चारुपाठ प्रकाशन की एक और पहल, मृत्यु के निकट पहुंचे के. राजन्ना की आत्मकथा अब बांग्ला में- ‘फिरे आसा’, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन होगी प्रकाशित

दक्षिण भारत की तेलुगु भाषा में प्रकाशित एक पत्रकार की आत्मकथा अब बांग्ला पाठकों तक पहुँचने जा रही है। लेखक और पत्रकार के. राजन्ना की आत्मकथा का बांग्ला अनुवाद अध्यापिका डॉ. सुपर्णा मुखर्जी ने मूल हिंदी भाषा से किया है। बांग्ला संस्करण का नाम ‘फिरे आसा’ (वापस लौटना) है। वाराणसी स्थित चारुपाठ प्रकाशन इस पुस्तक को आगामी 4 सितंबर 2026, जन्माष्टमी के दिन प्रकाशित करने जा रहा है।

के. राजन्ना ने अपना पूरा जीवन पत्रकारिता को समर्पित किया है और आज भी पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं। उनकी आत्मकथा व्यक्तिगत जीवन की घटनाओं का मात्र विवरण नहीं है। इसमें कारावास, मृत्यु के निकट पहुँचने और जीवन में फिर लौटने के अनुभवों के साथ उस संघर्ष की कहानी सामने आती है, जिसे एक व्यक्ति अपने सबसे कठिन समय में झेलता है। पुस्तक पर प्रकाशित एक हालिया समीक्षा भी इसे व्यक्तिगत पीड़ा, संघर्ष और पुनरारंभ की एक सशक्त आत्मकथात्मक यात्रा के रूप में देखती है।

चारुपाठ प्रकाशन के प्रकाशक जयदेव दास के लिए इस पुस्तक का महत्व केवल इतना नहीं है कि एक तेलुगु आत्मकथा का बांग्ला में अनुवाद हो रहा है। पुस्तक के केंद्र में एक ऐसा जीवन है जो मृत्यु और कारावास की सीमा तक पहुँचकर भी वापस लौटता है। प्रकाशक के अनुसार, आज भी समाज के हाशिए और कोने में खड़े लोगों का जीवन संघर्षों से भरा है—और यही इस पुस्तक को प्रासंगिक बनाता है।

भारत के दक्षिणी हिस्से के साहित्य, समाज और वहाँ के आम लोगों के जीवन पर हिंदी और बांग्ला में अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है। दक्षिण भारतीय समाज के प्रति जिज्ञासा अवश्य है, लेकिन भाषाई दूरी के कारण वहाँ के जीवन के अनेक अनुभव उत्तर और पूर्व भारत के पाठकों तक नहीं पहुँच पाते। चारुपाठ प्रकाशन का मानना है कि मूल भाषा से किया गया ऐसा अनुवाद इस दूरी को कम करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

‘चारुपाठ प्रकाशन के प्रकाशक जयदेव दास’ इसी प्रयास का हिस्सा है—तेलुगु समाज के एक व्यक्ति के जीवन-अनुभव को सीधे बांग्ला पाठक तक पहुँचाने का प्रयास। पुस्तक का बांग्ला अनुवाद डॉ. सुपर्णा मुखर्जी ने मूल हिंदी से किया है। पुस्तक का मूल्य 300 रुपये रखा गया है। जन्माष्टमी के दिन वाराणसी से इसका प्रकाशन केवल एक नई पुस्तक का आगमन नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं के बीच संवाद की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण पहल भी है।

चारुपाठ प्रकाशन
Mail: charupath.publication@gmail.com
mobile number – 8777624118

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