केंद्रीय हिंदी संस्थान: तमिलनाडु के हिंदी प्रचारकों/अध्यापकों के लिए ऑनलाइन नवीकरण पाठ्यक्रम का उद्घाटन समारोह संपन्न

हैदराबाद: केंद्रीय हिंदी संस्थान हैदराबाद केंद्र में तमिलनाडु राज्य के तिरुनेलवेली एवं अन्य जिले के हिंदी प्रचारकों/अध्यापकों के लिए आयोजित 449वें ऑनलाइन नवीकरण पाठ्यक्रम का उद्घाटन समारोह गूगल मीट के माध्यम से सोमवार को संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो बीना शर्मा (निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा) ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रो एम ज्ञानम (पूर्व क्षेत्रीय निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान, मैसूर केंद्र) उपस्थित थे। डॉ गंगाधर वानोडे (क्षेत्रीय निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र) इस नवीकरण पाठ्यक्रम के संयोजक रहे हैं।

केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र द्वारा संस्थान गीत एवं स्वागत गीत सुनाया गया। इस अवसर डॉ गंगाधर वानोडे ने अतिथियों का स्वागत किया और परिचय दिया। साथ ही इस दौरान नवीकरण पाठ्यक्रम की रूपरेखा के बारे में बताया।

तिरुनेलवेली जिले की हिंदी प्राध्यापिका सुश्री करपाहम ने हिंदी के अध्यापन में आनेवाली समस्याओं को सामने रखते हुए निवेदन किया कि इस नवीकरण पाठ्यक्रम में व्याकरण, भाषा आदि में आने वाली समस्याओं का समाधान किया जाए। सुश्री मैथिली कार्तिक ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि तमिलनाडु में हिंदी पढ़ाते समय व्याकरण संबंधी समस्याएँ सामने आती हैं। हम व्याकरण में बहुत कुछ सीखना चाहते हैं।

प्रो बीना शर्मा ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि पहली बात आप अध्यापक हैं। दूसरा आप भाषा के अध्यापक हैं। तीसरा आप हिंदी के अध्यापक हैं। हिंदी के अध्यापक के रूप में आपको गौरवान्वित होना चाहिए कि आप देश का कार्य कर रहे हैं। अध्यापन क्षेत्र में जुड़े अध्यापकों से अपील है कि हिंदी शिक्षण केवल हिंदी पढ़ाना मात्र नहीं हैं। आप लाखों लोगों के बीच सेतु बनकर सबको जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। कक्षा में जाना एक शुरुआत है। इसके माध्यम से आप देश से जुड़ते हैं।

ईश्वर ने आपको अस्त्र-शस्त्र दिया है। उसका सही उपयोग करें। हिंदी के माध्यम से आप जन-जन तक पहुँचें। एक अच्छे अध्यापक का सबसे बड़ा गुण है सुनना। अपने छात्रों को ध्यान से सुनें कि वह क्या बोल/कह रहा है। आपको ऐसा अध्यापक बनना चाहिए जिससे कि छात्र आपको कक्षा में देख कर खुश हो जाएँ। आपकी कक्षा का इंतजार करें। पढ़ाना ईश्वर से प्राप्त वरदान है। आप अपने कार्य को गौरव के साथ करें। आप हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाएँ।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो एम ज्ञानम ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिंदी का काम देश का काम है। राष्ट्रपिता गांधी जी ने कई रचनात्मक कार्य किए। इनमें हिंदी के प्रचार-प्रसार का कार्य एक था। हिंदी सीखने से पूरे भारत के जन साधारण से जुड़ सकते हैं। हिंदी अध्यापक का कार्य मात्र रोजी रोटी कमाना नहीं है। आप महान कार्य में जुड़े हैं। जिस प्रकार फौजी सीमा पर तैनात होकर अपनी जान पर खेलकर हमें सुरक्षित रख रहे हैं।

उसी प्रकार आप भी देश को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। आपके छात्र जब दूसरे राज्यों में जाते हैं तो वहाँ हिंदी में बात करते हैं। हिंदी के प्रचार के माध्यम से आप देश को जोड़ रहे हैं। इस देश की सेवा में एक महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। इस बात को याद रखकर आप अपना कार्य ईमानदारी से करें। आप अपने छात्रों से हिंदी में बोलने का अभ्यास कराएँ। आप भी छात्रों से हमेशा हिंदी में ही बोलें।

डॉ गंगाधर वानोडे, प्रो एम ज्ञानम, डॉ रमेश कुमार, डॉ के श्याम सुंदर, डॉ सुरेश कुमार मिश्र आदि अध्यापकों ने अपना संक्षिप्त परिचय देते हुए बताया कि वे किस विषय पर चर्चा करेंगे। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ सुरेश कुमार मिश्र समन्वयक, एससीईआरटी द्वारा किया गया। केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र की सदस्य डॉ एस राधा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उद्घाटन कार्यक्रम के तुरंत बाद नियमित कक्षाएँ आरंभ हुईं।

क्षेत्रीय निदेशक डॉ गंगाधर वानोडे के नेतृत्व में यह ऑनलाइन नवीकरण पाठ्यक्रम दि. 27 जून से दि. 08 जुलाई तक 10 से दोपहर 1 बजे तक नियमित रूप से जारी रहेंगे। इस नवीकरण पाठ्यक्रम में कुल 52 प्रशिक्षणार्थियों ने पंजीकरण करवाया है। इनमें 47 महिलाएँ तथा 5 पुरुष हैं।

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