हैदराबाद : केंद्र सरकार ने UPI पेमेंट पर नए चार्ज का ऐलान किया है। 2 हजार रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर हर 100 रुपये पर 40 पैसे वसूले जाएंगे। सरकार कह रही है कि ये चार्ज व्यापारियों से वसूलेंगे, लेकिन ग्राहक से वसूलना है या नहीं, ये संबंधित पेमेंट कंपनियों और बैंकों की पॉलिसी पर निर्भर करता है, इसलिए UPI पेमेंट पर नए चार्ज का बोझ सीधे जनता पर पड़ने की संभावना है, इसे लेकर बड़े पैमाने पर चिंता जताई जा रही है।

15 सितंबर को हुई UPI स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में 2 हजार रुपये से ज्यादा के लेन-देन के लिए UPI MDR को 40 बेसिस पॉइंट्स तय करने के बाद UPI ऐप के जरिए बड़ी रकम का भुगतान करने वाली जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की चर्चा शुरू हो गई है। यह MDR आमतौर पर व्यापारी से वसूला जाने वाला कमीशन है, लेकिन ग्राहक से सीधे वसूलना है या नहीं, ये संबंधित पेमेंट कंपनियों और बैंकों की नीतियों पर निर्भर करता है।
40 BPS का मतलब है हर 100 रुपये पर 40 पैसे। उदाहरण के लिए 2,500 रुपये के भुगतान पर MDR 10 रुपये, 5,000 रुपये पर 20 रुपये, 10,000 रुपये पर 40 रुपये, 25,000 रुपये पर 100 रुपये होगा। अगर ये चार्ज पूरी तरह से यूजर पर ही डाल दिया जाता है, तो बड़ी रकम का डिजिटल भुगतान करने वालों का खर्च बढ़ जाएगा।
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सरकार कह रही है कि वहीं, 2 हजार रुपये तक के UPI भुगतान पर कोई चार्ज नहीं होगा। कहा जा रहा है कि इससे रोजमर्रा के छोटे भुगतान करने वाली जनता पर सीधा असर कम ही रहेगा। लेकिन 2 हजार से ज्यादा की शॉपिंग, बिल, फीस, सेवाओं के भुगतान के समय अतिरिक्त चार्ज लगाया गया तो यूजर्स पर बड़े पैमाने पर बोझ पड़ने की संभावना है।
फिलहाल फोनपे, गूगलपे, पेटीएम जैसे UPI ऐप बैंकों के साथ मिलकर सेवाएं दे रहे हैं। लगभग 40 बेसिस पॉइंट MDR से इस इकोसिस्टम को सालाना 16 हजार करोड़ रुपये तक की आय होगी। MDR से आने वाली आय NPCI, बैंकों, PSPs, पेमेंट एग्रीगेटर्स में बंटेगी। इस क्रम में 40 BPS MDR को व्यापारी सहेंगे या आखिर में यूजर पर चार्ज के रूप में पड़ेगा, ये UPI यूजर्स पर असर तय करेगा।
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नोट: सरकार के 15 सितंबर के नोटिफिकेशन के अनुसार:
2000 रुपये तक का UPI पेमेंट पूरी तरह फ्री है – कोई चार्ज नहीं।
Person-to-Person (दोस्त/परिवार को भेजना) – कितनी भी रकम हो, फ्री है।
2000 रुपये से ऊपर के बड़े व्यापारियों के लिए MDR 0.4% (40 पैसे प्रति 100 रु) तय किया गया है, जो अधिकतम 300 रुपये तक होगा। छोटे दुकानदारों (1 लाख/महीना तक) पर ये भी नहीं लगेगा।

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