हैदराबाद (सरिता सुराणा की रिपोर्ट) : सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, हैदराबाद, भारत की 77 वीं मासिक गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया। संस्थापिका सरिता सुराणा ने बताया कि यह गोष्ठी मई दिवस के संदर्भ में हमारे मजदूर भाई-बहनों को समर्पित थी। तृप्ति मिश्रा ने महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला द्वारा रचित सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की। तत्पश्चात् अध्यक्ष ने सभी सहभागियों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया।
प्रथम सत्र में चर्चा में भाग लेते हुए वरिष्ठ साहित्यकार अजय कुमार सिन्हा ने कहा कि ईश्वर का दूसरा नाम विश्वकर्मा है और मजदूर उनके प्रतिनिधि हैं। हमें उनकी सुख-सुविधाओं का ध्यान रखना चाहिए। दर्शन सिंह ने कहा कि मजदूर अदृश्य योद्धा हैं, शिल्पकार हैं, हमें उनके श्रम का सम्मान करना चाहिए। मैं जब भी दिहाड़ी मजदूरों को देखता हूं तो मन दुःखी हो जाता है। चंद्रप्रकाश दायमा ने कहा कि मजदूरों की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रही, वे छोटे से काम के लिए भी बहुत पैसे पूछ रहे हैं। सुहास भटनागर ने उनकी बात का समर्थन किया और कहा कि आजकल एक मिस्त्री दिन के 1500 रुपए लेता है। इस दृष्टि से उनकी स्थिति में सुधार हुआ है।
सरिता सुराणा ने कहा कि संगठित क्षेत्र के मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की स्थिति में बहुत अंतर है। आज भी ठेकेदार मजदूरों का शोषण करते हैं, उन्हें तय मजदूरी से कम पैसे देते हैं। उपस्थित सभी सदस्यों ने इस चर्चा को सार्थक और सारगर्भित बताया और अपनी तरफ से मजदूर भाई-बहनों का सम्मान और सहयोग करने का संकल्प लिया।
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द्वितीय सत्र में गोष्ठी में उपस्थित साहित्यकारों ने कविता, मुक्तक, लघुकथा और कहानी सभी विधाओं में अपनी-अपनी प्रस्तुतियां दीं। सिलीगुड़ी से बबीता अग्रवाल कंवल ने मजदूरों की समस्याओं से सम्बन्धित शानदार गजल प्रस्तुत की। कटक, उड़ीसा से रिमझिम झा ने लघुकथा का वाचन किया तो हैदराबाद से सुहास भटनागर ने हस्तिनापुर की कथा- गाँधारी पर अपनी लिखी स्क्रिप्ट का वाचन किया।
गोष्ठी में उपस्थित किरन सिंह ने मुक्तक के माध्यम से अपनी बात रखी तो अमिता श्रीवास्तव ने इसी विषय पर अपनी कविता का पाठ किया। अजय कुमार सिन्हा, आर्या झा, हर्षलता दुधोड़िया, वर्षा शर्मा, दर्शन सिंह और चंद्रप्रकाश दायमा ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सरिता सुराणा ने केदारनाथ अग्रवाल की कविता – वह जीवन की धूल चाटकर बड़ा हुआ है और एक स्वरचित रचना का पाठ किया और सभी सदस्यों की रचनाओं की सराहना की। के कुमार प्रसन्ना भी इस गोष्ठी में उपस्थित थे। बहुत ही उत्साहपूर्ण वातावरण में गोष्ठी सम्पन्न हुई। आर्या झा ने सभी का हार्दिक आभार व्यक्त किया।
