारियां भी निभा चुका है।
पुलिस ने बताया किहालांकि ड्यूटी में लापरवाही को लेकर कई बार अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करने की बात जांच में सामने आई है। , ऐसा पुलिस बता रही है कि 16 साल की सर्विस पूरी होने के बाद 3 साल और सर्विस करने का मौका होने के बावजूद मल्लेश ने उसे जारी नहीं रखा। इस पृष्ठभूमि में उसमें असंतोष बढ़ने की बात जांच में सामने आई है। मल्लेश का आर्मी में भर्ती होने से पहले ही आपराधिक रिकॉर्ड होने की बात पुलिस की जांच में सामने आई। पुलिस ने पहचाना है कि 2005 में अच्चमपेट पुलिस स्टेशन में चोरी का केस व 2007 में अमराबाद इलाके में सोना व चांदी चोरी से जुड़े एक और केस में वह आरोपी था।
हालांकि ये केस होने के बावजूद मल्लेश आर्मी की नौकरी के लिए कैसे चुना गया। जानकारी मिली है कि नियुक्ति के समय उसका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड अधिकारियों के ध्यान में आया था या नहीं इन पहलुओं पर मिलिट्री इंटेलिजेंस व स्थानीय पुलिस अलग-अलग जांच कर रही है। 2022 में कोलकाता के बैरकपुर कैंटोनमेंट में ड्यूटी करते समय मल्लेश की बीरबल शाह नाम के व्यक्ति से पहचान होने की बात पुलिस बता रही है। बीरबल शाह के जरिए अवैध हथियारों के मामले में होने के शक वाले अवल देय उर्फ ओबी से मल्लेश की पहचान होने की बात जांच में सामने आई है।
Also Read-
पुलिस ने बताया कि ओबी अवैध हथियारों के कारोबार में है या नहीं यह जानने के लिए मल्लेश ने 10 हजार रुपये में एक बंदूक खरीदी। उस बंदूक से लूट की कोशिश करने के बावजूद वह संभव न होने से उसे इस्तेमाल किए बिना अपने गांव में छिपा देने की बात पूछताछ में सामने आई है। 2025 में मल्लेश का तबादला बोल्लारम की मद्रास रेजिमेंट में हुआ। परिवार के साथ याप्राल में रहते हुए नागरकर्नूल में अपनी जमीन पर घर का निर्माण शुरू किया। रिटायरमेंट के फायदे मिलेंगे इस उम्मीद से कर्ज लेकर निर्माण करने के साथ करीब 8 लाख रुपये कीमत का प्लॉट खरीदने की बात पुलिस बता रही है।
जानकारी मिली है कि इस आर्थिक दबाव से निकलने के लिए आर्मी के हथियार चोरी करने के विचार पर आने की बात जांच में सामने आई है। पहले अपने बचपन के दोस्त निरंजन व मल्लिकार्जुन के साथ मिल कर चोरी का प्लान बनाने के बावजूद उनके न मानने से मल्लेश ने रणनीति बदल ली। इस साल जुलाई से मद्रास रेजिमेंट की 20वीं बटालियन में मल्लेश ने कई बार रेकी करने की बात पुलिस बता रही है। वहां काम करने वाले शेषु और अपने बैचमेट प्रवीण से पहचान का इस्तेमाल किया। पुलिस ने कहा कि हथियार रखे जाने वाली जगह पर सुरक्षा इंतजाम, गार्डों की गश्त व सीसीटीवी कैमरों की स्थिति पर मल्लेश ने पहले ही जानकारी जुटा ली थी। चोरी से एक हफ्ते पहले ही सीसीटीवी कैमरों को काम न करने लायक बनाने और घटना वाले दिन कैमरों पर फोम छिड़कने की जानकारी है। पुलिस की जांच के मुताबिक चोरी के समय मल्लेश की मदद करने के आरोप झेल रहे प्रवीण व शेषु ने लाइटें बंद कर दीं और अन्य जवानों का ध्यान भटकाने जैसा व्यवहार किया।

जानकारी मिली है कि इससे मल्लेश ने करीब डेढ़ घंटे तक हथियार और गोला-बारूद को वहां से हटाने की बात जांच में सामने आई है। पहले बाइक पर उन्हें ले जाकर बाद में कार से नागरकर्नूल में अपने घर ले जाकर छिपाने की बात पुलिस बता रही है। इस मामले में 16वीं बटालियन के प्रवीण, 20वीं बटालियन के शेषु व विनोद की भूमिका पर पुलिस जांच जारी रख रही है। विनोद को शेषु के जरिए एक लाख रुपये मिलने की बात जांच में सामने आई है। हथियार चोरी के बाद मल्लेश ने कोलकाता के बीरबल शाह से संपर्क करने की बात पुलिस ने सबूत जुटाए हैं। उसके जरिए अवल देय उर्फ ओबी को चोरी किए हथियार बेचने की कोशिश होने का पुलिस को शक है। 4 एके-47 राइफलों के लिए 5 लाख रुपये व पिस्तौलों के लिए 3 लाख रुपये देने की बात होने की बात जांच में सामने आई है। हालांकि चोरी किए हथियारों में से कितने बेचे गए, किसके पास पहुंचे इन बातों पर अभी पूरी स्पष्टता आनी बाकी है।
इस केस में अहम माने जा रहे बीरबल शाह व अवल देय उर्फ ओबी को पकड़ने के लिए पुलिस ने छह विशेष टीमों को मैदान में उतारा है। बीरबल शाह बांग्लादेश से कोलकाता आकर वहां रहने की बात पुलिस ने पहचानी है। क्या इन दोनों का देश भर में अवैध हथियारों का नेटवर्क है। बोल्लारम हथियार चोरी के पीछे और कोई है। चोरी किए हथियार अन्य इलाकों में पहुंचे हैं क्या। इन पहलुओं पर जांच जारी है। जांच अधिकारी मान रहे हैं कि ये दोनों पकड़े गए तो केस में हथियार चोरी के पीछे के नेटवर्क पर और स्पष्टता आने की संभावना है।
