हैदराबाद : रक्षा मंत्रालय के अधीन मिनीरत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानि) द्वारा केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के निर्देशों के अनुसार 26 अक्तूबर से 1 नवंबर तक “सत्यनिष्ठा से समृद्धि” विषय पर सतर्कता जागरूकता सप्ताह–2026 को भव्य रूप से मनाया।

सतर्कता जागरूकता सप्ताह–2026 का शुभारंभ 26 अक्तूबर को मिधानि के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. एस.वी.एस. नारायण मूर्ति द्वारा सत्यनिष्ठा की शपथ दिलाए जाने के साथ हुआ। उद्घाटन कार्यक्रम में श्रीमती के. मधुबाला, निदेशक (वित्त), पडवित्तन बाबू, निदेशक (उत्पादन एवं विपणन), श्रीमती स्पूर्ति रेड्डी, आई.आर.एस., मुख्य सतर्कता अधिकारी तथा मिधानि के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।
सप्ताह के दौरान कर्मचारियों के लिए इस वर्ष के विषय अर्थात् “सत्यनिष्ठा से समृद्धि” पर आधारित अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। विभिन्न प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएँ ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की गईं। सीवीसी के निर्देशों के अनुरूप वेंडर मीट, ग्राहक शिकायत निवारण सत्र (ऑनलाइन), मिधानि के हैदराबाद संयंत्र एवं रोहतक संयंत्र के आसपास 4 किमी की वॉकथॉन तथा तेलंगाना के मोइनाबाद स्थित कनकमामिडी गाँव में ग्राम सभा आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के हितधारकों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ने हेतु प्रोत्साहित करना था।
मिधानि के सतर्कता विभाग के अनुरोध पर, सप्ताह के दौरान आउटरीच गतिविधियों के अंतर्गत मिधानि टाउनशिप स्थित बीपीडीएवी स्कूल के प्रबंधन द्वारा विद्यार्थियों के लिए पोस्टर बनाना, भाषण, एथिक्स ओलंपियाड एवं नारा लेखन प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की गईं।
5 नवंबर को सप्ताह का समापन समारोह के आयोजित किया गया। समापन समारोह की मुख्य अतिथि प्रोफेसर शांता सिन्हा थीं। कार्यक्रम में श्रीमती के. मधुबाला, निदेशक (वित्त), श्रीमती स्फूर्ति रेड्डी, आई.आर.एस., मुख्य सतर्कता अधिकारी तथा मिधानि के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
मिधानी की मुख्य सतर्कता अधिकारी श्रीमती स्पूर्ति रेड्डी, आई.आर.एस. ने संगठन में सतर्कता के कार्यक्षेत्रों पर बल दिया और कहा कि इसका स्वरूप समय के साथ विकसित हुआ है तथा प्राथमिकताएँ “दंडात्मक सतर्कता” से “निवारक सतर्कता” की ओर स्थानांतरित हुई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में माननीय सीवीसी द्वारा “सहभागितात्मक सतर्कता” एवं “पूर्वानुमानात्मक सतर्कता” की अवधारणाओं तक और विस्तारित किया जा रहा है।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर शांता सिन्हा ने उपस्थित कर्मचारियों और बीपीडीएवी के छात्रों को संबोधित किया। विषय से संबंधित अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने कहा कि “नैतिक मानदंड मूलतः व्यक्तिपरक होते हैं, जिनका उल्लंघन प्रतिकूल शारीरिक तनाव उत्पन्न कर सकता है।” उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जो अधिकारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए पहले से वेतन प्राप्त कर रहे हैं, उनके द्वारा रिश्वत लेना एक संस्थागत अन्याय है, जो कोशिकीय स्तर तक चुभता है और जनमानस का मनोबल तीव्रता से गिरा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि मनुष्य के रूप में हमें आशावादी दृष्टिकोण बनाए रखना चाहिए, क्योंकि हमारा राष्ट्र मज़बूत नैतिक मानदंडों में गहराई से प्रतिष्ठित और संचालित है। इसके अतिरिक्त उन्होंने देश की रक्षा एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में निःशब्द और अथक परिश्रम करने के लिए मिधानि की सराहना की।
अवसर पर सतर्कता की गृह पत्रिका “जागृति” का विमोचन किया गया और सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए। सत्र का समापन मिधानि के उन सभी कर्मचारियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने भारत को भ्रष्टाचार-मुक्त, विकसित एवं समृद्ध राष्ट्र बनाने के इस कार्यक्रम के लक्ष्य को सफल बनाने में पूर्ण निष्ठा से योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई।
