काव्य कौमुदी बहुभाषीय संस्था का मातृ दिवस के उपलक्ष्य में बहुभाषीय कवि सम्मेलन, ये हैं कवि और उनकी रचनाएं

हैदराबाद : काव्य कौमुदी बहुभाषीय संस्था के तत्वावधान में मातृ दिवस के उपलक्ष्य में 9 मई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय बहुभाषीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। दो चरणों में आयोजित इस कवि सम्मेलन में देश – विदेश के कवियों ने भारी संख्या में अपनी प्रतिभागिता प्रस्तुत की।

इस अवसर पर काव्य कौमुदी संस्था की अध्यक्ष डॉ कुमुद बाला ने बताया कि देश – विदेश में बसे कवियों ने अपने देश के टाइम जोन को ध्यान में रखकर इस कवि सम्मेलन से जुड़ने का प्रयास किया। हमें यह बताते हुए बहुत ही गर्व महसूस हो रहा है कि इस सम्मेलन में 50 से ज्यादा कवियों ने भाग लिया। मुख्य रूप से मीना चौहान – अमेरिका, जो मुख्य सलाहकार और हिन्दी, भोजपुरी की बहुभाषीय कवयित्री भी हैं, ने कहा कि विश्व की समस्त भाषाओं का सम्मान करना बहुत जरूरी है, भाषाएँ मनुष्य की अभिव्यक्ति एवं कविता दोनों को निखारती हैं। कल्चरल हेड और हिन्दी – इंग्लिश – बांग्ला – हैदराबाद, की बहुभाषीय कवयित्री मोऊ मल्लिक दे ने बताया कि विश्व की समस्त भाषाएँ एक सांस्कृतिक धरोहर हैं और इन्हें सुरक्षित रखने का प्रयास करना चाहिए।

कवि सम्मेलन में प्रथम चरण की मुख्य अतिथि और बहु भाषीय कवयित्री डॉ मंजुला अस्थाना महंती – भुवनेश्वर, उड़ीसा, थीं जो हिंदी, उड़िया और इंग्लिश तीनों भाषाओं की विद्वान हैं। विशिष्ट अतिथि के रूप में हैदराबाद की जानी मानी हिंदी – इंग्लिश – तेलुगु की बहु भाषीय कवयित्री डॉ श्रीसुधा कोलाचना उपस्थित थीं।

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द्वितीय चरण की मुख्य अतिथि एवं मलयालम – इंग्लिश की बहुभाषीय कवयित्री प्रोफ़ेसर डॉ मौली जोसेफ – केरलम से उपस्थित थीं। विशिष्ट अतिथि थे डोबोका, आसाम से, आसामी एवं अंग्रेजी के बहु भाषीय कवि डॉ हसीनस सुल्तान तथा केरलम से मलयालम एवं अंग्रेजी के बहु भाषीय कवि डॉ पी एल श्रीधरन पैराकोड।

सम्मेलन का शुभारंभ दोनों चरणों में कर्नाटक संगीत के जाने-माने कलाकार उदयश्री – हैदराबाद तथा शालिनी नंदकयोल्यार – कोलकाता के द्वारा गाये गए भजनों से हुआ। बहु भाषीय कवि सम्मेलन का कुशल संचालन, काव्य कौमुदी इंटरनेशनल मल्टीलिंगयुअल पोएट्स मीट की बहु भाषीय कवयित्री एवं अध्यक्ष डॉ कुमुद बाला ने किया। दोनों सत्रों में धन्यवाद ज्ञापन क्रमश: जयश्री एम चारी – चेन्नई तथा आसाम की स्नेहा गोयल ने किया।

इस कार्यक्रम के दोनों सत्र में 50 से ज्यादा कवियों ने भाग लिया। भाग लेने वाले कवियों में प्रमुख हैं – उदयश्री (तेलुगु) हैदराबाद, पुष्माओती सुबरून (इंग्लिश) मॉरीशस, गणेश चंद्र बिसोई (कोरापुटिया) ओडिशा, सीमा साहू (हिंदी) राँची-झारखंड, भार्गवी रघुराम (तेलुगु) हैदराबाद, जयश्री चारि (तमिल) चेन्नई, जयश्री रे (बांगला / इंग्लिश) दिल्ली, डॉ कृष्ण लाल बिश्नोई (हिंदी) बीकानेर, स्नेहा गोयल (इंग्लिश) आसाम, श्रीसुधा कोलाचना (तेलुगु / इंग्लिश), हयात अफ़्शां (उर्दू) मैसूर, बंदिता दास (इंग्लिश) आसाम, राजीव मूथेडथ (हिंदी) बैंगलोर, डॉ मंजुला अस्थाना महंती (हिंदी), पूर्णा पद्मजा (इंग्लिश), डॉ हसीनस सुल्तान (इंग्लिश) आसाम, डॉ श्रीधरन पाराकोड (इंग्लिश) केरल, बाला सरस्वती (इंग्लिश) कोच्चि-केरल, पृथ्वी सिंह बेनीवाल (हिंदी) हिसार-हरियाणा, डॉ मीनाक्षी बोराणा (राजस्थानी) जोधपुर-राजस्थान, रास्मिता बारिक (उड़िया) ओडिशा, मीना चौहान (हिंदी) अमेरिका, डॉ जोबा मुरमू (जमशेदपुर) झारखंड, अली शायदा (काश्मीरी) काश्मीर, शालिनी नंदकयोल्यार (हिंदी) कोलकाता, जाकिर मल्लिक (इंग्लिश) काश्मीर, डॉ टी श्रीलता (इंग्लिश) विजयवाड़ा-आंध्र प्रदेश, पृथ्वीसिंह बेनीवाल बिश्नोई (हिंदी) हरियाणा, अरुंधति मुखर्जी (इंग्लिश) कोलकाता, डॉ गरिमा रावत (हिंदी) राजस्थान, डॉ पारामिता मुखर्जी मल्लिक (इंग्लिश) मुंबई, डॉ मौली जोसेफ (इंग्लिश) केरलम, डॉ दिलीश एस (मलयालम) केरलम, उत्तीर्णा धर (हिंदी) कोलकाता, मोऊ मल्लिक दे (हिंदी) हैदराबाद और डॉ कुमुद बाला (हिंदी / इंग्लिश) हैदराबाद और अन्य शामिल हैं।

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