मटन में दूसरे जानवरों का मांस मिलाकर बेचे जाने के आरोप, यह है पहचान करने की पद्धति

हाल ही में कुछ इलाकों में मटन में दूसरे जानवरों का मांस मिलाकर बेचे जाने के आरोप (मामले) सामने आ रहे हैं। ताजा हैदराबाद शहर में मटन में गाय (बैल) का मांस मिलाकर बड़े-बड़े होटलों को बेचे जाने की बात सामने आई है। इससे उपभोक्ताओं में चिंता पैदा हो गई है। खाद्य सुरक्षा पर संदेह जताए जाने के बीच, मटन में बीफ की मिलावट को कैसे पहचाना जाना चाहिए, यह जानना जरूरी है।

हालांकि कच्चे मांस को देखने पर कुछ लक्षणों से शक जताया जा सकता है। मटन आमतौर पर हल्के से मध्यम लाल रंग में होता है, जबकि बीफ अक्सर गहरे लाल रंग में दिख सकता है। मटन में चर्बी आमतौर पर सफेद और सख्त होती है। बीफ में चर्बी कभी-कभी क्रीम या हल्के पीले रंग में दिख सकती है। साथ ही बीफ में मांसपेशियों के रेशे बड़े होते हैं, जबकि मटन में पतले होने की संभावना है। मांस में हड्डियां हों तो कुछ हद तक पहचाना जा सकता है। बकरी की हड्डियां छोटी, पतली होती हैं, जबकि गाय (बैल) की हड्डियां बड़ी और मोटी होती हैं। हालांकि ये सब सामान्य लक्षण ही हैं।

जानवर की उम्र, मांस को स्टोर करने के तरीके जैसे कारणों से इन लक्षणों में बदलाव हो सकता है। विशेषज्ञों की राय है कि बिना हड्डी वाले मांस को सिर्फ आंखों से देखकर यह मटन है या बीफ, यह पक्के तौर पर तय करना मुमकिन नहीं है। सौ फीसदी पुष्टि के लिए प्रयोगशाला में डीएनए या अन्य वैज्ञानिक जांच करानी पड़ती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि उपभोक्ता हमेशा लाइसेंस वाले, भरोसेमंद मांस विक्रेताओं से ही खरीदारी करें। मिलावट पर शक हो तो संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से शिकायत करना बेहतर है।

Also Read-

ध्यान देनेवाली बात यह है कि रंग, चर्बी, गंध और मांसपेशियों की बनावट जैसे लक्षण केवल शुरुआती संकेत ही हैं। ये मिलावट की पुष्टि करने वाले सबूत नहीं हैं। पक्की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच ही मानक तरीका है। खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि पके हुए सालन में बीफ मिला है या नहीं, यह सिर्फ देखकर या चखकर पक्के तौर पर तय करना संभव नहीं है। कुछ मामलों में बीफ के टुकड़े मटन के मुकाबले बड़े, घने, सख्त लग सकते हैं। पकाने के बाद भी कुछ टुकड़ों को ज्यादा चबाना पड़ सकता है।

हालांकि जानवर की उम्र, मांस का हिस्सा, पकाने का समय जैसे कारणों से मटन भी ऐसे ही हो सकता है। पके हुए सालन में रंग, गंध, स्वाद के आधार पर फैसला लेना सही तरीका नहीं है। मसाले, तेल, पकाने के तरीके की वजह से ये लक्षण बदल जाते हैं। इसलिए पके हुए सालन में बीफ मिला है या नहीं, 100 प्रतिशत पुष्टि करने का भरोसेमंद तरीका सिर्फ प्रयोगशाला जांच ही है। डीएनए या अन्य वैज्ञानिक जांचों के जरिए यह साफ तौर पर तय किया जा सकता है कि यह किस जानवर का मांस है।

इसीलिए उपभोक्ताओं के लिए भरोसेमंद होटल, रेस्टोरेंट, लाइसेंस वाले मांस विक्रेताओं को ही चुनना बेहतर है। मिलावट पर मजबूत शक हो तो संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से शिकायत करके और जरूरत पड़ने पर नमूनों को जांच के लिए भेजा जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

Recent Comments

    Archives

    Categories

    Meta

    'तेलंगाना समाचार' में आपके विज्ञापन के लिए संपर्क करें

    X