सूत्रधार: मातृ दिवस पर गीत और नृत्य का विशेष कार्यक्रम, इन बाल कलाकारों ने लगाये चार चांद

हैदराबाद (सरिता सुराणा की रिपोर्ट): सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, भारत (हैदराबाद) द्वारा ‘मदर्स डे’ के अवसर पर गीत और नृत्य पर आधारित एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम संगीत साधना संगीतालय, हैदराबाद के नन्हे-मुन्ने कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया। अध्यक्ष सरिता सुराणा ने सभी बाल कलाकारों और संगीतालय की संचालिका श्रीमती शुभ्रा मोहन्तो जी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया और मां की महिमा पर अपनी स्वरचित कविता से कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।

तत्पश्चात् सुश्री ध्रुवी ने- यशोमती मैया से बोले नंदलाला जैसा भावपूर्ण गीत प्रस्तुत करके दर्शकों को भावविभोर कर दिया। पूना से श्री नील बोगा ने- तू कितनी अच्छी है, कितनी भोली है, प्यारी-प्यारी है ओ मां गीत प्रस्तुत करके सबको भावुक कर दिया। सुश्री सानवी पोतदार ने- लुकाछिपी गीत और सुश्री दर्शनी बाबू ने- अंगुली पकड़ के गीत बहुत ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किए। कोलकाता से सुश्री अनुष्पा डे ने- ये तो सच है कि भगवान है जैसे मार्मिक और संवेदनशील गीत को अपनी बुलन्द आवाज में प्रस्तुत करके वातावरण को आनन्ददायक बना दिया। सुश्री आमोलिका डंग ने- मेरी प्यारी अम्मी जो है गीत पर बहुत ही शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। सुश्री तनिषा दास ने- गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयन्ती के बारे में बहुत ही अच्छी जानकारी दी और बाद में रवीन्द्र संगीत से ही एक बंगाली गीत प्रस्तुत किया। इतनी छोटी उम्र में उनका उच्चारण और प्रस्तुतिकरण सचमुच काबिल-ए-तारीफ था।

बाल कलाकार श्री स्कन्दन धन्वी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि सभी बाल कलाकार 5-8 वर्ष की उम्र के थे लेकिन कहते हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती तो बिल्कुल सही कहते हैं। सभी सहभागियों ने अपनी मां के सम्मान में एक से बढ़कर एक गीत और नृत्य प्रस्तुत करके दर्शकों से वाहवाही बटोरी। सरिता सुराणा ने सभी नन्हे-मुन्ने कलाकारों के उज्जवल भविष्य हेतु मंगल कामना की और उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद दिया।

साथ ही साथ शुभ्रा जी और सभी अभिभावकों का तथा दर्शकों का भी हार्दिक आभार व्यक्त किया। अन्त में शुभ्रा जी ने सभी बच्चों को शिक्षा देते हुए कहा कि मां से बढ़कर प्यार करने वाला संसार में कोई नहीं होता। हमेशा अपनी मां को सम्मान और प्यार देना, कभी भूलना नहीं। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से अपने विचारों को प्रकट किया और सूत्रधार साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था का सभी सहभागी बच्चों और उनकी माताओं का हार्दिक आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम बहुत ही सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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