नवाचार, जिज्ञासा और उत्कृष्टता के प्रति सतत प्रयास ही भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे : डॉ. अनुपम शर्मा
हैदराबाद : विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नई पीढ़ी को कठिन परिश्रम के साथ-साथ बुद्धिमत्तापूर्ण एवं नवाचारी सोच के साथ कार्य करना होगा। नवाचार, जिज्ञासा और उत्कृष्टता के प्रति सतत प्रयास ही भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये उद्गार थे मिधानि द्वारा आयोजित एक दिवसीय राजभाषा तकनीकी संगोष्ठी के मुख्य अतिथि, डीआरडीओ की प्रयोगशाला के विशेष परियोजनाएं निदेशालय के निदेशक एवं विशिष्ट वैज्ञानिक डॉ. अनुपम शर्मा के। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी वर्तमान उपलब्धियों से संतुष्ट होकर न रुकें, बल्कि अपने-अपने क्षेत्र में निरंतर नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि शोध एक सतत प्रक्रिया है, जिसे किसी एक उपलब्धि या चरण पर नहीं रोका जा सकता। विकसित भारत के निर्माण के लिए रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सभी आवश्यक क्षेत्रों में निरंतर और उद्देश्यपूर्ण अनुसंधान किया जाना चाहिए।

रक्षा मंत्रालय के अधीन भारत सरकार के उपक्रम मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानि) में संस्थापक अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. आर. वी. ताम्हणकर की 109वीं जयंती के अवसर पर ‘विकसित भारत @2047 में उपक्रमों की भूमिका’ विषय पर एक दिवसीय राजभाषा तकनीकी संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. आर. वी. तम्हणकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके उपरांत दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदे मातरम् के साथ संगोष्ठी का उद्घाटन हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता उद्यम की निदेशक (वित्त) के. मधुबाला ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि विकसित भारत @2047 हम सभी का साझा संकल्प है तथा सार्वजनिक उपक्रम गुणवत्ता, पारदर्शिता और नवाचार को अपनाते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की संगोष्ठियां विभिन्न संस्थानों के मध्य ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान का सशक्त मंच सिद्ध होंगी।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में हिंदी शिक्षण योजना, हैदराबाद की सहायक निदेशक एवं प्रभारी डॉ सीमा कुमारी और डॉ. रविचंद्र, सहायक निदेशक, हिंदी शिक्षण योजना, हैदराबाद ने सम्माननीय अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज की। पीपीटी प्रस्तुतीकरण के प्रथम सत्र की अध्यक्षता भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन-राजभाषा) होमनिधि शर्मा और उप अध्यक्षता मिधानि के अपर महाप्रबंधक (टाइटेनियम, आईसीपी तथा ईबीएम) निशांक कुमार जैन ने की, जबकि द्वितीय सत्र के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की भूमिका क्रमशः डॉ सीमा कुमारी और उद्यम के अपर महाप्रबंधक (भंडार) प्रवीण एस वारद ने निभाई। संगोष्ठी में टोलिक (उ) के सदस्य कार्यालयों, डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं, सार्वजनिक उपक्रमों, इंजीनियरिंग एवं डिग्री महाविद्यालयों तथा मिधानि के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। दो सत्रों में चले इस राजभाषा तकनीकी संगोष्ठी में कुल 20 तकनीकी आलेख पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत किए गए।

डॉ सीमा कुमारी ने अपने संबोधन में विकसित भारत @2047 के निर्माण में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने आगे कहा कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान के प्रसार, नवाचार तथा राष्ट्रीय विकास का एक सशक्त साधन है। हिंदी शिक्षण योजना, हैदराबाद के सहायक निदेशक डॉ. रवि चंद्रा राव ने विकसित भारत @2047 के व्यापक दृष्टिकोण एवं उसके विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी से लेकर कॉर्पोरेट जगत तक प्रत्येक नागरिक अपनी श्रेष्ठ क्षमता का योगदान दे, तो भारत @2047 तक विश्व गुरु की उपाधि को सार्थक करके विश्व के सभी देशों में गौरवशाली स्थान प्राप्त कर सकेगा।
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प्रथम सत्र की अध्यक्षता कर रहे भारत डॉयनेमिक्स लिमिटेड के उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन-राजभाषा) होमनिधि शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि संगोष्ठी ने सभी प्रतिभागियों को ‘विचार हेतु एक नई दिशा’ प्रदान की है। विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से यह जानने का अवसर मिला कि नई पीढ़ी विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किस प्रकार की योजनाओं एवं नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे संवाद राष्ट्र निर्माण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

द्वितीय सत्र की उपाध्यक्षयता कर रहे प्रवीण एस. वारद ने कहा कि संगोष्ठी में प्रस्तुत सभी शोधपत्र एवं प्रस्तुतियां उत्कृष्ट, सुव्यवस्थित और तथ्यपरक थीं। विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों, डीआरडीओ प्रयोगशालाओं, शैक्षणिक संस्थानों तथा मिधानि द्वारा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु किए जा रहे प्रयासों एवं भावी योजनाओं का विस्तृत एवं प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया गया। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग एवं ज्ञान-साझाकरण को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
संगोष्ठी में विकसित भारत @2047 के केंद्रीय विषय से संबंधित भगवान सिंह मीणा (मिधानि) ने आर्मर उत्पादन, डॉ सौरभ दीक्षित (मिधानि) ने पदार्थों के विकास व महत्व, टी सुरेश बाबू ने ईसीजीसी का परिचय, जयंत कुमार ने एफसीआई की भूमिका, मनोज कुमार (एएसएल) ने रक्षा व रणनीति क्षेत्र में डीआरडीओ व मिधानि की भूमिका, पीडी रम्या तेजा और अभिनव विश्वास ने ईसीआईल की भूमिका, कृतिका व लता सिरवी ने भवन्स विवेकानंद कॉलेज की भूमिका, विमल कुमार जैन ने विकसित भारत की संकल्पना और आरसीआई, सिरसागर श्रीनंदिनी ने विवेक वर्धिनी की भूमिका, सिरिषा बैली ने बीएचईएल (आर एंड डी) का परिचय, अभिषेक कुमार चौबे ने बीएचईएल आरसी पुरम की परियोजनाएँ व ऊर्जा की भूमिका, मनीष कुमार नामलवार (आरसीआई) ने उपक्रमों का तुलनात्मक अध्ययन, हिमांशु गौतम ने बीईएल की भूमिका, एस आरूष (सेंट जोसेफ डिग्री कॉलेज) ने विकसित भारत के लिए मानसिक स्वास्थ्य की आवश्यकता, डॉ. पापिया बिसवास (एआरसीआई) ने सामरिक अनुप्रयोगों हेतु स्वदेशी निम्न तापिय प्रसार ग्लास सिरेमिक का विकास, डॉ. अर्चना झा (सेंट एन्स कॉलेज फॉर वुमेन) ने शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान की आवश्यकता, ऋषभ भंगे (एससीआई) ने स्मार्ट पॉली पैलेट प्रणाली, मो. ताबिश ने बीडीएल का सामरिक योगदान, भवनीश कुमार सिंह (मिधानि) ने स्टील की गुणवत्ता व उसके अनुप्रयोग और प्रतीक शर्मा ने विकसित भारत के लिए उपक्रमों की भूमिका विषय पर शोधपूर्ण आलेख पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत किए। इन शोधपत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वदेशी प्रौद्योगिकी, आत्मनिर्भर विनिर्माण, साइबर सुरक्षा, कौशल विकास, सतत विकास तथा अनुसंधान एवं नवाचार जैसे विषयों पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम के आरंभ में शुभदीप घोष, अपर महाप्रबंधक (प्रभारी, क्रय विभाग), मिधानि ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत स्वागत किया। अवसर पर के. आनंद कुमार, महाप्रबंधक (उत्पदान), ए. रविचंद्रन, महाप्रबंधक (मेल्ट्स), एपी राव, महाप्रबंधक (वित्त), मानव संसाधन विभाग के प्रभारी हरिकृष्ण वी. और एपी रमेश, अमप्र (मासंसा) (प्रभारी, सुरक्षा, ईएमएस तथा टी एवं डी) भी उपस्थित थे। अंत में सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों को स्मृति-चिह्न एवं सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। संगोष्ठी का संचालन मिधानि के प्रबंधक (हिंदी अनुभाग एवं निगम संचार) डॉ. बी. बालाजी ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में उद्यम के हिंदी अनुवादक डॉ. विकास कुमार आजाद तथा कर्मी जयपाल, प्रेम और नरेंद्र गांधी का सक्रिया योगदान रहा। संगोष्ठी का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।
