हैदराबाद : कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के तत्वावधान में क्लब की 411वीं मासिक गोष्ठी का आयोजन प्रो. ऋषभदेव शर्मा की अध्यक्षता में ऑनलाइन संपन्न हुआ। प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए मीना मुथा (कार्यकारी अध्यक्षा) एवं प्रवीण प्रणव (महासचिव) ने बताया कि प्रथम सत्र का आरंभ सस्मिता नायक द्वारा सरस्वती वंदना की प्रस्तुति से हुआ।
मीना मुथा ने पटल पर उपस्थित साहित्यकारों एवं रचनाकारों का शब्द कुसुमों से स्वागत करते हुए कहा कि क्लब संस्थापिका डॉ अहिल्या मिश्र द्वारा रोपित यह अंकुर विगत 33 वर्षों से वटवृक्ष के रूप में साहित्य सेवा में समर्पण के साथ जुड़ा हुआ है। नवांकुरों के लिए मंच प्रदान करना और पठन-पाठन एवं साहित्यिक चर्चाओं में सहभागिता निभाना क्लब का उद्देश्य रहा है। आज की मुख्य वक्ता मोनिका भट्ट “कंटेंट से पहचान तक – डिजिटल युग में अभिव्यक्ती, प्रभाव और विश्वसनीयता” इस विषय पर अपनी बात रखेंगी और मुख्य वक्ता का परिचय एवं विषय प्रवेश संगोष्ठी सत्र संयोजक अवधेश कुमार सिन्हा करेंगे।
अवधेश कुमार सिन्हा ने मुख्य वक्ता का परिचय देते हुए कहा कि मोनिका भट्ट मास कम्युनिकेशन – शिक्षक, उद्यमी, कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता, मंच संचालक के साथ डिजिटल दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। विभिन्न महानुभावों के साक्षात्कार वे ले चुकी हैं। ऐसे व्यक्तित्व का आज हमारे बीच होना लाभदायक है।
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मोनिका ने अपने विचार रखते हुए कहा कि अपना कंटेंट अच्छा होना चाहिए और लोगों तक पहुँचना चाहिए। डिजिटल दुनियाँ में कंटेन्ट बहुत मायने रखता है। हमें ऐसी सामग्री को प्रोत्साहित नहीं करना है जो आने वाली पीढ़ी को गलत राह पर ले जाएं। विश्वसनीयता और मौलिकता को महत्व दिया जाए। फॉरवॉर्ड करने से पहले वीडियो में सत्यता कितनी है यह जाँच करो। हम कोई भी रील फॉरवर्ड कर देते हैं बिना सत्यता को जाँचे, यह कार्य असामाजिक तत्वों को प्रोत्साहित करता है। अच्छा साहित्य प्रचारित प्रसारित होना चाहिए। डिजिटल माध्यम एक माध्यम है प्रचार प्रसार का। सही तरीके से चलेंगे तो उससे आने वाली पीढ़ीयाँ लाभान्वित होगी।
अवधेशकुमार सिन्हा ने प्रश्न पूछा कि आजकाल सोशल मिडिया में बने रहना एक फैशन बन गया है। कमाई के लालच में संयम खोते जा रहे हैं। लोग कंटेट भेजते हैं, इसका दोहन और दुरुपयोग हो रहा है इससे कैसे बचा जाए? मोनिका भट्ट ने जवाब देते हुए कहा कि यूट्यूबर्स मोनीटाइज हो जाते हैं। अभिव्यक्ति दर्शकों को प्रभावित करती है परंतु भरोसा पहचान बनाती है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अभद्र शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। कंटेट क्रिएटर की जिम्मेदारी होती है कि वे गलत रास्ता न चुनें। शिल्पी भटनागर ने पूछा कि डिजिटल फूट प्रिंट कैसे कॅरियर को प्रभावित करता है। डॉ संगीता शर्मा एवं रवि वैद ने भी प्रश्न पूछे। मोनिका भट्ट ने सभी के शंकाओं का समाधान किया।
प्रो ऋषभ देव शर्मा ने अध्यक्षीय टीप्पणी में अपने विचार रखते हुए कहा कि आज का युग डिजिटल युग की चपेट में है। कंटेट अपनी पहुँच से पहचाना जाता है। इस बदलाव का उजला पक्ष भी है। अभिव्यक्ति का विकेंद्रीकरण अराजकता का खतरा लाता है। 2026 में भारत में खबरों पर भरोसा कम रह गया है। सर्वेक्षण पहुँच बढ़ी है परंतु भरोसा घटा है। मंच बड़े हैं और साख घटी है। सच जो चलाये वह चलेगा, संतुलित सच पीछे छूट जाता है। फॉलोअर्स खरीदे जा सकते हैं, भरोसा नहीं खरीदा जाता। कोई भी विडियो वायरल करने से पूर्व एक पल रुकना जरूरी है। डिजिटल साक्षरता जागरूक नागरिक की पहली शर्त है। अवधेश कुमार सिन्हा ने प्रथम सत्र का संचालन और शिल्पी भटनागर (सचिव) ने सत्र का आभार व्यक्त किया।
दूसरे सत्र में काव्यगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें चंद्रप्रकाश दायमा, विनोदगिरी अनोखा, रमा बहेड, इंदु सिंह, मोनिका भट्ट, निशि कुमारी, भगवती अग्रवाल, डॉ रक्षा मेहता, सुनीता लुल्ला, डॉ संगीता शर्मा, स्वाति बालूरकर, भगवती अग्रवाल, वर्षा शर्मा, रेखा अग्रवाल, अंशु श्री सक्सेना, आर्या झा, किरण सिंह, शिल्पी भटनागर, मीना मुथा, कृष्णा सिंह आदि ने काव्य पाठ किया। श्रुति कांत भारती, सुषमा त्रिपाठी, इंदुशेखर त्रिपाटी, भावना पुरोहित, रवि वैद, डॉ आशा मिश्र ‘मुक्ता’ की पटल पर उपस्थिति रही।
अध्यक्षीय टीप्पणी में प्रो ऋषभदेव शर्मा ने कहा कि पर्यावरण, हरियाली, बाल कविता, नवरात्री पर्व आदि विषयों पर रचनाएं पढ़ी गईं और कविताओं में विविधता रहीं। सभी को साधुवाद। उन्होंने अध्यक्षीय काव्यपाठ में “जिंदगी के नाद पर बजता हुआ अनुवाद है, कविता कहाँ अनुवाद है?” कविता पढ़ी जिसकी पंक्तियों ने सभी को भाव-विभोर कर दिया। विनोद गिरी अनोखा (सचिव) ने सत्र का धन्यवाद दिया। शिल्पी भटनागर ने तकनीकी जिम्मदारी का वहन किया। मीना मुथा ने सत्र का संचालन किया।
