‘फिरे आसा’ : मृत्युदंड प्राप्त बंदी की आपबीती के बांग्ला अनुवाद का होगा भव्य विमोचन, पढ़ें कार्यक्रम का संपूर्ण विवरण

वाराणसी : मृत्युदंड प्राप्त एक व्यक्ति के जीवन, संघर्ष, जीने की अदम्य इच्छा और समाज में वापस लौटने की मर्मस्पर्शी कहानी को बयां करती पुस्तक ‘फिरे आसा’ (वापसी) मूल हिंदी ग्रंथ का बांग्ला अनुवाद का औपचारिक विमोचन आगामी 4 सितंबर जन्माष्टमी के श्री श्री राधाकृष्ण मंदिर (सोनारपुरा, वाराणसी) में रात 8 बजे किया जाएगा।

‘चारुपाठ प्रकाशनी, वाराणसी’ के तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामय समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में रमेश तिवारी, कोन्नू गुरु (महंत श्री श्री राधा कृष्ण मंदिर) होंगे। साथ ही विशेष वक्ता के रूप में जयदेव दास (कर्णधार, चारुपाठ प्रकाशनी) भाग लेंगे और आगत अतिथियों एवं दर्शकों का स्वागत करेंगे। साथ ही इस पुस्तक के प्रकाशन के उद्देश्य एवं महत्व पर संक्षिप्त प्रकाश डालेंगे।

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राध कृष्णा मंदिर, वाराणसी

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कार्यक्रम के आयोजकों ने आपकी सस्नेह उपस्थिति देकर इस विमोचन समारोह को गरिमा प्रदान करने के लिए आप सभी को सादर आमंत्रित किया हैं। गौरतलब है कि मूल रचना ‘फांसी’ के लेखक के. राजन्ना है। इस पुस्तक का बांग्ला अनुवाद बांग्ला अनुवाद डॉ. सुपर्णा मुखर्जी ने किया है।

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