हैदराबाद : साहित्य, कला, संस्कृति, शिक्षा एवं समाज सेवा हेतु समर्पित अग्रणी राष्ट्रीय संस्था ‘सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था’, हैदराबाद, भारत द्वारा आयोजित 83 वीं मासिक गोष्ठी हर्षोल्लास पूर्वक सम्पन्न हुई। संस्थापिका सरिता सुराणा ने उपस्थित सभी सम्मानित सदस्यों और अतिथियों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया। रिमझिम झा ने स्वरचित सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की।
तत्पश्चात अध्यक्ष ने बताया कि हम हमारी मासिक गोष्ठी प्रायः दो सत्रों में आयोजित करते हैं। प्रथम सत्र में हम हमारे पूर्ववर्ती साहित्यकारों की जयन्ती, जो उस माह में आती है, उनके सम्बन्ध में परिचर्चा करते हैं और द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी आयोजित की जाती है। हम विगत 6 वर्षों से निरन्तर साहित्यिक गोष्ठियां एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। पिछले महीने हमने एक नया प्रयोग आरम्भ किया है। इसका उद्देश्य यह है कि हमारे पूर्ववर्ती साहित्यकारों को जानने के साथ-साथ हम हमारे समकालीन साहित्यकारों के लेखन और उनके रचनात्मक सहयोग के बारे में जान सकें।

इसकी पहली कड़ी में हमने वरिष्ठ रंगकर्मी और नाटककार सुहास भटनागर से उनकी साहित्यिक और रंगमंच की यात्रा के बारे में जाना। इस महीने हमने वरिष्ठ साहित्यकार एवं अनुवादक डॉ. सी. कामेश्वरी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। सरिता सुराणा ने उनका परिचय देते हुए कहा कि कामेश्वरी जी ने 33 वर्षों के अध्यापन काल में 26 वर्षों तक भारतीय विद्या भवन, भवंस विवेकानन्द कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं भाषा विभागाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। सम्प्रति वे केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, हैदराबाद के नवीकरण पाठ्यक्रम से जुड़ी हुई हैं और शिक्षकों को भाषा विज्ञान, देवनागरी लिपि एवं हिन्दी लिपि का मानकीकरण, व्याकरण और उसके विविध पक्ष आदि विषयों पर प्रशिक्षण देती हैं।
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परिचय के पश्चात् उन्होंने कामेश्वरी जी को अपने वक्तव्य हेतु मंच पर आमंत्रित किया। उन्होंने पीपीटी के माध्यम से अपनी शैक्षणिक एवं साहित्यिक गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इन सबके अलावा उन्हें कार्तिक पद्मावती देवी ब्रह्मोत्सव में तीन दिन आँखों देखा हाल सुनाने के लिए तिरुपति बालाजी देवस्थानम से निमंत्रण मिला। उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में अनेक प्रपत्र प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने कई पत्रिकाओं का संपादन किया है। वे बी. एम. शास्त्री मेमोरियल अवॉर्ड सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित की गई हैं। अनुवाद के क्षेत्र में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया है।
डॉ. भास्कर ने अपने उद्बोधन में कहा कि वे मूलतः महाराष्ट्र से हैं और अभी हैदराबाद में सेवारत हैं। कामेश्वरी जी केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के नवीकरण पाठ्यक्रम से जुड़ी हैं। उसके अलावा उनके कार्यों के बारे में आज विस्तार से जानकारी मिली। इसके लिए वे सूत्रधार संस्था को बधाई और साधुवाद देते हैं। दीपेश व्यास ने कहा कि वे केन्द्रीय हिन्दी संस्थान में कई वर्षों से कार्यरत हैं। जब वे कामेश्वरी जी के साथ काम के सिलसिले में बाहर जाते हैं तो उनका ममतामयी माता वाला रूप देखने को मिलता है।

द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी में भाग लेते हुए आईटी प्रोफेशनल एवं युवा कवयित्री श्रीया धपोला ने समसामयिक रचना का पाठ किया। वरिष्ठ कवयित्री किरन सिंह ने अपनी स्वास्थ्य सम्बन्धी वर्तमान चिन्ताओं को उजागर करते हुए अपने मनोभावों को अपनी रचना के माध्यम से प्रकट किया। वरिष्ठ गीतकार विनीता शर्मा ने अपनी रचना – मैं अमंगल का दीया हूँ, का शानदार वाचन किया। सी. कामेश्वरी ने मुहावरों पर आधारित रचना का पाठ किया। अंत में अध्यक्षीय काव्य पाठ करते हुए सरिता सुराणा ने सभी रचनाकारों की रचनाओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की और प्रथम सत्र के शानदार प्रदर्शन हेतु कामेश्वरी जी को बधाई दी। उन्होंने अपनी रचना – मुझे बेटी बनकर जीने दो, का पाठ किया। श्रीया धपोला के धन्यवाद ज्ञापन से गोष्ठी सम्पन्न हुई।
इस कार्यक्रम में केन्द्रीय हिन्दी संस्थान हैदराबाद के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. भास्कर ठुबे, अध्यापक दीपेश व्यास, वरिष्ठ प्राध्यापिका बी. नीरैमती, सेवानिवृत्त प्राध्यापिका डॉ. गीतांजलि, डॉ. एन राजशेखर, डॉ. वेंकटरमणा राव, तेलंगाना समाचार के संपादक के. राजन्ना ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति प्रदान की।
