Congratulations : ऑस्ट्रेलियाई संसद में प्रोफेसर निर्मला एस. मौर्य ‘भारत गौरव अवार्ड’ से सम्मानित, यह है इनकी उपलब्धियां

(प्रोफेसर ऋृषभदेव शर्मा की कलम से…)

दक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार-प्रसार और शोध को नई ऊंचाइयां देने वाली प्रख्यात शिक्षाविद को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान

मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया) : हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की पार्लियामेंट ऑफ विक्टोरिया के ‘क्वींस हॉल’ में आयोजित एक भव्य अंतरराष्ट्रीय समारोह में भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और वैश्विक भारतीय प्रतिभाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। इस समारोह में दुनिया भर से भारत का नाम रोशन करने वाली 25 विभूतियों को सम्मानित किया गया।

इस गौरवशाली सूची में दक्षिण भारत में हिंदी भाषा के संवर्धन और विकास के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली प्रख्यात शिक्षाविद प्रो. निर्मला एस. मौर्य (पूर्व कुलपति वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर) को ‘भारत गौरव अवार्ड’ से नवाजा गया। समारोह की शुरूआत भारत और ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रगान से हुई। तत्पश्चात मेंहदीपुर बालाजी धाम के महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज ने हनुमान चालीसा का पाठ कर पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

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दक्षिण भारत के पाँचों राज्यों में हिंदी को बनाया आजीविका का माध्यम:

समारोह में प्रो. निर्मला एस. मौर्य के असाधारण योगदान की विशेष सराहना की गई। उन्होंने दक्षिण भारत के पाँचों राज्यों- तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और अकादमिक उत्थान के लिए अविस्मरणीय कार्य किया है।

प्रमुख उपलब्धियाँ और योगदान:

शोध और अकादमिक नेतृत्व: प्रो. मौर्य ने पूर्वांचल विश्वविद्यालय में कुलपति रहते समय काफी महत्वपूर्ण अकादमिक कार्य करने के साथ-साथ महिला सशक्तीकरण, टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम तथा सामाजिक सरोकार के अनेकों कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया। दक्षिण भारतीय परिवेश में सैकड़ों शोधार्थियों को तैयार किया, जिन्होंने उनके कुशल मार्गदर्शन में उच्चस्तरीय साहित्यिक अनुसंधान और शोध कार्य पूर्ण किए।

रोजगारपरक हिंदी का विकास:

उन्होंने केवल हिंदी भाषा को सिखाने का ही कार्य नहीं किया, बल्कि युवाओं को इस योग्य बनाया कि वे हिंदी को अपनी आजीविका का माध्यम बना सकें। आज उनके द्वारा शिक्षित छात्र अनुवाद, शिक्षण, बैंक और शासकीय सेवाओं में प्रतिष्ठित पदों पर कार्यरत हैं।

सांस्कृतिक सेतु का निर्माण:

गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी और वहाँ की स्थानीय भाषाओं के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक सेतु का निर्माण करने में उनकी भूमिका अद्वितीय रही है।

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