हैदराबाद/नई दिल्ली: NEET पेपर लीक मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों के आंदोलन के समर्थन में 26 दिन तक आमरण अनशन करने वाले अधिकार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सनसनीखेज बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनशन खत्म करने के मामले में केंद्रीय मंत्रियों ने विश्वासघात किया है। अनशन खत्म करने की फोटो रिलीज न करने को कहा था, लेकिन उसे सोशल मीडिया पर रिलीज कर दिया गया।
वांगचुक ने ये बातें India Today के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को दिए इंटरव्यू में कहीं। उन्होंने आगे कहा कि आधी रात को आमरण अनशन खत्म करने से संबंधित फोटो रिलीज न करने का अनुरोध किया था। इसके लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने वादा किया था। वो विपक्ष के नेताओं और छात्रों की मौजूदगी में अनशन खत्म करना चाहते थे। इस पर उन्होंने दुख जताया कि तब तक फोटो रिलीज न करने की उनकी मांग मानने वाले मंत्रियों ने वादा तोड़ा और फोटो रिलीज कर दीं।

प्रदर्शनकारियों की मांगें मानने के बाद अनशन खत्म करवाने के लिए सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा जूस या सूप देना लद्दाख में एक परंपरा है। लेकिन इसे सिर्फ सत्ताधारी पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए पेश किया गया। फोटो रिलीज करने की बात मंत्रियों ने कही थी और इसके गवाह सीनियर इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी भी थे। “आप ही इस समझौते के गवाह हैं। सभी पार्टियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मैं इसे आधिकारिक रूप से घोषित करने तक मीडिया को कोई भी तस्वीर रिलीज नहीं की जानी चाहिए” – ये बात उन्होंने IB अधिकारियों से कही। वांगचुक ने कहा कि उन्होंने इसके लिए हामी भरी और वादा भी किया। लेकिन कुछ ही मिनटों के अंतराल में समझौते का उल्लंघन कर दिया गया।
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अनशन के मामले में केंद्र के साथ समझौता करने के आरोपों को उन्होंने खारिज किया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा समझौता किया होता तो 26 दिन तक अनशन करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। समझौता करना होता तो मेरे पास कई मौके थे । NEET मुद्दे पर अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाली (CJP) द्वारा किए गए विरोध में वांगचुक ने हिस्सा लिया। उन्होंने 28 जून को दिल्ली के जंतर मंतर पर अपना आमरण अनशन शुरू किया। स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण 18 जुलाई को पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ले जाया। अपनी इच्छा के खिलाफ ले जाए जाने का आरोप लगाते हुए छात्रों ने इसका विरोध किया।
