बीकानेर (राजस्थान) : अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के आचार्यश्री रामलालजी महाराज एवं बहुश्रुत उपाध्याय प्रवर श्री राजेशमुनिजी के शुभाशीर्वाद व सान्निध्य में जैन साहित्य संगम का तीन दिवसीय तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन आदिनाथ भवन, बीकानेर में आयोजित हुआ। अधिवेशन का शुभारंभ पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया के मुख्य आतिथ्य में हुआ। देश भर से आए कवि-साहित्यकारों, विद्वानों एवं जैन समाज के गणमान्य जनों ने इसमें सहभागिता की।
उद्घाटन समारोह में राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि कवि और साहित्यकार जैन दर्शन, भगवान महावीर के सिद्धांतों तथा पाँच महाव्रतों को सरल भाषा में युवा पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास करें। उन्होंने नशामुक्ति, अहिंसा, अपरिग्रह, क्षमापना और सामाजिक सद्भाव जैसे विषयों पर प्रभावी साहित्य सृजन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन केवल जैन समाज तक सीमित नहीं, बल्कि जीवमात्र के कल्याण का संदेश देता है।

इस अवसर पर स्मरणिका-2025 तथा काव्य-संकलन ‘अनुभूतियों का आकाश’ का विमोचन किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि विजय सिंह नाहटा को साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘पारदर्शी पुरस्कार-2026’ से सम्मानित किया गया। अधिवेशन में ‘कर्म—जैसा बोओगे, वैसा काटोगे’ विषय पर कविता प्रतियोगिता आयोजित हुई, जिसमें प्रथम स्थान वीना नाहर-ब्यावर, द्वितीय सुधा जैन चौधरी-विदिशा तथा तृतीय स्थान विमल भंडारी-भोपाल ने प्राप्त किया। विजेताओं को क्रमशः 5100, 3100 एवं 2100 रुपये के पुरस्कार प्रदान किए गए।
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अधिवेशन के दौरान विद्वद् संगोष्ठी, जैन संस्कृति आधारित जादू प्रस्तुति, दो विराट कवि सम्मेलन तथा महिला सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। विभिन्न प्रदेशों से आए कवि-साहित्यकारों ने कविता, गीत एवं ग़ज़ल के माध्यम से सामाजिक सरोकार, पर्यावरण, संस्कार, नशामुक्ति, अहिंसा और जैन दर्शन के संदेश प्रस्तुत किए। महिला सांस्कृतिक कार्यक्रछम में ‘सामायिक क्या है?’ विषय पर हर्षलता दुधोड़िया एवं खुशबू जैन द्वारा प्रस्तुत नाटिका सहित विभिन्न प्रेरक प्रस्तुतियों ने दर्शकों की सराहना प्राप्त की।
उपाध्याय प्रवर श्री राजेशमुनिजी ने कवि-साहित्यकारों को श्रेष्ठ, उपयोगी एवं नैतिक मूल्यों से युक्त साहित्य सृजन की प्रेरणा दी। उन्होंने लेखन में नैतिक शुद्धाचरण और समाजोपयोगिता को महत्वपूर्ण बताया। अधिवेशन में अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ एवं साधुमार्गी जैन सेवा समिति द्वारा प्रतिभागियों का आत्मीय आतिथ्य किया गया। देशभर से आए कवि-साहित्यकारों एवं अतिथियों के सम्मान के साथ अधिवेशन का समापन हुआ।
जैन साहित्य संगम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीप जैन ‘हर्षदर्शी’ ने बताया कि संस्था जिनवाणी, जैन दर्शन एवं साहित्य को कविता और रचनात्मक लेखन के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने तथा सामाजिक जागरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र कांठेड़ ने आभार व्यक्त किया तथा राष्ट्रीय संयोजक अशोक नागौरी ने कार्यक्रम का संचालन किया।

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