हैदराबाद : साहित्य सेवा समिति की 138वीं मासिक गोष्ठी का भव्य आयोजन 2 अगस्त को समिति के अध्यक्ष डॉ दया कृष्ण गोयल और महामंत्री ममता जायसवाल के सानिध्य में किया गया। यह गोष्ठी दो सत्रों में आयोजित की गई। प्रथम सत्र में हाल ही में दिल्ली के जंतर मंतर पर चले एक बड़े आंदोलन ‘वर्तमान शिक्षा प्रणाली में पेपर लीक का विद्यार्थियों व अभिभावकों पर प्रभाव’ पर विषय पर चर्चा की गई। द्वितीय सत्र में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
प्रथम सत्र के प्रारंभ में श्रीमती नीमा रवि ने मां सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। इसके बाद गोयल ने स्वागत भाषण में प्रस्तुत विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा शिक्षा प्रणाली को राजनीति से मुक्त रखना चाहिए तथा कानूनी परिधि से बाहर भी इसका हल होना चाहिए।
विषय में प्रवेश करते हुए कंचन श्रीवास्तव ने अपने शैक्षिक व्यावसायिक तथा निजी परिवेश को उद्धत करते हुए भ्रष्टाचार तथा माता-पिता की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इसकी धरातलीय भूमिका को रेखांकित किया। विषय को आगे बढ़ाते हुए निवर्तमान शिक्षिका रचना चतुर्वेदी ने अमेरिका, चीन, इंडोनेशिया आदि देशों की शिक्षा व परीक्षा पद्धति को संदर्भित करते हुए भ्रष्टाचार को भारत में मूल कारण बताते हुए शिक्षा प्रणाली व परीक्षा पद्धति पर गहन विवेचना की।
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इसी क्रम में ममता जायसवाल ने भ्रष्टाचार,अभिभावकों, संतानों, शिक्षकों, विधार्थियों, कानून और सरकार की नैतिक ज़िम्मेदारी तथा परिपक्व सोच की आवश्यकता पर बल दिया। सुनीता लुल्ला ने आत्म निर्भरता को ज्यादा प्रोत्साहित किया तथा हार न मानने व सही शल्य चिकित्सा भांति निरंतर सुधार व परिणाम को आधार मानते हुए परीक्षा विधानों में सुक्ष्म निरीक्षण की वकालत की। दर्शन सिंह, गजानन पांडे, हर्षलता दुधोडिया, वैजनाथ सुनहरे, गीता अग्रवाल, के पी अग्रवाल ने अभिभावकों व शिक्षकों को गंभीर चुनौतियों से भरा पाया तथा विधार्थियों में सक्षमता विकास पर बल दिया। इस विषय चर्चा सत्र के संचालन को समाप्त कर ममता जायसवाल ने द्वितीय सत्र के संचालन की डोर गीता अग्रवाल को सौंप दी।
द्वितीय सत्र में सीमा जख्वाल दामिनी वैजनाथ सुनहरे दर्शन सिंह, दयाशंकर प्रसाद, इंदू सिंह रचना चतुर्वेदी, उमेश चंद्र, नव अंकुर, हर्षलता दुधोडिया, विनोद गिरि अनोखा, ज्योति नारायण, गजानन पांडे, के पी अग्रवाल, गीता अग्रवाल, सुनीता लुल्ला, ममता जायसवाल, डॉ दया कृष्ण गोयल आदि ने काव्य की विविध विधाओं लोकगीत, गजल, गीत, मुक्तक और कविता की प्रस्तुति दी। गोष्ठी में सुहास भटनागर, तृप्ति मिश्रा, भारती अग्रवाल, वर्षा शर्मा आदि की भी उपस्थिति रही। डॉ दया कृष्ण गोयल के अध्यक्षीय भाषण और इंदु सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के बाद गोष्ठी समाप्ति हुई।
