आर्य समाज के विवाह प्रमाणपत्र को मान्यता नहीं देना घोर अन्याय है : भक्तराम

[नोट- आर्य समाज के विवाह प्रमाणपत्र को मान्यता नहीं देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हमने पाठकों से उनकी राय मांगी थी। साथ ही कहा था कि पाठकों के विचारों को तेलंगाना समाचार में प्रकाशित करेंगे। इसी के अंतर्गत भक्तराम जी की पहली प्रतिक्रिया छाप रहे हैं।]

आर्य समाज मंदिर में विवाह विधि से की जाती है। सभी हिन्दू समाज को इसका लाभ होता है। आज लाखों दंपत्ति सफल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। एक और कारण- आर्य समाज की ओर से किये जाने वाले विवाह में गरीब से गरीब व्यक्ति इसका लाभ उठाता है। आर्य समाज में आदर्श विवाह किया जाता है।

आर्य समाज के विवाह प्रमाणपत्र को उच्चतम न्यायालय मान्यता नहीं देना घोर अन्याय है। हां, आर्य समाज की ओर से की जाने वाली शादी में कमी या त्रुटि हुई है तो उसको सुधारने का आदेश/निर्देश दिया जा सकता है। लेकिन कैसे समाधान निकले उसकी ओर ध्यान नहीं देना ठीक नहीं है।

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इस फैसले से लाखों दंपतियों को न्याय से वंचित करना है। आशा है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के विरुद्ध आर्य समाज की संस्था आगे आये। आर्य समाज को न्याय दिलाने हेतु आवेदन करें और समाज द्वारा लाखों दंपतियों को विवाह बन्धन से वंचित होने से बचाए।

लेखक – भक्तराम

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