सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था : ‘भारतीय संस्कृति में लोकगीतों का महत्त्व’ विषय पर होगा फोकस

हैदराबाद (सरिता सुराणा की रिपोर्ट): सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, भारत की 15वीं मासिक गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन रविवार को दोपहर 12.15 बजे से किया जा रहा है। यह गोष्ठी दो सत्रों में आयोजित की जाएगी। प्रथम सत्र में ‘भारतीय संस्कृति में लोकगीतों का महत्त्व’ विषय पर साहित्यिकी संस्था की निदेशक, विख्यात कवयित्री एवं गीतकार आदरणीया विद्या भण्डारी अपना वक्तव्य प्रस्तुत करेंगी।

सुप्रसिद्ध साहित्यकार, शिक्षा शास्त्री एवं अनुवादक डॉ शकुन्तला रेड्डी जी इस सत्र की अध्यक्षता करेंगी। वे तेलुगु भाषा के लोकगीतों पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत करेंगी। राजस्थानी भाषा के लोकगीतों पर सरिता सुराणा अपने विचार रखेंगी। आ. भावना पुरोहित गुजराती लोक साहित्य पर और आ रिमझिम झा जी मैथिली लोकगीतों पर अपने विचार व्यक्त करेंगी। प्रथम सत्र का समय लगभग एक घण्टा रहेगा।

द्वितीय सत्र में हमेशा की तरह काव्य गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। सावन का महीना प्रारम्भ हो गया है, धरती मां ने हरितिमा की चादर ओढ़ ली है। बागों में झूले पड़ गए हैं। महिलाओं के लिए यह महीना व्रत और त्यौंहारों की दृष्टि से विशेष है। इसीलिए इस माह की काव्य गोष्ठी हमारी वैविध्यपूर्ण भारतीय संस्कृति को समर्पित है।

इस सत्र में आप अपनी मातृभाषा में अपने मनपसन्द लोकगीत प्रस्तुत कर सकते हैं। जो रचनाकार लोकगीत प्रस्तुत करना नहीं चाहते, वे अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर सकते हैं। बहुभाषी कवि सम्मेलन की तरह बहुभाषी लोकगीतों पर आधारित यह अपनी तरह की अनूठी काव्य गोष्ठी होगी। जो लोकगीत वे प्रस्तुत करना चाहते हैं, उसका चुनाव कर लें। अगर गीत बड़ा है तो उसका मुखड़ा और एक अन्तरा ही प्रस्तुत करें ताकि हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुन सकें। आप सबसे अनुरोध है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में भाग लेकर इस कार्यक्रम को सफल बनाएं। Meeting URL: https://meet.google.com/dwi-qsyy-rdk है।

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