हैदराबाद: 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों द्वारा प्रिंसिपल की हत्या की घटना ने तेलंगाना में सनसनी फैला दी है। नलगोंडा जिले के कोंडामल्लेपल्ली मंडल के फूलसिंग तांडा और पिल्यातांडा के रहने वाले 16 साल के दो छात्र इस घटना को अंजाम दिया हैं।
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दोनों दोस्त रूपारेड्डी के प्रिंसिपल रहते हुए स्कूल में 10वीं कक्षा पढ़ रहे थे और वहीं के हॉस्टल में रहते थे। प्रिंसिपल ने छात्रों को सिगरेट, शराब जैसी लत लगने की बात पकड़ ली थी। पहले उनके पास पैसे और सेलफोन मिलने पर माता-पिता को बुलाकर उनके सामने डांटा भी था। एक छात्र को हॉस्टल से हटाकर डे-स्कॉलर भी बना दिया था।

पुलिस ने बताया कि इससे छात्रों ने प्रिंसिपल से दुश्मनी पाल ली। ऐशो-आराम के आदी हो चुके छात्रों ने कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के इरादे से प्रिंसिपल के घर में चोरी करने की योजना बनाई। उन्होंने सोचा कि स्कूल में फीस वसूली हो रही है इसलिए उनके घर में भारी नकदी होगी। हत्या घटना से 5 दिन पहले ही प्लान बनाकर घर के आसपास रेकी की। पुलिस ने पाया कि सोशल मीडिया पर आसानी से पैसा कमाना, हत्या कैसे करनी है, जुर्म करने के बाद कैसे बचना है, जैसे विषय भी आरोपियों ने सर्च किए।
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11 अगस्त को शाम को दोनों छात्र प्रिंसिपल के घर पहुंचे। पहले से खरीदी हुई हुडी, टी-शर्ट, पैंट, मास्क, ग्लव्स लेकर आए। बाद में चाकू भी खरीदा। एक छात्र घर के पास पानी की टंकी के पास पहरेदारी कर रहा था, जबकि दूसरा छात्र घर के पीछे से दीवार कूदकर अंदर घुस गया। किचन के रास्ते घर में घुसे उसे रूपारेड्डी ने पहचान लिया। इस पर साथ लाए चाकू से उन पर हमला कर हत्या कर दी। उन्हें 27 बार चाकू से गोदा। इसके बाद बेडरूम में रखे करीब 2.50 लाख रुपये नकद लेकर वहां से फरार हो गए। रूपारेड्डी के सेलफोन को स्विच ऑफ कर घर के पास एक पत्थर के नीचे रख दिया। हत्या में इस्तेमाल किए कपड़ों को भी वहां से ले जाकर नाली में फेंक दिया।
ऐसा पुलिस ने गहन जांच में पता लगाया कि हत्या से पहले रूपारेड्डी ने अपनी बुआ से फोन पर बात की थी। बातचीत में आखिरी बार उन्होंने ‘बाबू’ शब्द बोला था। उसके बाद फोन स्विच ऑफ हो गया। इसी एक क्लू के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। ‘बाबू’ कहकर उन्होंने किसे संबोधित किया था, इस एंगल से स्कूल में पूछताछ की गई। स्कूल दोबारा खुलने के बाद गैरहाजिर रहे 13 छात्रों के बारे में जानकारी जुटाई गई। सूचना पुलिस को मिली कि उनमें 5 छात्र 10वीं क्लास के थे, जिनमें से 2 छात्र अचानक पैसे खर्च कर ऐश कर रहे थे। केस की जांच के लिए पुलिस ने पांच विशेष टीमें बनाईं। करीब 70 CCTV कैमरों की फुटेज देखी और 80 लोगों से पूछताछ की।
इसी क्रम में दो छात्रों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो मामला सुलझ गया। आरोपी के पास 1.54 लाख रुपये नकद और महंगा आईफोन मिला। पैसे कहां से आए, पूछने पर पहले उसने कहा कि माता-पिता ने दिए हैं। लेकिन नोटों पर खून के धब्बे दिखने पर उन्हें फॉरेंसिक लैब भेजा गया। वो इंसान के खून के धब्बे ही निकले, तो छात्रों से और गहराई से पूछताछ करने पर प्रिंसिपल की हत्या और नकदी चोरी की बात सामने आई। पुलिस ने आरोपियों से 1.54 लाख रुपये नकद, प्रिंसिपल का आईफोन, उनका सेलफोन, हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू, ग्लव्स, मास्क और दो सेलफोन बरामद किए। एसपी शरतचंद्र पवार ने बताया कि दोनों आरोपी नाबालिग होने के कारण उन्हें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले के अन्य पहलुओं पर भी जांच की जा रही है।
