हैदराबाद : स्वतंत्रता सेनानी पंडित गंगाराम स्मारक मंच ने 30 मई को पंडित नरेन्द्र भवन में हिन्दी पत्रकारिता दिवस और सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय भाषा विशेषज्ञ समिति, भूतपूर्व प्रोफेसर एवं प्रो उपकुलपति हैदराबाद विश्वविद्यालय डॉ डॉ आर एस सर्राजू और सम्मानीय अतिथि के रूप में हिन्दी विभाग अध्यक्ष विवेकानन्द शासकीय महाविद्यालय की प्रोफेसर डॉ अनुपमा ने भाग लिया।




पुरस्कार विजेताओं के रूप में ‘डेली हिन्दी मिलाप’ संपादक विपमा वीर और डॉ कमला गणोरकर उपस्थित रहे हैं। कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित किया। पंडित प्रियव्रत शास्त्री ने वेद मंत्रों द्वारा ईश्वर वन्दना की। मंच के अध्यक्ष भक्त राम ने मंच का विवरण प्रस्तुत किया। मंच के अध्यक्ष भक्त राम ने शॉल द्वारा, मंत्री श्रुतिकान्त भारती ने स्मृति चिह्न और कोषाध्यक्ष प्रदीपजाजू ने पुस्तक से अतिथियों का सम्मान किया।


प्रो आर एस सर्राजू ने हिंदी पत्रकारिता प्रकाशन के दो सौ वर्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान में हम डिजिटल युग में है। इसीलिए इस समय यह उत्सव मनाने का नहीं है, बल्कि गंभीर विचार करने का है। क्योंकि हिंदी पत्रकारिता इस समय अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। साथ ही उन्होंने पंडित गंगाराम जी सेवा, त्याग, संघर्ष और चिंतन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके विचार आज भी वर्तमान समाज के लिए प्रेरणादायक है।
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सम्मान प्राप्त ‘संध्या’ पुस्तक की लेखिका डॉ कमला गणोरकर इस समय 91 वर्ष के आयु में है, ने अपने साहित्यिक यात्रा को याद करते हुए भावुक हो गई। इस दौरान उन्होंने बीते पलों को याद किया और उभरते हुए लेखकों को संदेश दिया कि लेखन में प्रतिभा की जितनी आवश्यकता है, उतनी ही निरंतर अध्ययन, अनुशासन व मेहनत करने की भी जरूरत है। उन्होंने साहित्य पढ़ने की और लिखने की आवश्यकता को समझाया। उन्होंने ‘संध्या’ के लिखने की पृष्ठिभूमि को भी विस्तार से बताया।
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डेली मिलाप संपादक विपमा वीर ने कहा कि ‘मिलाप’ हर व्यक्ति के लिए प्रेम करने वाला समाचार पत्र बन गया है। इसके हर पन्ने पाठकों के दिलों को छू जाती है। इसीलिए हर भाषी मिलाप को पढ़ना चाहता है और पढ़ रहा ैह। उन्होंने आगे कहा कि युद्धवीर जी ने इसकी नींव रखी है। आज यह विशाल वृक्ष बन गया। हम इसके संरक्षण का दायित्व मात्र निभा रहे हैं।


डॉ अनुपमा ने हिंदी मिलाप की सेवा और पत्रकारिता में उसके योगदान के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। साथ ही पंडित गंगाराम जी वानप्रस्थी की सेवाओं और पत्रकारिता में उनके योगदान को याद किया।



इस कार्यक्रम में श्रीमती ममता जायस्वाल ने विपमा वीर का परिचय प्रस्तुत किया, जबकि श्रीमती वर्षा शर्मा ने डॉ कमला गणोरकर का परिचय दिया। श्रीमती सुधा ठाकुर ने डॉ कमला गणोरकर की पुरस्कृत पुस्तक ‘संध्या’ पर अपने विचार व्यक्त किये। श्रुतिकांत भारती ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। पंड़ित प्रियदत्त शास्त्री जी शांति पाठ किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती सुधा ठाकुर ने किया।



